MP Budget 2025: सीएम राइज स्कूल योजना को विस्तार, तकनीकी शिक्षा व अनुसंधान पर भी रहा फोकस; जानें बड़े एलान
MP Budget 2025: मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 का बजट पेश करते हुए जनजातीय वर्ग के विकास और शिक्षा पर विशेष जोर दिया है। भाषण में ये घोषणा की गई है कि प्रदेश के जनजातीय बहुल इलाकों में सीएम राइज स्कूल खोले जाएंगे।
विस्तार
मध्यप्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बजट पेश कर दिया है, जिसमें शिक्षा के क्षेत्र में बड़े सुधारों और योजनाओं का खाका पेश किया गया है। बजट में प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं, जिनका उद्देश्य प्रदेश में शैक्षणिक गुणवत्ता को मजबूत करना और विद्यार्थियों को नई तकनीकों से जोड़ना है।
स्कूली शिक्षा में बड़ा निवेश
प्रदेश में वर्ष 2024-25 में 4,473 विद्यालयों में पूर्व-प्राथमिक अथवा नर्सरी कक्षाएं प्रारंभ हो चुकी हैं। प्रारंभिक शिक्षा में नामांकन दर 98 प्रतिशत, माध्यमिक शिक्षा में 70 प्रतिशत और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा में 67 प्रतिशत से अधिक हो गई है।
बजट में स्कूली शिक्षा को और मजबूत करने के लिए सीएम राइज स्कूल योजना को विस्तार दिया गया है। इस योजना के तहत अब तक 275 विद्यालय खोले जा चुके हैं और वर्ष 2025-26 तक इन विद्यालयों में परिवहन सुविधा भी शुरू कर दी जाएगी। इसके अलावा, पीएम श्री योजना के तहत 780 विद्यालयों में आधुनिक पाठ्यक्रमों के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा रही है। शिक्षकों की भर्ती को लेकर भी सरकार ने बड़ा एलान किया है। वर्ष 2024-25 में 3,259 शिक्षकों की नियुक्तियां की जा चुकी हैं और 19,362 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया जारी है।
व्यावसायिक शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा
‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ के तहत अब तक 2,383 उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में 14 ट्रेडों में व्यावसायिक शिक्षा संचालित की जा रही है। इसे बढ़ाकर वर्ष 2025-26 में 600 नए विद्यालयों तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
शिक्षा संबंधी विभिन्न योजनाओं के लिए बजट में भारी निवेश किया गया है:
- सीएम राइज स्कूल योजना – 3,068 करोड़ रुपये
- साइकिल वितरण योजना – 215 करोड़ रुपये
- पीएम श्री योजना – 430 करोड़ रुपये
- निःशुल्क पाठ्यपुस्तक योजना – 124 करोड़ रुपये
- शाला भवनों के रखरखाव के लिए – 228 करोड़ रुपये
उच्च शिक्षा को मिलेगी नई दिशा
प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा विस्तार किया गया है। वर्तमान में राज्य में 73 विश्वविद्यालय और 1,400 से अधिक महाविद्यालय संचालित हो रहे हैं। ‘प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस’ योजना के तहत प्रत्येक जिले में एक महाविद्यालय को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
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इन कॉलेजों में बायोटेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे आधुनिक विषयों की पढ़ाई शुरू हो चुकी है। उच्च शिक्षा के विस्तार को देखते हुए सरकार ने खरगोन, गुना और सागर में तीन नए सरकारी विश्वविद्यालयों की स्थापना की है। साथ ही, 133 नए महाविद्यालय भवनों का निर्माण और 192 भवनों के सुदृढ़ीकरण का कार्य जारी है।
तकनीकी शिक्षा और अनुसंधान पर फोकस
प्रदेश सरकार ने तकनीकी शिक्षा को नई ऊंचाई देने के लिए आईआईटी इंदौर, आईआईटी जोधपुर और आईआईटी दिल्ली के साथ समझौते किए हैं। इससे इंजीनियरिंग के छात्रों को आधुनिक लैब्स, रिसर्च सेंटर्स और निःशुल्क इंटर्नशिप जैसी सुविधाएं मिलेंगी। उज्जैन में डीप-टेक रिसर्च एंड डिस्कवरी कैंपस स्थापित किया जा रहा है।
इसके अलावा, अगले पांच वर्षों में प्रत्येक संभाग में आईआईटी के स्तर का "मध्यप्रदेश इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी" खोलने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, प्रदेश में डिजिटल यूनिवर्सिटी और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के नए परिसरों की स्थापना की जाएगी।
आईटीआई और कौशल विकास को बढ़ावा
राज्य में इस वर्ष 22 नए व्यवसायों में आईटीआई शुरू करने की मंजूरी दी गई है, जिससे आईटीआई संस्थानों की संख्या बढ़कर 958 हो जाएगी और 1.21 लाख सीटें उपलब्ध होंगी आईटीआई संस्थानों में जनजातीय एवं परंपरागत कौशल, एक जिला-एक उत्पाद और ग्रीन स्किलिंग जैसे नए पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। इसके तहत देवास, छिंदवाड़ा और धार में सोलर टेक्निशियन और इलेक्ट्रिक व्हीकल मैकेनिक जैसे आधुनिक ट्रेड भी शुरू किए गए हैं।
पिछले बजट में क्या खास था
पिछले साल 2024-25 के बजट में शिक्षा को लेकर कई बड़े एलान हुए थे, जिनमें सीएम राइज स्कूलों का विस्तार, पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं की शुरुआत, सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती और तकनीकी शिक्षा को मजबूत करने जैसे प्रावधान शामिल थे।
पिछले बजट में शिक्षा क्षेत्र के लिए कुल 52,682 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया था। इसके तहत करीब 150 सीएम राइज स्कूलों को नए भवनों में संचालित करने की योजना बनाई गई थी, जिससे बच्चों को आधुनिक सुविधाएं मिल सकें। दूरदराज के बच्चों को स्कूल आने में सुविधा हो, इसके लिए परिवहन व्यवस्था भी लागू की गई थी। इसके अलावा, 1,500 सरकारी स्कूलों में पूर्व-प्राथमिक कक्षाएं शुरू की गईं और 3,200 और स्कूलों में इसे लागू करने की योजना बनाई गई।
तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और कोडिंग को सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया था। साथ ही खेल, नृत्य और संगीत शिक्षकों के 11,000 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई थी। पीएम श्री योजना के तहत 730 स्कूलों को चिन्हित कर उनकी शैक्षिक गुणवत्ता और आधारभूत ढांचे को सुधारने का लक्ष्य रखा गया था। प्रदेश के आदिवासी और पिछड़े वर्ग के छात्रों की शिक्षा के लिए भी सरकार ने कदम उठाए थे। बैगा, भारिया और सहरिया जैसी विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए पीएम जन-मन योजना के तहत 22 नए छात्रावास खोले जाने का निर्णय लिया गया था।

छात्रवृत्ति योजना के तहत 64 लाख छात्रों को विभिन्न छात्रवृत्तियां देने का प्रावधान रखा गया था। इसके अलावा, 63 लाख विद्यार्थियों को मुफ्त गणवेश और 87 लाख को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें देने की घोषणा की गई थी। उच्च शिक्षा के स्तर पर प्रदेश सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए और इस दिशा में प्रदेश में तीन नए सरकारी विश्वविद्यालयों की स्थापना की। इनमें क्रांति सूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय (खरगोन), तात्या टोपे विश्वविद्यालय (गुना) और रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय (सागर) शामिल थे। साथ ही दो निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना भी की गई थी।
विश्व बैंक परियोजना के तहत 247 महाविद्यालयों के लिए 244 करोड़ रुपये का बजट आवंटित कर उनके बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का काम किया गया। रोजगार को ध्यान में रखते हुए तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास के लिए भी सरकार ने कदम बढ़ाए। प्रदेश में पहले से संचालित 268 सरकारी आईटीआई के अलावा 22 नई आईटीआई खोली गईं, जिससे 5,280 अतिरिक्त सीटों की वृद्धि हुई। देवास, छिंदवाड़ा और धार में ग्रीन स्किलिंग आईटीआई स्थापित कर सोलर टेक्नीशियन और इलेक्ट्रिक व्हीकल मैकेनिक जैसे कोर्स शुरू किए गए।प्रदेश के हर संभाग में इंजीनियरिंग और पॉलीटेक्निक महाविद्यालयों में कोडिंग लैब स्थापित करने का निर्णय लिया गया था, ताकि छात्रों को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जा सके। मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना के तहत 2023-24 में 61 हजार से अधिक मेधावी छात्रों को 450 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति वितरित की गई।
