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MP News: भोपाल का गिद्ध पहुंचा उज्बेकिस्तान,24 दिन में पार किए 3 देश, हलाली डैम से भरी उड़ान,उपग्रह से निगरानी
Sat, 09 May 2026 09:09 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Sat, 09 May 2026 09:09 PM IST
सार
भोपाल से छोड़ा गया एक दुर्लभ सिनेरियस गिद्ध 24 दिन में करीब 3 हजार किलोमीटर उड़कर उज्बेकिस्तान पहुंच गया। गिद्ध ने राजस्थान, पाकिस्तान और अफगानिस्तान को पार किया। वन विभाग ने उपग्रह आधारित निगरानी से उसकी पूरी यात्रा पर नजर रखी।
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गिद्ध
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से खुले आसमान में छोड़ा गया एक दुर्लभ सिनेरियस गिद्ध अब उज्बेकिस्तान पहुंच गया है। इस गिद्ध ने महज 24 दिनों में करीब 3 हजार किलोमीटर की लंबी उड़ान भरते हुए राजस्थान, पाकिस्तान और अफगानिस्तान को पार किया। खास बात यह है कि उसकी पूरी यात्रा पर वैज्ञानिकों और वन विभाग की नजर बनी रही। उपग्रह आधारित निगरानी प्रणाली के जरिए हर दिन उसकी लोकेशन दर्ज की जाती रही। वन विहार नेशनल पार्क प्रबंधन के मुताबिक, इस गिद्ध का रेस्क्यू 19 दिसंबर 2025 को विदिशा जिले के सिरोंज क्षेत्र से किया गया था। उस समय यह घायल और बेहद कमजोर हालत में मिला था। इसके बाद वन विहार और केरवा स्थित गिद्ध संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र में विशेषज्ञों ने कई महीनों तक इसका उपचार किया।
मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक आवास में छोड़ा था
स्वस्थ होने के बाद 23 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रायसेन जिले के हलाली डैम क्षेत्र में इसे प्राकृतिक आवास में छोड़ा था। शुरुआत में गिद्ध करीब एक महीने तक हलाली डैम और आसपास के इलाकों में ही रहा। इसके बाद 10 अप्रैल को उसने अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू की। उपग्रह निगरानी से मिली जानकारी के अनुसार, गिद्ध पहले राजस्थान पहुंचा, फिर पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पार करते हुए 4 मई को उज्बेकिस्तान पहुंच गया। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह प्रवास गिद्धों के प्राकृतिक व्यवहार और उनकी लंबी दूरी की उड़ान क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
विश्व प्रकृति निधि और पक्षी विशेषज्ञ संस्था की मदद से निगरानी
वन विहार ने विश्व प्रकृति निधि-भारत और मुंबई प्राकृतिक इतिहास संस्था के सहयोग से इस गिद्ध में उपग्रह आधारित यंत्र लगाया था। इसके जरिए उसकी गतिविधियों और प्रवास की लगातार वैज्ञानिक निगरानी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की निगरानी से गिद्धों के संरक्षण और उनके प्रवासी मार्ग को समझने में मदद मिलती है।
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यह भी पढ़ें-नेता प्रतिपक्ष समेत कई नेताओं पर FIR दर्ज, सिंघार बोले-सरकार किसानों की आवाज से डर गई
पहले भी पाकिस्तान पहुंच चुका है भोपाल का गिद्ध
इससे पहले अप्रैल महीने में भोपाल से छोड़ा गया एक और गिद्ध पाकिस्तान पहुंच गया था। वह राजस्थान के रास्ते पाकिस्तान के खानेवाल जिले तक पहुंचा था। कुछ समय के लिए उसका सिग्नल बंद हो गया था, जिसके बाद भारत और पाकिस्तान की वन्यजीव संस्थाओं ने संपर्क कर उसे सुरक्षित खोज निकाला था। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि भोपाल के हलाली डैम क्षेत्र को गिद्धों को प्राकृतिक वातावरण में छोड़ने के लिए वैज्ञानिक तरीके से चुना गया है। यहां से छोड़े गए गिद्ध अब अंतरराष्ट्रीय सीमाएं पार कर रहे हैं, जो संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता मानी जा रही है।
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मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक आवास में छोड़ा था
स्वस्थ होने के बाद 23 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रायसेन जिले के हलाली डैम क्षेत्र में इसे प्राकृतिक आवास में छोड़ा था। शुरुआत में गिद्ध करीब एक महीने तक हलाली डैम और आसपास के इलाकों में ही रहा। इसके बाद 10 अप्रैल को उसने अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू की। उपग्रह निगरानी से मिली जानकारी के अनुसार, गिद्ध पहले राजस्थान पहुंचा, फिर पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पार करते हुए 4 मई को उज्बेकिस्तान पहुंच गया। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह प्रवास गिद्धों के प्राकृतिक व्यवहार और उनकी लंबी दूरी की उड़ान क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
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विश्व प्रकृति निधि और पक्षी विशेषज्ञ संस्था की मदद से निगरानी
वन विहार ने विश्व प्रकृति निधि-भारत और मुंबई प्राकृतिक इतिहास संस्था के सहयोग से इस गिद्ध में उपग्रह आधारित यंत्र लगाया था। इसके जरिए उसकी गतिविधियों और प्रवास की लगातार वैज्ञानिक निगरानी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की निगरानी से गिद्धों के संरक्षण और उनके प्रवासी मार्ग को समझने में मदद मिलती है।
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पहले भी पाकिस्तान पहुंच चुका है भोपाल का गिद्ध
इससे पहले अप्रैल महीने में भोपाल से छोड़ा गया एक और गिद्ध पाकिस्तान पहुंच गया था। वह राजस्थान के रास्ते पाकिस्तान के खानेवाल जिले तक पहुंचा था। कुछ समय के लिए उसका सिग्नल बंद हो गया था, जिसके बाद भारत और पाकिस्तान की वन्यजीव संस्थाओं ने संपर्क कर उसे सुरक्षित खोज निकाला था। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि भोपाल के हलाली डैम क्षेत्र को गिद्धों को प्राकृतिक वातावरण में छोड़ने के लिए वैज्ञानिक तरीके से चुना गया है। यहां से छोड़े गए गिद्ध अब अंतरराष्ट्रीय सीमाएं पार कर रहे हैं, जो संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता मानी जा रही है।
