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भोपाल के सरकारी स्कूल का छात्र बना ग्लोबल स्टार: गौरैया बचाने का मॉडल श्रीलंका में छाया, शिक्षिका को भी सम्मान

Mon, 02 Nov 2026 05:30 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Mon, 02 Nov 2026 05:30 PM IST
सार

भोपाल के सरकारी स्कूल के 11वीं के छात्र प्रसन्न शर्मा ने दो साल तक गौरैया संरक्षण पर काम कर श्रीलंका के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में तीसरा स्थान हासिल किया। अब श्रीलंका का शिक्षा विभाग उनके संरक्षण मॉडल को 50 हजार विद्यार्थियों के सामने प्रस्तुत करना चाहता है।

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Student from a government school in Bhopal becomes a global star: Model for saving sparrows gains prominence i
शिक्षिका डॉ. आर्चना शुक्ला के साथ छात्र प्रसन्न शर्मा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भोपाल के एक सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले 11वीं के छात्र ने अपनी छोटी-सी पहल को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला दी है। गौरैया को बचाने के लिए शुरू किया गया उसका प्रयास अब श्रीलंका के 50 हजार विद्यार्थियों के सामने उदाहरण के तौर पर पेश किया जाएगा। श्रीलंका में आयोजित स्टेप ग्लोबल समिट-2026 में प्रसन्न शर्मा ने अपने शोध की मौखिक प्रस्तुति दी और 80 शोध प्रस्तुतियों में शीर्ष तीन में जगह बनाकर तीसरा स्थान हासिल किया। वह सम्मेलन में सबसे कम उम्र के प्रतिभागी थे। खास बात यह है कि प्रसन्न शर्मा ने यह उपलब्धि किसी बड़े संस्थान में नहीं, बल्कि भोपाल के शासकीय संदीपनी महात्मा गांधी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पढ़ते हुए हासिल की है। कोलंबो की होराइजन यूनिवर्सिटी में आयोजित सम्मेलन में प्रसन्न ने फ्रॉम क्लासरूम टू कम्युनिटी अर्बन कंजर्वेशन ऑफ स्पैरोज थ्रू प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग विषय पर शोध प्रस्तुत किया। इसमें उन्होंने बताया कि किस तरह स्कूली पढ़ाई को सामुदायिक भागीदारी से जोड़कर शहरों में गौरैया संरक्षण का प्रभावी मॉडल तैयार किया जा सकता है। उनकी प्रस्तुति को निर्णायक मंडल ने शीर्ष तीन में शामिल किया और बेस्ट ओरल प्रेजेंटेशन अवॉर्ड से सम्मानित किया।
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दो साल की निगरानी, 86 प्रतिशत घोंसलों में पहुंची गौरैया
प्रसन्न की इस उपलब्धि के पीछे केवल शोध पत्र नहीं, बल्कि जमीन पर किया गया दो साल का काम है। शिक्षिका डॉ. अर्चना शुक्ला के मार्गदर्शन में प्रसन्न ने नौवीं कक्षा में रहते हुए गौरैया संरक्षण की गतिविधियों से जुड़ना शुरू किया था। इसके लिए भोपाल के अवधपुरी क्षेत्र को अध्ययन क्षेत्र बनाया गया। यहां अलग-अलग मंदिरों में विद्यार्थियों ने खुद नेस्ट बॉक्स यानी घोंसलों के डिब्बे तैयार कर लगाए। प्रसन्न लगातार इन बॉक्स की निगरानी करते रहे। उन्होंने अध्ययन किया कि कितने बॉक्स में गौरैया पहुंच रही हैं, कितने इस्तेमाल नहीं हो रहे और संरक्षण की व्यवस्था में क्या सुधार किया जा सकता है। इस अध्ययन में 86 प्रतिशत नेस्ट बॉक्स अपनाए गए, जबकि 14 प्रतिशत का परिणाम अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा। इसी अनुभव और आंकड़ों को उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर शोध के रूप में प्रस्तुत किया।
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श्रीलंका के 50 हजार विद्यार्थियों के सामने बनेगा उदाहरण
इस प्रस्तुति से प्रभावित होकर श्रीलंका के शिक्षा विभाग की हेड जूरी मेंबर ने प्रसन्न और उनकी शिक्षिका को दोबारा आमंत्रित किया है। डॉ. अर्चना शुक्ला के मुताबिक, श्रीलंका के शिक्षा विभाग की योजना है कि प्रसन्न को वहां के करीब 50 हजार विद्यार्थियों के सामने उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जाए, ताकि बच्चे समझ सकें कि संरक्षण का काम स्कूली स्तर पर भी शोध और सामुदायिक भागीदारी के जरिए किया जा सकता है। कोलंबो की होराइजन यूनिवर्सिटी ने भी अपने परिसर में इस संरक्षण परियोजना को आगे बढ़ाने में सहयोग की इच्छा जताई है।
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पीएचडी स्तर की शोध प्रस्तुति 11वीं के छात्र ने की
डॉ. अर्चना शुक्ला ने बताया कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में आमतौर पर विद्यार्थी कॉलेज या पीएचडी स्तर पर पहुंचने के बाद अपना शोध प्रस्तुत करते हैं, लेकिन प्रसन्न ने 11वीं कक्षा में ही पूरा शोध पत्र तैयार कर अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया। सम्मेलन में चयन के लिए पहले शोध का सार भेजना पड़ा। इसके बाद काम से जुड़े प्रमाण और दस्तावेज जमा किए गए और व्यक्तिगत साक्षात्कार की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। इन सभी चरणों को पार करने के बाद प्रसन्न को मौखिक प्रस्तुति का अवसर मिला। उन्होंने इसे मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उनके मुताबिक, विभाग से पहली बार कोई विद्यार्थी विदेश जाकर अपना शोध कार्य प्रस्तुत करने पहुंचा है।


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शिक्षिका को भी मिला सस्टेनेबिलिटी एक्सीलेंस अवॉर्ड
इस उपलब्धि में मार्गदर्शक शिक्षिका डॉ. अर्चना शुक्ला को भी अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिला है। उन्हें बच्चों को प्रकृति और जैव विविधता से जोड़ने के लिए सस्टेनेबिलिटी एक्सीलेंस अवॉर्ड-2026 से सम्मानित किया गया। उन्होंने सम्मेलन में जैव विविधता और ब्लू रिवॉल्यूशन विषय पर पैनल चर्चा में भी हिस्सा लिया और विभिन्न देशों के शिक्षकों व विशेषज्ञों के साथ अपने अनुभव साझा किए। विद्यालय के गणित शिक्षक हेमंत दुबे ने भी ऑनलाइन माध्यम से सम्मेलन में प्रस्तुति दी। सम्मेलन में संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया और चीन सहित 10 देशों के शिक्षकों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। करीब 80 शोध प्रस्तुतियों के बीच भोपाल के सरकारी स्कूल के छात्र का शीर्ष तीन में पहुंचना और पुरस्कार जीतना प्रदेश के स्कूली विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरक उपलब्धि है। विद्यालय के प्राचार्य, उपप्राचार्य, जिला शिक्षा अधिकारी और स्कूल शिक्षा विभाग के कमिश्नर अभिषेक सिंह ने प्रसन्न, डॉ. अर्चना शुक्ला और हेमंत दुबे को बधाई दी।
 
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