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एमपी में बिजली बिल पर फिर बढा बोझ: अब हर यूनिट 4 पैसे ज्यादा; एक महीने के लिए बढ़ा सरचार्ज
Tue, 29 Sep 2026 01:09 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Tue, 29 Sep 2026 01:09 PM IST
सार
मध्यप्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं पर एक बार फिर अतिरिक्त भार पड़ने वाला है। 24 सितंबर से ईंधन और बिजली खरीद समायोजन शुल्क बढ़ने के कारण प्रति यूनिट करीब चार पैसे ज्यादा चुकाने होंगे।
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बिजली संयंत्र (सांकेतिक)
- फोटो : एएनआई / रॉयटर्स
विस्तार
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मध्यप्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को अब एक बार फिर ज्यादा बिल चुकाना पड़ेगा। मप्र पॉवर मैनेजमेंट कंपनी ने फ्यूल एवं पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (एफपीपीएएस) की दर बढ़ा दी है। 24 सितंबर 2026 से अगले एक महीने के लिए यह सरचार्ज 4.59 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.06 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे बिजली की प्रति यूनिट लागत पर करीब चार पैसे का अतिरिक्त भार पड़ेगा। एफपीपीएएस का असर घरेलू सहित बिजली की अन्य श्रेणियों के उपभोक्ताओं पर भी होगा। यह सरचार्ज ऊर्जा शुल्क के आधार पर लगाया जाता है और बिजली बिल में अलग से जोड़ा जाता है। यानी सितंबर के बाद आने वाले बिलों में उपभोक्ताओं को इस बढ़े हुए शुल्क का असर दिखाई देगा।
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ईंधन और बिजली खरीद की लागत से तय होता है सरचार्ज
एफपीपीएएस बिजली उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले ईंधन और बिजली खरीद की वास्तविक लागत में होने वाले बदलाव की भरपाई के लिए लगाया जाता है। मप्र विद्युत नियामक आयोग के नियमों के अनुसार इसकी गणना हर महीने की जाती है। लागत में बदलाव के आधार पर सरचार्ज की दर घट या बढ़ सकती है। वितरण कंपनियों को एफपीपीएएस की गणना और वसूली से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने के साथ ही बिजली बिल में इसे अलग से दर्शाना होता है।
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अप्रैल में 5.36 फीसदी था सरचार्ज
इस साल एफपीपीएएस की दर में लगातार बदलाव हुआ है। 24 अप्रैल को यह 5.36 प्रतिशत था। इसके बाद 24 मई को घटकर 3.91 प्रतिशत, 24 जून को 1.11 प्रतिशत और 24 जुलाई को 3.77 प्रतिशत हुआ। 24 अगस्त से इसे बढ़ाकर 4.59 प्रतिशत किया गया था। अब 24 सितंबर से यह 5.06 प्रतिशत हो गया है।
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ईंधन और बिजली खरीद की लागत से तय होता है सरचार्ज
एफपीपीएएस बिजली उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले ईंधन और बिजली खरीद की वास्तविक लागत में होने वाले बदलाव की भरपाई के लिए लगाया जाता है। मप्र विद्युत नियामक आयोग के नियमों के अनुसार इसकी गणना हर महीने की जाती है। लागत में बदलाव के आधार पर सरचार्ज की दर घट या बढ़ सकती है। वितरण कंपनियों को एफपीपीएएस की गणना और वसूली से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने के साथ ही बिजली बिल में इसे अलग से दर्शाना होता है।
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अप्रैल में 5.36 फीसदी था सरचार्ज
इस साल एफपीपीएएस की दर में लगातार बदलाव हुआ है। 24 अप्रैल को यह 5.36 प्रतिशत था। इसके बाद 24 मई को घटकर 3.91 प्रतिशत, 24 जून को 1.11 प्रतिशत और 24 जुलाई को 3.77 प्रतिशत हुआ। 24 अगस्त से इसे बढ़ाकर 4.59 प्रतिशत किया गया था। अब 24 सितंबर से यह 5.06 प्रतिशत हो गया है।
