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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Bhopal News ›   MP Cheetah Project: 3 of PM Modi’s 8 Cheetahs Alive After 4 Years, Asha and Jwala Expand the Legacy

एमपी: कूनो में PM मोदी के छोड़े 8 चीतों की 4 साल बाद पूरी कहानी, 3 अभी जिंदा... बाकी के साथ क्या हुआ?

Thu, 17 Sep 2026 11:06 AM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Thu, 17 Sep 2026 11:06 AM IST
सार

मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चार साल पहले आठ चीतों से शुरू हुआ सफर अब नई पीढ़ी तक पहुंच गया है। पीएम मोदी के छोड़े आठ चीतों में तीन जिंदा हैं, जबकि आशा और ज्वाला ने भारत में चीता कुनबा बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।
 

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MP Cheetah Project: 3 of PM Modi’s 8 Cheetahs Alive After 4 Years, Asha and Jwala Expand the Legacy
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीता प्रोजेक्ट के चार साल पूरे हो गए हैं। 17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को कूनो में छोड़ा था। उस समय इन आठ चीतों के साथ भारत में चीता पुनर्वास की शुरुआत हुई थी। चार साल बाद इन आठ में से तीन चीते ही जीवित हैं, जबकि पांच की अलग-अलग कारणों से मौत हो चुकी है। खास बात यह है कि शुरुआती आठ में शामिल आशा और ज्वाला ने भारत में प्रजनन कर चीता कुनबा बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। बता दें अभी भारत में जन्मे जीवित शावकों की संख्या 32 और देश में कुल चीतों की संख्या 52  पहुंच गई थी। इसमें 49 कूनो में और तीन गांधी सागर में हैं।
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पीएम ने इन आठ चीतों को छोड़ा था 
17 सितंबर 2022 को नामीबिया से लाए गए आठ चीतों में पांच मादा और तीन नर थे। बाद में इनके नाम बदले गए। आशा का नाम आशा, ओबान का पवन, सवाना का नाभा, सियाया का ज्वाला, एल्टन का गौरव, फ्रेडी का शौर्य और तिब्लिसी का धात्री रखा गया। आठवां चीता साशा अपने इसी नाम से जाना गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 17 सितंबर 2022 को कूनो में छोड़े गए आठ चीतों में अब आशा, ज्वाला और गौरव ही बचे हैं। 
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अब कौन-कौन जिंदा है?
आशा: यह शुरुआती आठ चीतों में शामिल मादा है। कूनो में इसने प्रजनन किया और भारत में जन्मे चीतों की नई पीढ़ी बढ़ाने में योगदान दिया। आशा ने पहले लीटर में तीन और दूसरे लीटर में पांच शावकों को जन्म दिया। 

 ज्वाला: इसका पुराना नाम सियाया था। ज्वाला अब इस प्रोजेक्ट की अहम मादा चीतों में शामिल है। पहले लीटर में चार शावकों को जन्म दिया, लेकिन इसमें एक ही शाव बच पाया। दूसरे लीटर में चार शावको को जन्म दिया, जिसमें तीन जिंदा और तीसरे लीटर में पांच शावकों को जन्म दिया। यह पांचों जिंदा हैं। 
 गौरव: इसका पुराना नाम एल्टन था। यह भी 2022 में आए आठ चीतों में शामिल है और अब जीवित तीन चीतों में है। 
 
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पांच चीतों की हो चुकी है मौत
साशा: मार्च 2023 में इसकी मौत हुई। जांच में किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी सामने आई थी।
धात्री: इसका पुराना नाम तिब्लिसी था। अगस्त 2023 में इसकी मौत हो गई।
शौर्य: इसका पुराना नाम फ्रेडी था। जनवरी 2024 में इसकी मौत हुई।
पवन: इसका पुराना नाम ओबान था। अगस्त 2024 में इसकी मौत हो गई।
नाभा: इसका पुराना नाम सवाना था। जुलाई 2025 में चोटों के बाद इसकी मौत हुई। 

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आठ से शुरू हुआ सफर, अब नई पीढ़ी संभाल रही कमान
कूनो में सितंबर 2022 में पहले आठ चीते लाए गए थे। इसके बाद फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते भारत पहुंचे। आगे चलकर चीतों का प्रजनन शुरू हुआ और भारत में ही शावकों का जन्म होने लगा। मार्च 2026 में ज्वाला के पांच शावकों के जन्म के बाद देश में चीतों की कुल संख्या 52 और भारत में जन्मे जीवित शावकों की संख्या 32बताई गई थी। यानी चार साल पहले जिन आठ चीतों से भारत में दोबारा चीते बसाने की शुरुआत हुई थी, उनमें से तीन आज भी इस सफर का हिस्सा हैं। वहीं, आशा और ज्वाला से जन्मी नई पीढ़ी ने कूनो की कहानी को एक नए दौर में पहुंचा दिया है। अप्रैल 2026 में भारत में जन्मी एक मादा चीते ने भी कूनो के जंगल में चार शावकों को जन्म दिया, जिससे प्राकृतिक परिस्थितियों में प्रजनन की एक और उपलब्धि सामने आई।

कठिन अनुभवों से मिली सीख 
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पहला साल कूनो की टीम ने परिस्थितियों के साथ तालमेल बैठाया। पहला साल कठिन अनुभवों से मिली उम्मीद के साथ खत्म हुआ। इससे यह सीख मिली कि चीतों को दोबारा बसाना कोई एक बार में पूरा होने वाली प्रक्रिया नहीं है। इसमें लगातार सीखना, परिस्थितियों के अनुसार बदलाव करना, चुनौतियों का सामना करना और उनसे उबरना शामिल है। इसके बाद सफल प्रजनन से उम्मीद बढ़ती गई। 
 
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