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एमपी: मरीज का नाम-मोबाइल नंबर नहीं, फिर कैसे सत्यापित हो रहे 108 एंबुलेंस बिल? लोकायुक्त ने मांगा प्रतिवेदन

Tue, 13 Oct 2026 05:10 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Tue, 13 Oct 2026 05:10 PM IST
सार

मध्यप्रदेश में 108 एंबुलेंस के बिलों के सत्यापन और भुगतान की शिकायत पर लोकायुक्त ने स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव और एनएचएम की मिशन संचालक से  प्रतिवेदन मांगा हैं।  डिंडोरी-शहडोल के रिकॉर्ड में मरीजों की जरूरी जानकारी नहीं होने और 948 करोड़ रुपये के भुगतान की शिकायत पर लोकायुक्त ने  25 नवंबर तक रिपोर्ट मांगी है।

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MP News: No Patient Name or Mobile Number, So How Are 108 Ambulance Bills Verified? Lokayukta Seeks Report
108 एंबुलेंस की शिकायत पर लोकायुक्त ने स्वास्थ्य विभाग से दोबारा मांगा प्रतिवेदन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश में 108 एंबुलेंस सेवा के भुगतान की प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि मरीजों के नाम और मोबाइल नंबर जैसी जरूरी जानकारियों के बिना एंबुलेंस के बिलों का सत्यापन किया जा रहा है। इस मामले में शिकायत के बाद लोकायुक्त कार्यालय ने स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के मिशन संचालक से 25 नवंबर 2026 तक तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। शिकायत में जय अंबे इमरजेंसी सर्विस को करीब 948 करोड़ रुपये के भुगतान, दूसरे राज्य में पंजीकृत एंबुलेंस के संचालन और किलोमीटर के हिसाब से भुगतान में गड़बड़ी की आशंका जताई गई है। लोकायुक्त कार्यालय के दस्तावेजों के अनुसार, शिकायतकर्ता और कांग्रेस नेता पुनीत टंडन ने एनएचएम के अधिकारियों के खिलाफ शिकायत की है। इसमें कंपनी और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से सरकारी राशि के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने डिंडोरी और शहडोल जिलों से संबंधित कुछ रिकॉर्ड भी प्रस्तुत किए हैं। उनका दावा है कि इनमें मरीज का नाम, मोबाइल नंबर और कॉल करने वाले का नाम जैसी जरूरी जानकारियां दर्ज नहीं हैं। ऐसे में सवाल उठाया गया है कि जब मरीज और यात्रा का पूरा विवरण उपलब्ध नहीं है, तो एंबुलेंस के चलाए गए किलोमीटर का सत्यापन किस आधार पर किया जा रहा है। 
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किस मरीज को कहां पहुंचाया, इसकी जांच की मांग
शिकायत के मुताबिक, 108 एंबुलेंस और 108 जननी एक्सप्रेस का भुगतान चलाए गए किलोमीटर के आधार पर किया जाता है। ऐसे में प्रत्येक यात्रा का रिकॉर्ड और उसका सत्यापन जरूरी है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि जांच में यह स्पष्ट किया जाए कि एंबुलेंस किसके अनुरोध पर बुलाई गई, किस मरीज को लेकर किस अस्पताल पहुंची, यात्रा कितनी दूरी की थी और भुगतान के लिए दर्ज किलोमीटर का सत्यापन किस आधार पर किया गया। 
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विदिशा में 500 से 600 किलोमीटर चलने का उल्लेख
शिकायत में विदिशा जिले में एंबुलेंस के लगभग 500 से 600 किलोमीटर चलने का भी उल्लेख है। साथ ही, अन्य जिलों में करीब 25 से 30 एंबुलेंस संचालित होने संबंधी जानकारी का हवाला दिया गया है। शिकायतकर्ता ने इन आंकड़ों का विभागीय रिकॉर्ड से मिलान कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। 

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948 करोड़ रुपये के भुगतान पर भी सवाल
शिकायत में दावा किया गया है कि जय अंबे इमरजेंसी सर्विस को अनुबंध की तारीख से वर्ष 2024 तक 108 एंबुलेंस सेवा के संचालन के लिए करीब 948 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता ने कंपनी और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से सरकारी राशि के दुरुपयोग की आशंका जताई है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। 

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पांच जून को भी मांगी गई थी रिपोर्ट
लोकायुक्त कार्यालय के रिकॉर्ड के अनुसार, मामले में 5 जून 2026 को भी विभाग से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन 12 अक्टूबर तक जवाब प्राप्त नहीं हुआ था। अब संबंधित अधिकारियों को 25 नवंबर तक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, इस मामले में शिकायतकर्ता पुनीत टंडन ने कहा कि प्रदेश की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े इस मामले में सामने आए सवालों का निष्पक्ष जांच के माध्यम से जवाब दिया जाना चाहिए तथा सरकारी धन के उपयोग की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह आर्थिक गड़बड़ी के मामले पर तुरंत संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों को प्रतिवेदन देना चाहिए ना कि उसमें लेटलतीफी करनी चाहिए। 
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