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जहरीली शराब से मौतों के बाद परिजनों से मिले नेता प्रतिपक्ष: 50-50 हजार मदद का ऐलान, 25 लाख मुआवजे की मांग
Sun, 06 Sep 2026 09:17 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Sun, 06 Sep 2026 09:17 PM IST
सार
सागर के बंडा में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे। उन्होंने मृतकों के परिजनों को 50-50 हजार रुपए की सहायता देने की घोषणा की। सिंघार ने सरकार से प्रत्येक परिवार को 25 लाख रुपए मुआवजा, एक सदस्य को सरकारी नौकरी और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
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अस्पताल में भर्ती मरीजों से मिले नेता प्रतिपक्ष
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सागर के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचे। उन्होंने मृतकों के परिजनों को अपनी ओर से 50-50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। सिंघार ने मुख्यमंत्री से मृतक परिवारों को 25-25 लाख रुपए मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की। उन्होंने अवैध शराब के कारोबार को लेकर सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।
मेडिकल कॉलेज से बंडा तक पहुंचे सिंघार
उमंग सिंघार ने सबसे पहले सागर मेडिकल कॉलेज पहुंचकर जहरीली शराब पीने से बीमार हुए लोगों और उनके परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने मरीजों के स्वास्थ्य की जानकारी ली और चिकित्सकों से उपचार की स्थिति पर चर्चा की। सिंघार ने कहा कि सभी पीड़ितों को बेहतर इलाज मिलना चाहिए और इलाज का पूरा खर्च सरकार को उठाना चाहिए। इसके बाद वे बंडा तहसील के ग्राम बमूरा पहुंचे। यहां जहरीली शराब पीने से पांच लोगों की मौत हुई है। सिंघार ने मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और घटना की जानकारी ली। उन्होंने प्रत्येक मृतक परिवार को 50-50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
बोले- मुख्यमंत्री के पास गृह विभाग, फिर अवैध शराब कैसे चल रही?
सिंघार ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सागर की घटना ने प्रदेश में अवैध शराब के कारोबार की स्थिति सामने ला दी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब गृह विभाग मुख्यमंत्री के पास ही है, तो प्रशासन की नाक के नीचे अवैध शराब का कारोबार कैसे चल रहा है? इस नेटवर्क को आखिर किसका संरक्षण मिला हुआ है? उन्होंने कहा कि घटना की तत्काल उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। जहरीली शराब बनाने और बेचने वालों के साथ ही उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों पर भी कठोर कार्रवाई की जाए।
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यह भी पढ़ें-मध्य प्रदेश: बच्चों की मौत के बीच बालाघाट को मिला नया सीएमएचओ, डॉ. शत्रुघ्न सिंह दाहिया को सौंपी कमान
25 लाख मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से मांग की कि प्रत्येक मृतक परिवार को 25 लाख रुपए का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। उन्होंने उपचाररत सभी मरीजों के इलाज का पूरा खर्च सरकार द्वारा उठाने की मांग भी की। सिंघार ने कहा कि सिर्फ छोटे स्तर पर कार्रवाई करने से समस्या खत्म नहीं होगी। जहरीली शराब के पूरे नेटवर्क की जांच कर उसके पीछे मौजूद लोगों तक पहुंचना होगा, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।
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मेडिकल कॉलेज से बंडा तक पहुंचे सिंघार
उमंग सिंघार ने सबसे पहले सागर मेडिकल कॉलेज पहुंचकर जहरीली शराब पीने से बीमार हुए लोगों और उनके परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने मरीजों के स्वास्थ्य की जानकारी ली और चिकित्सकों से उपचार की स्थिति पर चर्चा की। सिंघार ने कहा कि सभी पीड़ितों को बेहतर इलाज मिलना चाहिए और इलाज का पूरा खर्च सरकार को उठाना चाहिए। इसके बाद वे बंडा तहसील के ग्राम बमूरा पहुंचे। यहां जहरीली शराब पीने से पांच लोगों की मौत हुई है। सिंघार ने मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और घटना की जानकारी ली। उन्होंने प्रत्येक मृतक परिवार को 50-50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
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बोले- मुख्यमंत्री के पास गृह विभाग, फिर अवैध शराब कैसे चल रही?
सिंघार ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सागर की घटना ने प्रदेश में अवैध शराब के कारोबार की स्थिति सामने ला दी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब गृह विभाग मुख्यमंत्री के पास ही है, तो प्रशासन की नाक के नीचे अवैध शराब का कारोबार कैसे चल रहा है? इस नेटवर्क को आखिर किसका संरक्षण मिला हुआ है? उन्होंने कहा कि घटना की तत्काल उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। जहरीली शराब बनाने और बेचने वालों के साथ ही उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों पर भी कठोर कार्रवाई की जाए।
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25 लाख मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से मांग की कि प्रत्येक मृतक परिवार को 25 लाख रुपए का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। उन्होंने उपचाररत सभी मरीजों के इलाज का पूरा खर्च सरकार द्वारा उठाने की मांग भी की। सिंघार ने कहा कि सिर्फ छोटे स्तर पर कार्रवाई करने से समस्या खत्म नहीं होगी। जहरीली शराब के पूरे नेटवर्क की जांच कर उसके पीछे मौजूद लोगों तक पहुंचना होगा, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।
