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मियां भोपाली के झोले बतोले: महापुरूषों का पूरा नाम लोग सरकारी हुकम से क्यों कर बोलेंगे?

Sat, 12 Nov 2022 12:43 PM IST
Ravindra Bhajni रवींद्र भजनी
Updated Sat, 12 Nov 2022 12:43 PM IST
सार

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ग्वालियर में कहा कि महापुरुषों का पूरा नाम लिया जाएगा। एबीवीपी के कार्यक्रम में चौहान के इस ऐलान पर खूब तालियां भी बजी। पर सवाल यह है कि क्या लोग सरकारी आदेश को मानेंगे? 

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Miya Bhopali Jhole-Batole Shivraj Singh Chouhan Full Name Of Freedom Fighters
अमर उजाला ग्राफिक्स - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

को खां, ऐलान करने में अपने मामा शिवराजसिंह चोहान दा कोई जवाब नई। हाल में उन्होंने घोषणा करी के पिरदेश में सभी आला हस्तियों के नाम पूरे लिखे जाएंगे। उनके केने का मतलब ये था कि महापुरूषों के आधे अधूरे या अंगरेजी में छोटे करके नाम लेना या लिखना उनकी बेइज्जती हेगी। ऐसी शख्सियतों के नाम पूरे लिखे जाएं इसका कानूनी इंतजाम करा जाएगा। एमपी के मुखमंतरी शिवराज ने ये घोषणा गवालियर में हो रिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 55 वे सूबाई जलसे में करी। ये जलसा तीन दिन का हे।

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मियां, मामा शिवराज ने जो बात उठाई हे, वो मुद्दे की हे। कुछ लोग इसे महज सियासी शगूफा मान रिए हे। ये हकीकत हे के कई जगहों का नामकरण तो महापुरूषों के नाम पे हो जाता हेगा पर हकीकत में लोग उस हस्ती का पूरा नाम लेने मे हिचकते हेंगे। खासकर तब के जब नाम भोत लंबा हो। छोटे नाम तो फिर भी चल जाते हेंगे। पिरदेश की राजधानी भोपाल वालों का तो किसी का नाम बिगाड़ने में तो रिकार्ड हेगा। जब भी किसी नामी हस्ती के नाम पे किसी जगह का नामकरण कोई ने करा तो लोगों ने चंद दिनों में उसका रूप बदल दिया। यानी असली नाम ढूंढो तो जानें। मसलन भोपाल की पेली सरकारी बस्ती तात्या टोपे नगर का नाम अमर शहीद तात्या टोपे के नाम पे रखा गया था। जिस बरस टीटी नगर बसाने की शुरूआत हुई, उसी साल तात्या टोपे की शहादत के सो साल पूरे हो रिए थे। लिहाजा उन्हीं के नाम पे नई बस्ती का नामकरण कर दिया गया। मगर भोपालियों ने जल्द ही ‘तात्या टोपे नगर’ नाम टी.टी.नगर कर दिया। अब ये टी.टी. नगर के नाम से ज्यादा जाना जाता हे। भोपाल के हजार में से एक इंसान भी शायद ई बता पाए के टी.टी.नगर का फुल फार्म हे क्या। इसी तरह बरसो बाद शहर में नया कारोबारी इलाका महाराणा पिरताप नगर बना। मगर लोगों ने उसका नाम भी बिगाड़ के एम.पी.नगर कर दिया। चार साल पेले सरकार ने बेरागढ़ का नाम संत हिरदाराम नगर करा। मगर लोग उसे बेडागर (बेरागढ़) ज्यादा बोलते हें। उसका बदला हुआ नाम संत हिरदाराम नगर तो महज कागजों में हेगा।
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खां, नाम बदलने की ताजातरीन मिसाल शेहेर में हबीबगंज स्टेशन की हे। सरकार ने बरसों पुराने ओर भोपाल के नवाब हमीदुल्ला खां के रिश्तेदार हबीबुल्लाह के नाम पे बने रेलवे स्टेशन का काम बदल के गोंड आदिवासी रानी कमलापति के नाम पे कर दिया। भोपाली अब इसे आरकेएमपी बोलने लगे हें, क्योंकि खुद रेलवे वाले इसे आरकेएमपी लिख रिए हें। इसी तरह शेहेर का गांधी मेडिकल काॅलेज का पूरा नाम शायद ई कोई लेता हेगा। लोग इसे जीएमसी के नाम से पुकारते हें तो मोतीलाल नेहरू विज्ञान महाविद्यालय का चलतू नाम एमवीएम हेगा। इसी तरह भोपाल के गुरू तेग बहादुर काम्प्लेक्स का नाम भी आम बोलचाल में जीटीबी काम्प्लेक्स हेगा। भोपाल की अमीरों की कालोनी अरेरा काॅलोनी का नाम सरकारी रिकार्ड में स्वामी दयानंद नगर हेगा, ये खुद अरेरा काॅलोनी वालों को भी शायद ही पता हो। 
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केने का मतलब ये के मियां, नाम आप कोई भी आला हस्ती के नाम पे रख दो, लोगों को जो बोलना हे, वोई बोलेंगे। अब भोपाल का पुराना नाम भोजपाल बताया जाता हे मगर चलन में तो भोपाल ई हेगा। इसकी असल वजह ये हे के अमूमन लोग वो नाम जल्द अपनाते हें, जिसे बोलने में ओर समझने में आसानी हो। कागज पे क्या लिखा हे, इससे किसी को खास मतलब नई हे। खुद शिवराज जिसमें रेते हें, भोपाली उसे ‘सीएम हाउस’ ई बोलते हें। ‘मुखमंतरी निवास’ बोलने वाला बंदा बिरला ई होगा।  

अब सवाल ये हे मियां, अगर महापुरूष का पूरा नाम बोलने का सरकारी हुकम जारी भी हो जाएगा तो उससे होगा क्या? क्या उसकी उदूली पर सजा देंगे? ओर क्या लोग उसे मानेंगे? मिनी बस वाले, मैजिक वाले या आटो रिक्शा वाला सवारियों को बुलाने महापुरूष का पूरा नाम क्योंकर लेने लगेगा? उससे उन्हें क्या फायदा? ओर तो ओर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद तक का पूरा नाम लोग लेने में हिचकते हें। बोलचाल में इसे एबीवीपी ज्यादा बोला जाता हे। खां, आम आदमी को जगह का नाम महापुरूष के नाम पे होने से ज्यादा मतलब उस लफ्ज के आसानी से उच्चारण से ज्यादा हे। पूरा नाम कुछ भी हो, जो समझ आ जाए और आसानी से बोला जाए, वोई जनता का नामकरण हे। इसे शिवराज चाहें भी तो नई बदल सकते।  


- बतोलेबाज   

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण):
 यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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