मियां भोपाली के झोले-बतोले: मध्य प्रदेश में बुलडोजरी चुनाव!
मध्य प्रदेश में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों की गहमागहमी का माहौल है। ऐसे में बुलडोजर का जिक्र करना ही होगा, जो एक बड़ा चुनावी प्रतीक बनकर उभरा है। बुलडोजरी चुनावों पर मियां भोपाली की एक रपट-
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को खां, बुलडोजर आजकल मिट्टी खोदने से ज्यादा दूसरे काम में ज्यादा आ रिया हे। पेले सरकार ओर पुलिस ने गुंडो बदमाशों को काबू करने, गुनाहगारी के लिए उनको सबक सिखाने के वास्ते इसका इस्तेमाल करा, अब मधपिरदेश में पुलिस ने सुकून से चुनाव कराने खातिर इसका कामयाब इस्तेमाल चालू कर दिया हे। मियां, लग तो रिया हे के इन दिनो सूबे में पुलिस वाले सबसे ज्यादे रिसर्च बुलडोजर पे ई कर रिए हें।
यूपी में योगी बाबा की सरकार ने दो साल पेले डाॅन विकास मिश्रा ओर उसके गुंडों के घर में बुलडोजर चलवा दिए थे। उसके बाद लोगों की समझ आई कि बुलडोजर से खाली मिट्टी नई खोदी जाती, गढ्डे नई करे जाते, बदले भी चुकाए जा जाते हें। सो साल पेले भारी भरकम लोहे के गब्बर पंजे वाली बुलडोजर मशीन बनाने वाले ने भी इत्ती दूर की नई सोची होगी कि मुलक हिंदुस्तान में कभी इसका यूं भी इस्तेमाल होगा। एक जमाने में हाथी के पेर तले कुचलना भोत बड़ी सजा हुआ करती थी। अब तो एक बुलडोजर ई बंदों की हवा निकाल देता हे। मियां, कुल मिलाके इस वक्त देश में बुलडोजरी इंसाफ का बोलबाला हे। ऐसा इंसाफ, जिसका कानून की किताबो में कोई जिकर नई हेगा। उधर अदालतें कानून के हिसाब से गुनहगार को जो ओर जेसी सजा दें, इधर बुलडोजर लगे हाथ अगले को जमीन सुंघा देता हे। आखिर गुनहगार, गुंडों ओर बदमाशों का भी कोई न कोई तो घर होता ई हेगा। वो जेल जाए, उसके पेले बुलडोजर उसके पूरे खानदान के काम लगा देता हे। गुनहगार को कानूनन सजा तो होगी तब होगी मगर उसके पेले मुलजिम की गिरस्थी ठिकाने लग जाती हे। परिवार सड़क पे आ जाता हेगा। पुलिस मानती हे के ये दहशत कानूनी सजा से ज्यादा असरदार हे।
खां, एमपी के चंबल संभाग में बीहड़ वाले इलाके में लोगों की तासीर में चंबल का पानी बोलता हे। जर जरासी बात में बंदूक चल जाना, खून खच्चर हो जाना मामूली बात हे। मगर इस दफे पंचायत ओर शहर सरकार के चुनावों में मुरैना पुलिस ने अनोखा ओर कारगर इंतजाम करा। पुलिस ने लोगों से लायसेंसी हथियार तो रखवा ई लिए, साथ में थानों में एक दर्जन से ज्यादा बुलडोजर खड़े करा दिए। कहीं से खबर आई के कोई ने दंगा करा हे तो तुरंत बुलडोजर मुलजिमों के घरों को ढहाने वास्ते तैयार।
बुलडोजर की दहशत का असर ये रिया कि कहीं कोई गुंडागरदी, मार पीट वगेरे की शिकायत नई आई। बता दें कि मुरैना में पंचायत चुनाव के पहले चरण के मतदान में छह जगह उपदरव हुआ था। इसमें तहसीलदार समेत 6 लोग घायल हो गए थे। इसके बाद जिला पिरशासन ने दूसरे दिन गूंजबधा गांव में तीन आरोपियों के मकान बुलडोजर से तोड़ दिए।याद करें कि किसी जमाने में पुलिस हथियारों अोर लाव लश्कर के साथ दंगे कंट्रोल करने की तैयारी करा करती थी। अब बुलडोजर थानों में तेनात कर देती हे।
मियां, अचरज नहीं कि आने वाले वक्त में हर पुलिस थाने में बुलडोजर स्क्वाड भी नजर आने लगे। अभी तो ये बुलडोजर ज्यादातर पीडब्लूडी, इरीगेशन, नगर निगम ओर बड़े ठेकेदारों के पास ज्यादा रेते हें। कल को थाने में एक चार की गार्ड के साथ-साथ दो बुलडोजर भी हाजिरी देते नजर आ जाए खां, हेरान मत होना। यकीन मानिए कि अगर मुरेना पुलिस का पिरयोग सफल रिया तो चुनाव आयोग आगे से डिपारमेंटों से सरकारी स्टाफ के संग बुलडोजरों की मांग भी करेगा ताकि चुनाव शांति से कराए जा सकें।
- बतोलेबाज
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