फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Bhopal News ›   MP: Kuno Denies Cheetah Autopsy Reports Under RTI, Cites National Security Threat

मध्यप्रदेश: कूनो में चीतों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट देने से इनकार, आरटीआई में राष्ट्रीय सुरक्षा को बताया खतरा

Mon, 12 Oct 2026 06:59 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Mon, 12 Oct 2026 06:59 PM IST
सार

मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट देने से वन विभाग ने इनकार कर दिया है। आरटीआई के जवाब में धारा 8(1)(ए) के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा और अन्य महत्वपूर्ण हितों पर असर पड़ने का हवाला दिया गया, जबकि विदेश दौरों का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई।

विज्ञापन
MP: Kuno Denies Cheetah Autopsy Reports Under RTI, Cites National Security Threat
चीतो से जुड़ी जानकारी आरटीआई में देने से इंकार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों की मौत के कारणों से जुड़ी पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक करने से वन विभाग ने इनकार कर दिया है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में कूनो के डीएफओ कार्यालय ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(ए) का हवाला दिया। वहीं, चीता प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों के विदेश दौरों की जानकारी मांगने पर कार्यालय ने कहा कि उसके पास इस संबंध में कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। यह जवाब 9 अक्टूबर 2026 को जारी किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट रोकने के आधार के रूप में विभाग ने कहा कि जानकारी सार्वजनिक करने से देश की संप्रभुता, अखंडता, सुरक्षा, सामरिक, वैज्ञानिक और आर्थिक हितों तथा विदेशी राज्यों के साथ संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें-  एमपी: बुधनी में क्यों भड़के शिवराज सिंह चौहान? आदिवासियों के घर टूटने पर अपनी ही सरकार से नाराज, जानें मामला
विज्ञापन


पोस्टमार्टम रिपोर्ट रोकने के आधार पर सवाल
पर्यावरण कार्यकर्ता अजय दुबे ने रिपोर्ट देने से इनकार किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि चीतों की मौत के वैज्ञानिक कारणों से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक होने से संरक्षण परियोजना का आकलन करने और जिम्मेदारी तय करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने सवाल किया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट साझा करने से राष्ट्रीय सुरक्षा को किस तरह खतरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि आरटीआई कानून संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) से निकलता है, जो हर भारतीय नागरिक को जानने का अधिकार देता है। एमपी वन विभाग भारतीय नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों से ज्यादा विदेशी हितों को प्राथमिकता क्यों दे रहा है? चीता प्रोजेक्ट शुरू होने से अब तक कई चीतों की मौत हो चुकी है। मौत के वैज्ञानिक कारणों का खुलासा किए बिना जवाबदेही कैसे तय होगी?
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें-  मध्यप्रदेश: सीजीएसटी का सुपरिंटेंडेंट दो लाख रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार, घरों से मिले 72.5 लाख नकद

विदेश दौरों का रिकॉर्ड कहां है?
आरटीआई आवेदन में चीता प्रोजेक्ट से संबंधित अधिकारियों के विदेश दौरों का ब्योरा भी मांगा गया था। डीएफओ कार्यालय ने जवाब दिया कि उसके पास इस संबंध में रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। दुबे ने नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका सहित संबंधित देशों के साथ हुए समझौता ज्ञापनों (MoU) की प्रतियां और अधिकारियों के दौरों पर हुए खर्च का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि   ऐसा लगता है कि कूनो नेशनल पार्क डीएफओ चीता प्रोजेक्ट को एक सार्वजनिक संरक्षण परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि एक गुप्त मिशन के रूप में चलाना चाहता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed