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मियां भोपाली के झोले-बतोले: बीजेपी पार्ल्यामेंटरी बोर्ड में अंदर बाहर के मायने...
सार
भाजपा ने संसदीय बोर्ड में फेरबदल किए हैं। शिवराज सिंह चौहान को आठ साल बाद बोर्ड से बाहर कर दिया गया। बस फिर क्या था, भोपाल के पटियेबाज भी सक्रिय हो गए। मामा के साथ यह हुआ, मामा के साथ वह हुआ... मामा टिकेंगे या जाएंगे, इस पर बतोलेबाजी शुरू हो गई है।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
को खां, आजकल एमपी में सियासी हल्कों और आम पब्लिक में भी एकई चर्चा हे बीजेपी पार्ल्यामेंटरी बोर्ड में फेरबदल की। यूं ज्यादा कोई को बोर्ड के बारे में खास जानकारी नई हे मगर इत्ता जरूर पता हेगा के अपने मामा बोर्ड से बाहर हो गए हें ओर खुद को आउट डेटेड मान बेठे सत्तनारायण जटिया अंदर हो गए हें। राजनीतिबाज इस बदलाव के खूब मजे ले रिए हें तो बीजेपी वाले सफाई दे- दे के परेशान हें के मियां, ये सब तो चलता रेता हे। असल चीज कुर्सी हेगी, वो सलामत तो पगड़ी हजार।
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मियां, जबसे बीजेपी में मोदी का जमाना चला हे तब से अच्छों-अच्छों को जोर का झटका धीरे से तो कभी जोर से भी देने का चलन बढ़ गया हे। इस दफे वो झटका पांव-पांव वाले भइया शिवराजजी को ओर जब तब अपने दिल का दर्द बयां करने वाले बीजेपी के बड़े नेता नितिन गडकरी को लगा हेगा। दोनो बरसों से पार्ल्यामेंटरी बोर्ड में थे। हाल में उन्होंने पब्लिक में बोला था कि खां, अब सियासत से दिल ऊब गया हे। लोगों ने माना के अब घर जाने की तैयारी हे। मगर दिल्ली में उनका दर्द आला नेताओं ने भोत गोर से सुना ओर गडकरी साहब के मन की कर दी। अब डर ये हेगा के कहीं अगली कड़ी में साहब की केबिनेट से भी छुट्टी न हो जाए। अगर ऐसा हुआ तो उन लोगों के लिए बुरा होगा, जो बतोलेबाजी के जमाने में भी परफार्म करने में यकीन रखते हें।
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खां, यूं सियासत में ऊंच नीच चलती रेती हे। कभी गाड़ी नाव पे तो कभी नाव गाड़ी पे। कभी कोई अर्श तो कभी कोई फर्श पे। अल्ला मेहरबान तो हर कोई पेलवान...कब किस की उड़ के लगे ये सिरफ खुदा जानता हे। एमपी के सीएम शिवराज 9 साल से पार्ल्यामेंट बोर्ड में थे। पार्टी के फेसलों में अहम रोल निभा रिए थे ओर पिरदेश की कमान भी थामे हुए थे। न जाने क्यों मोदीजी को लगा के मामाजी मधपिरदेश में ई ठीक हें। एक लिहाज से ये सई भी हेगा कि एमपी में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हें ओर उसके अगले साल लोकसभा के। सो सारा ध्यान पार्टी को चुनाव जिताने में लगना चाहिए। इसके लिए शिवराज से बेहतर कोई चेहरा बीजेपी के पास नई हेगा। मगर नाशुक्रे लोग दूसरा मतलब निकाल रिए हें। कांग्रेसी बोर्ड में फेरबदल को हैसियत की जोड़ बाकी के आईने में देख रिए हें।
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मगर मियां, शिवराजजी के हटने से भी ज्यादा बड़ा झटका जटिया को बोर्ड में जगा देने से लगा हे। जटियाजी 76 बरस के हें ओर शायद बोर्ड में सबसे बुजुर्ग मेम्बर हेंगे। वो अटलजी के जमाने के नेता हें। बरसों एमपी रिए फिर मंतरी भी बने। 2014 के बाद से वो राज्यसभा में रहे। दो साल से तो वो भी भगवत भजन में मन रमाने लगे थे। अचानक पार्टी को उनकी याद आ गई। जटियाजी दलित हेंगे। सो पार्टी को लगा कि पार्ल्यामेंटरी बोर्ड में उम्दा चलेंगे। उनके पास टाइम भी खूब हेगा। जटियाजी से ताजा फेरबदल के बारे में कोई ने पूछा तो वो बोले के बोर्ड में अंदर बाहर करने जेसा कोई मामला नई हे। सब बेलेंस बनाने की रणनीति हेगी। बीजेपी में हर वर्कर की पूछ होती हे। उधर पार्टी की ओर बताया गया कि बोर्ड में एक दलित की जगा दूसरे को लिया गया हे। यानी थावरचंद की जगा सत्यनारायण। दूसरी तरफ परदेस से लोटे बीजेपी के महासचिव केलाश विजयवर्गीय बोले के कांग्रेस नेता कमलनाथ जी रिटायर हो जाना चाहिए, वो अब 75 के हो गए हें। यानी के भाजपा के 76 कांग्रेस के 75 पे भारी हेंगे। केलाशजी ने एक खुलासा ओर करा के पश्चिम बंगाल का चार्ज उनके पास बरकरार हे। न जाने कोन ने उड़ा दी के भिया से चार्ज ले लिया गया हे।
मियां, सियासत इशारों ओर मायनो का खेल हे। आधा गिलास खाली ओर आधा गिलास भरे का खेल भी हे। हैसियतों में कमी- बेशी होती रेती हे। असल चीज हे कुर्सी। वो मिले तो सब जायज ओर वो न मिले तो सब नाजायज। सारी कवायद चुनाव जीतने को लेके हे। अब इसमें कोई निपट जाए तो वो उसकी किस्मत हे। आने वाले वक्त में चुनाव नतीजे ते करेंगे कि बीजेपी में इस तरह नेताओं को निपटाना सही फेसला था के खुद के पेरों पे कुल्हाड़ी मारना था।
- बतोलेबाज
