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MP News: समृद्ध मध्यप्रदेश@2047 पर मंथन, सीएम मोहन यादव 24 अगस्त को करेंगे कॉन्क्लेव का शुभारंभ
Sat, 22 Aug 2026 10:00 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Sat, 22 Aug 2026 10:00 PM IST
सार
मध्यप्रदेश को 2047 तक समृद्ध और विकसित राज्य बनाने के रोडमैप पर 24 अगस्त को भोपाल में राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव होगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव इसका शुभारंभ करेंगे, जिसमें 130 से ज्यादा संस्थानों के प्रतिनिधि विकास की प्राथमिकताओं और भविष्य की साझेदारी पर मंथन करेंगे।
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश को वर्ष 2047 तक समृद्ध और विकसित राज्य बनाने की दिशा में 24 अगस्त को भोपाल में राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव सुबह 11 बजे कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में कॉन्क्लेव का शुभारंभ करेंगे। कार्यक्रम में प्रदेश के विकास के लिए केंद्रीय और राज्य संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी। अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान द्वारा आयोजित इस कॉन्क्लेव का विषय 'कंट्रीब्यूशन ऑफ सेंट्रली फंडेड इंस्टीट्यूशंस फॉर समृद्ध मध्यप्रदेश@2047' रखा गया है। इसकी थीम 'वन इंस्टीट्यूट-वन प्रॉमिस' होगी। कार्यक्रम में मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल समृद्ध मध्यप्रदेश@2047 पर मुख्य वक्तव्य देंगे। सुशासन संस्थान के उपाध्यक्ष प्रो. राजीव दीक्षित विशेष संबोधन करेंगे। मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. संतोष कुमार विश्वकर्मा कॉन्क्लेव की पृष्ठभूमि और इसकी जरूरत पर जानकारी देंगे।
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आर्थिक विकास और सामाजिक सशक्तिकरण पर चर्चा
कॉन्क्लेव के दूसरे सत्र में 'इन्क्लूसिव इकोनॉमिक ग्रोथ एंड सोशल एम्पावरमेंट फॉर समृद्ध मध्यप्रदेश@2047' विषय पर चर्चा होगी। इसमें केंद्रीय संस्थानों के प्रतिनिधि और प्रदेश सरकार के अधिकारी शामिल होंगे। राज्य के विभिन्न विभाग अपनी प्रमुख चुनौतियों और प्राथमिकताओं को संस्थानों के सामने रखेंगे। कॉन्क्लेव का उद्देश्य प्रदेश की विकास जरूरतों को केंद्रीय संस्थानों की विशेषज्ञता, शोध, तकनीक, आधुनिक अधोसंरचना और मानव संसाधन से जोड़ना है। इससे स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, तकनीक, ऊर्जा, पर्यावरण, कौशल विकास और उद्योग जैसे क्षेत्रों में नए समाधान तैयार करने की उम्मीद है।
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130 से ज्यादा संस्थान होंगे शामिल
कार्यक्रम में प्रदेश के 130 से अधिक केंद्रीय, राज्य और निजी संस्थानों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। इनमें आईआईटी इंदौर, आईआईएम इंदौर, आईआईएसईआर भोपाल, मैनिट भोपाल, एम्स भोपाल, एनएफएसयू भोपाल, डीआरडीओ, इसरो, आरआरकेट इंदौर सहित कई प्रमुख संस्थान शामिल हैं। इसके अलावा 59 केंद्रीय संस्थानों, 26 राज्य स्तरीय विश्वविद्यालयों, 11 शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, 19 शासकीय मेडिकल कॉलेज, आठ शोध संस्थानों और नौ चयनित निजी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं।
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'वन इंस्टीट्यूट-वन प्रॉमिस' होगा खास
कॉन्क्लेव में 'वन इंस्टीट्यूट-वन प्रॉमिस' पहल प्रमुख आकर्षण होगी। इसके तहत प्रत्येक संस्थान मध्यप्रदेश के विकास से जुड़ा एक ऐसा संकल्प लेगा, जिसे जमीन पर लागू किया जा सके। इसके जरिए लंबे समय तक संस्थागत सहयोग और संयुक्त परियोजनाओं को बढ़ावा देने का प्रयास होगा। कॉन्क्लेव के दौरान सुशासन संस्थान और केंद्रीय संस्थानों के बीच एमओयू भी किए जाएंगे। इन समझौतों के जरिए संयुक्त शोध, तकनीकी समाधान, परियोजनाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने की योजना है। सरकार का मानना है कि इससे मध्यप्रदेश में सरकार, शिक्षा, शोध, उद्योग और नवाचार के बीच मजबूत सहयोग का ढांचा तैयार होगा।
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आर्थिक विकास और सामाजिक सशक्तिकरण पर चर्चा
कॉन्क्लेव के दूसरे सत्र में 'इन्क्लूसिव इकोनॉमिक ग्रोथ एंड सोशल एम्पावरमेंट फॉर समृद्ध मध्यप्रदेश@2047' विषय पर चर्चा होगी। इसमें केंद्रीय संस्थानों के प्रतिनिधि और प्रदेश सरकार के अधिकारी शामिल होंगे। राज्य के विभिन्न विभाग अपनी प्रमुख चुनौतियों और प्राथमिकताओं को संस्थानों के सामने रखेंगे। कॉन्क्लेव का उद्देश्य प्रदेश की विकास जरूरतों को केंद्रीय संस्थानों की विशेषज्ञता, शोध, तकनीक, आधुनिक अधोसंरचना और मानव संसाधन से जोड़ना है। इससे स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, तकनीक, ऊर्जा, पर्यावरण, कौशल विकास और उद्योग जैसे क्षेत्रों में नए समाधान तैयार करने की उम्मीद है।
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130 से ज्यादा संस्थान होंगे शामिल
कार्यक्रम में प्रदेश के 130 से अधिक केंद्रीय, राज्य और निजी संस्थानों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। इनमें आईआईटी इंदौर, आईआईएम इंदौर, आईआईएसईआर भोपाल, मैनिट भोपाल, एम्स भोपाल, एनएफएसयू भोपाल, डीआरडीओ, इसरो, आरआरकेट इंदौर सहित कई प्रमुख संस्थान शामिल हैं। इसके अलावा 59 केंद्रीय संस्थानों, 26 राज्य स्तरीय विश्वविद्यालयों, 11 शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, 19 शासकीय मेडिकल कॉलेज, आठ शोध संस्थानों और नौ चयनित निजी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं।
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'वन इंस्टीट्यूट-वन प्रॉमिस' होगा खास
कॉन्क्लेव में 'वन इंस्टीट्यूट-वन प्रॉमिस' पहल प्रमुख आकर्षण होगी। इसके तहत प्रत्येक संस्थान मध्यप्रदेश के विकास से जुड़ा एक ऐसा संकल्प लेगा, जिसे जमीन पर लागू किया जा सके। इसके जरिए लंबे समय तक संस्थागत सहयोग और संयुक्त परियोजनाओं को बढ़ावा देने का प्रयास होगा। कॉन्क्लेव के दौरान सुशासन संस्थान और केंद्रीय संस्थानों के बीच एमओयू भी किए जाएंगे। इन समझौतों के जरिए संयुक्त शोध, तकनीकी समाधान, परियोजनाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने की योजना है। सरकार का मानना है कि इससे मध्यप्रदेश में सरकार, शिक्षा, शोध, उद्योग और नवाचार के बीच मजबूत सहयोग का ढांचा तैयार होगा।
