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शिक्षकों को बड़ी राहत: ई-अटेंडेंस नहीं लगी तो भी नहीं रुकेगा पूरे महीने का वेतन, तकनीकी गड़बड़ी से थे परेशान
Thu, 10 Sep 2026 09:47 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Thu, 10 Sep 2026 09:47 PM IST
सार
ई-अटेंडेंस में नेटवर्क, एप या लोकेशन की तकनीकी समस्या से उपस्थिति दर्ज नहीं होने पर अब शिक्षकों और अतिथि शिक्षकों का वेतन नहीं रोका जाएगा। एक-दो दिन की अनुपस्थिति पर पूरे महीने का वेतन रोकने के बजाय संकुल प्राचार्य कारण पूछकर नियमानुसार कार्रवाई करेंगे।
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डीपीआई
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
स्कूल शिक्षा विभाग में ई-अटेंडेंस को लेकर अब व्यवस्था बदलने के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं। ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं होने के कारण शिक्षकों और अतिथि शिक्षकों का वेतन रोकने की शिकायतों के बीच लोक शिक्षण आयुक्त ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं होने के आधार पर किसी कर्मचारी का वेतन नहीं रोका जाएगा। तकनीकी समस्या के कारण ई-अटेंडेंस नहीं लग पाने को सीधे अनुपस्थिति नहीं माना जाएगा। आयुक्त लोक शिक्षण अभिषेक सिंह ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में प्रदेश के जिला शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश दिए हैं। इसके बाद जिलों में डीईओ ने संकुल प्राचार्यों को निर्देश जारी कर व्यवस्था का पालन करने को कहा है। खास बात यह है कि यह राहत नियमित शिक्षकों के साथ अतिथि शिक्षकों को भी दी गई है।
नेटवर्क की गड़बड़ी पर शिक्षक को नहीं मिलेगी सजा
ई-अटेंडेंस व्यवस्था में कई बार शिक्षक स्कूल में मौजूद रहने के बावजूद अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कर पाते। नेटवर्क नहीं आने, एप में तकनीकी खामी, लॉगिन की परेशानी, लोकेशन दर्ज नहीं होने या अन्य तकनीकी कारणों से उपस्थिति छूट जाती है। अब ऐसी स्थिति में केवल ई-अटेंडेंस नहीं लगने को कर्मचारी की गैरहाजिरी का आधार बनाकर वेतन रोकने की कार्रवाई नहीं की जा सकेगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि तकनीकी विफलता और वास्तविक अनुपस्थिति को अलग-अलग देखा जाएगा।
एक-दो दिन की गैरहाजिरी पर पूरे महीने का वेतन नहीं रुकेगा
आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया है कि ई-अटेंडेंस नहीं लगने या एक-दो दिन अनुपस्थित रहने पर शिक्षक या अतिथि शिक्षक का पूरे महीने का वेतन नहीं रोका जाएगा। यदि अनुपस्थिति सामने आती है तो संकुल प्राचार्य संबंधित शिक्षक को स्पीकिंग ऑर्डर जारी कर कारण पूछेंगे। जवाब और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। यानी अब ई-अटेंडेंस में एक-दो दिन की कमी को आधार बनाकर सीधे पूरे महीने के वेतन पर रोक लगाने की कार्रवाई नहीं होगी।
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राहत मिली, लेकिन ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता बरकरार
विभाग ने यह भी साफ किया है कि तकनीकी समस्या के कारण वेतन नहीं रोकने का मतलब ई-अटेंडेंस से छूट नहीं है। शिक्षकों और अतिथि शिक्षकों के लिए ई-अटेंडेंस दर्ज करना अनिवार्य रहेगा। सभी को निर्धारित व्यवस्था के तहत ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करनी होगी। आयुक्त के मुताबिक प्रदेश में फिलहाल करीब 99 प्रतिशत शिक्षक और अतिथि शिक्षक ई-अटेंडेंस लगा रहे हैं। विभाग का कहना है कि व्यवस्था लागू रहेगी, लेकिन तकनीकी खामी के कारण कर्मचारी को अनुपस्थित मानकर वेतन रोकना उचित नहीं होगा।
वेतन रोकने की शिकायतों के बाद आया स्पष्ट आदेश
ई-अटेंडेंस लागू होने के बाद शिक्षकों की ओर से लगातार यह शिकायत की जा रही थी कि स्कूल में मौजूद रहने के बावजूद नेटवर्क या एप की तकनीकी समस्या के कारण उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती। इसके बाद कई जगह वेतन रोकने या अनुपस्थिति मानने की कार्रवाई की जाती थी। शिक्षकों का तर्क था कि जिस तकनीकी व्यवस्था पर उनकी उपस्थिति निर्भर है, उसमें खराबी आने पर उसकी जिम्मेदारी कर्मचारी पर डालकर वेतन रोकना उचित नहीं है। अब आयुक्त के निर्देश के बाद ऐसी शिकायतों पर सीधे वेतन रोकने के बजाय संबंधित कर्मचारी से स्थिति स्पष्ट कराई जाएगी।
अतिथि शिक्षकों के लिए भी अहम फैसला
इस निर्णय का असर अतिथि शिक्षकों पर भी पड़ेगा। अतिथि शिक्षकों को भी तकनीकी कारणों से ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं होने की स्थिति में सीधे वेतन कटौती या पूरे महीने का वेतन रोकने की कार्रवाई से राहत मिलेगी। हालांकि, जहां वास्तविक अनुपस्थिति सामने आती है, वहां विभागीय नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकेगी। इसलिए नई व्यवस्था को ई-अटेंडेंस से छूट के तौर पर नहीं देखा जाएगा।
यह भी पढ़ें-भोपाल: 15 करोड़ की सरकारी जमीन पर चला बुलडोजर, 20 दुकानें और 2 मकान जमींदोज, 10 हजार वर्गफीट जमीन खाली
शिक्षक संगठन ने कहा- तकनीकी गलती की सजा क्यों?
शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने विभाग के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षक निर्धारित समय पर स्कूल में उपस्थित है और केवल नेटवर्क, एप या तकनीकी समस्या के कारण ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं हो पाती तो इसके लिए शिक्षक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने विभाग से मांग की है कि तकनीकी समस्या की स्थिति में वैकल्पिक उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था भी स्पष्ट की जाए। साथ ही आयुक्त के निर्देशों की जानकारी जिला शिक्षा अधिकारियों, विकासखंड शिक्षा अधिकारियों और संस्था प्रमुखों तक अनिवार्य रूप से पहुंचाई जाए, ताकि नीचे के स्तर पर कोई अधिकारी तकनीकी कारण से ई-अटेंडेंस नहीं लग पाने को आधार बनाकर वेतन रोकने की कार्रवाई न करे।
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नेटवर्क की गड़बड़ी पर शिक्षक को नहीं मिलेगी सजा
ई-अटेंडेंस व्यवस्था में कई बार शिक्षक स्कूल में मौजूद रहने के बावजूद अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कर पाते। नेटवर्क नहीं आने, एप में तकनीकी खामी, लॉगिन की परेशानी, लोकेशन दर्ज नहीं होने या अन्य तकनीकी कारणों से उपस्थिति छूट जाती है। अब ऐसी स्थिति में केवल ई-अटेंडेंस नहीं लगने को कर्मचारी की गैरहाजिरी का आधार बनाकर वेतन रोकने की कार्रवाई नहीं की जा सकेगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि तकनीकी विफलता और वास्तविक अनुपस्थिति को अलग-अलग देखा जाएगा।
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एक-दो दिन की गैरहाजिरी पर पूरे महीने का वेतन नहीं रुकेगा
आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया है कि ई-अटेंडेंस नहीं लगने या एक-दो दिन अनुपस्थित रहने पर शिक्षक या अतिथि शिक्षक का पूरे महीने का वेतन नहीं रोका जाएगा। यदि अनुपस्थिति सामने आती है तो संकुल प्राचार्य संबंधित शिक्षक को स्पीकिंग ऑर्डर जारी कर कारण पूछेंगे। जवाब और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। यानी अब ई-अटेंडेंस में एक-दो दिन की कमी को आधार बनाकर सीधे पूरे महीने के वेतन पर रोक लगाने की कार्रवाई नहीं होगी।
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राहत मिली, लेकिन ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता बरकरार
विभाग ने यह भी साफ किया है कि तकनीकी समस्या के कारण वेतन नहीं रोकने का मतलब ई-अटेंडेंस से छूट नहीं है। शिक्षकों और अतिथि शिक्षकों के लिए ई-अटेंडेंस दर्ज करना अनिवार्य रहेगा। सभी को निर्धारित व्यवस्था के तहत ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करनी होगी। आयुक्त के मुताबिक प्रदेश में फिलहाल करीब 99 प्रतिशत शिक्षक और अतिथि शिक्षक ई-अटेंडेंस लगा रहे हैं। विभाग का कहना है कि व्यवस्था लागू रहेगी, लेकिन तकनीकी खामी के कारण कर्मचारी को अनुपस्थित मानकर वेतन रोकना उचित नहीं होगा।
वेतन रोकने की शिकायतों के बाद आया स्पष्ट आदेश
ई-अटेंडेंस लागू होने के बाद शिक्षकों की ओर से लगातार यह शिकायत की जा रही थी कि स्कूल में मौजूद रहने के बावजूद नेटवर्क या एप की तकनीकी समस्या के कारण उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती। इसके बाद कई जगह वेतन रोकने या अनुपस्थिति मानने की कार्रवाई की जाती थी। शिक्षकों का तर्क था कि जिस तकनीकी व्यवस्था पर उनकी उपस्थिति निर्भर है, उसमें खराबी आने पर उसकी जिम्मेदारी कर्मचारी पर डालकर वेतन रोकना उचित नहीं है। अब आयुक्त के निर्देश के बाद ऐसी शिकायतों पर सीधे वेतन रोकने के बजाय संबंधित कर्मचारी से स्थिति स्पष्ट कराई जाएगी।
अतिथि शिक्षकों के लिए भी अहम फैसला
इस निर्णय का असर अतिथि शिक्षकों पर भी पड़ेगा। अतिथि शिक्षकों को भी तकनीकी कारणों से ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं होने की स्थिति में सीधे वेतन कटौती या पूरे महीने का वेतन रोकने की कार्रवाई से राहत मिलेगी। हालांकि, जहां वास्तविक अनुपस्थिति सामने आती है, वहां विभागीय नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकेगी। इसलिए नई व्यवस्था को ई-अटेंडेंस से छूट के तौर पर नहीं देखा जाएगा।
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शिक्षक संगठन ने कहा- तकनीकी गलती की सजा क्यों?
शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने विभाग के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षक निर्धारित समय पर स्कूल में उपस्थित है और केवल नेटवर्क, एप या तकनीकी समस्या के कारण ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं हो पाती तो इसके लिए शिक्षक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने विभाग से मांग की है कि तकनीकी समस्या की स्थिति में वैकल्पिक उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था भी स्पष्ट की जाए। साथ ही आयुक्त के निर्देशों की जानकारी जिला शिक्षा अधिकारियों, विकासखंड शिक्षा अधिकारियों और संस्था प्रमुखों तक अनिवार्य रूप से पहुंचाई जाए, ताकि नीचे के स्तर पर कोई अधिकारी तकनीकी कारण से ई-अटेंडेंस नहीं लग पाने को आधार बनाकर वेतन रोकने की कार्रवाई न करे।
