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मियां भोपाली के झोले-बतोले: एमपी में शराबबंदी... उमाजी के वार पर उषाजी का पलटवार

Sat, 05 Nov 2022 02:05 PM IST
Ajay Bokil अजय बोकिल
Updated Sat, 05 Nov 2022 02:05 PM IST
सार

मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री राज्य में शराबबंदी की मांग पर अड़ी है। अब उनके सामने शिवराज सरकार की तेजतर्रार मंत्री उषा ठाकुर को लाकर खड़ा कर दिया गया है। मुकाबला दिलचस्प है। आप भी जानिए मियां भोपाली के खास अंदाज में कि हो क्या रिया हे...

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Miya Bhopali Jhole-Batole Uma Bharti Usha Thakur Liquor Banned in MP
अमर उजाला ग्राफिक्स - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

को खां, मधपिरदेश में शराबबंदी को लेके एक महिला मंतरी ओर एक माजी मुखमंतरी में ठन गई हे। माजी मुखमंतरी उमा भारती पिरदेश में शराब पे बेन को लेके अड़ी हुई हें ओर अब तो उन्होंने 7 नवंबर से 14 जनवरी तक पूरे पिरदेश में शराबबंदी मुहिम चलाने का एलान कर दिया हेगा। इस दोरान वो घर से बाहर रहेंगी। उमाजी ने पूरे तोर पे शराबबंदी की मांग करते हुए बोला के शराब की कमाई से सरकार चलाना वेसा ई हेगा के कोई मां अपने बच्चे का खून पीके घर चलाए। इसके जवाब में सरकार की तरफ से संसकिरती मंत्री उषा ठाकुर ने उमाजी की मांग को ये केह के खारिज करा के अगर लोग शराब पीना बंद कर दें तो शराबबंदी खुद ब खुद लागू हो जाएगी। उषाजी ने पलट के सवाल करा के जिन राज्यों में शराबबंदी लागू हेगी, वहां लोगों ने कोन सा दारू पीना बंद कर दिया। मतलब ये के अगले चुनाव तक एमपी में भाजपा के भीतर ई शराब पे सियासत जारी रेगी।

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मियां, एक जमाने में भाजपा की अव्वल लाइन की नेता रई उमा भारती आजकल फुर्सत में हे। मुखमंतरी तो महज 7 महीने ई रे सकी। बाद में केन्द्रीय मंतरी के तोर पे भी वो कुछ खास नई कर पाई। जब मन होता केदारनाथ चली जाती। फिर भी मन की शांति नई मिली। सो, उन्होंने आजकल एमपी में फुल शराबबंदी की मांग छेड़कर मुखमंतरी शिवराजसिंह चोहान को घेर रखा हे। वो बोलीं के हम महात्मा गांधी के सच्चे चेले हें। लिहाजा पिरदेश में शराबबंदी होके रेगी। उधर शिवराजजी की परेशानी ये हेगी के अगर पिरदेश में गुजरात ओर बिहार की तर्ज पर शराबबंदी लागू भी कर दें तो इसके बदले 14 हजार करोड़ रू. की रकम लाएं कहां से? पेले ई उनकी सरकार भारी कर्जे में हे। चूंकि दारू से सीधे सरकारी खजाने में पेसा चला आता हे, इस वास्ते इस समाज बुराई को भी सरकार कमाई के आईने में देखती हे।
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मियां, दिलचस्प बात ये हेगी के जब उमा भारती एमपी की मुखमंतरी थीं, उस वकत भी उन्होंने पिरदेश में शराबबंदी लागू नई करी थी। वो खुद बोलीं के मेरे जमाने में दारू ठेकों  से 700 करोड़ रू. की कमाई होती थी। आज 14 हजार करोड़ रू. की हो रई हेगी। उमाजी के टेम पे एमपी का सालाना बजट 24 हजार करोड़ रू. हुआ करता था, जो शिवराज मामाजी के जमाने में पोने 3 लाख करोड़ रू. का हो गया हे। अब सरकार की परेशानी ये हेगी के अगर दारू का धंधा बंद कर दें तो इत्ती रकम क्या बेच के जुटाएं?
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इसके पेले उमाजी का निशाना सीधे वो शिवराज रेते थे, जिनको वो अपना बड़ा भाई ( शिवराज उमाजी से दो महीने बड़े हें) बताती हें। उमाजी के दबाव में सरकारी अमले ने शुरू में छुट पुट कार्रवाई भी करी। मगर इस साल अपरेल में सरकार ने यू टर्न लेके शराब हर खासो आम के लिए मुहैया करवा दी। मंशा ये रई, जो पीना चाह रिया हे, उसे किसी किसम की परेशानी न हो। घर तक में बार खुल गए।

मियां, एसे में उमा भारती का भड़कना वाजिब था, कहां तो वो सूबे में फुल शराबबंदी का हांका लगा रई थीं अोर कहां शिवराज सरकार ने पब्लिक की खुशी के मद्देनजर हर गली मोहल्ले में अहाते खुलवा दिए। इस तरह सरकार ने बेवड़ों के वोट तो सो फीसदी पक्के कर लिए। बाद में उमाजी के दबाव में हुक्का लाउंजों पे कार्रवाई करी। इसपे उमा भारती बोली के इसी माफिक सरकारी शराब ठेके भी बंद कराओ।

इस दफे मामला जरा अलग हेगा। उमाजी का मुकाबला उषाजी कर रई हें। उषाजी पिरदेश के संस्करिती मंतरी भी हें। हमेशा धरम संस्कार की बातें करती हें। इस बार उन्होंने उमाजी को ऐसा जवाब दिया हेगा के उनको भी सोचना पड़ेगा। यानी लोग खुद ही दारू पीना छोड़ दें तो शराब के अहाते खुद बंद हो जाएंगे। सरकार को कुछ करने की जरूरत ई नई पड़ेगी। यानी मियां, जब बांस ई नई रेगा तो बांसुरी केसे बजेगी। सबको पता हे के पिरदेश में अगले  साल विधानसभा ओर उसके अगले साल लोकसभा के चुनाव होने हें। सो, उमाजी भी समाज सुधार के बहाने सियासत में अपनी वापसी पक्की करना चाह रई हें। अब शराबबंदी की ये मुहिम उनकी कित्ती मदद कर पाएगी, देखने की बात हे वरना बीजेपी में तो कोई उनकी बातों ओर हरकतों को खास तवज्जो नई दे रिया।


- बतोलेबाज 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण):
 यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw।co।in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।  

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