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72 घंटे की हड़ताल से चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था: हमीदिया में 50 से ज्यादा ऑपरेशन टले, MBBS इंटर्न की मांग पूरी

Wed, 09 Sep 2026 04:47 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Wed, 09 Sep 2026 04:47 PM IST
सार

तीन दिन के आंदोलन के बाद सरकार ने इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड 50 प्रतिशत बढ़ाकर 21,500 करने पर सहमति दे दी। लाठीचार्ज और वॉटर कैनन मामले में दो पुलिसकर्मी लाइन अटैच किए गए हैं। इसके बाद डॉक्टरों ने आंदोलन खत्म कर दिया।

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Healthcare system crippled by 72-hour strike: Over 50 surgeries postponed at Hamidia; MBBS interns' demands me
डिप्टी सीएम के साथ चिकित्सकों की बैठक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इंटर्न डॉक्टरों की 72 घंटे चली हड़ताल का असर प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर साफ दिखाई दिया। भोपाल के हमीदिया अस्पताल में 50 से ज्यादा ऑपरेशन टालने पड़े, जबकि ओपीडी सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित रहीं। अस्पतालों में मरीज इलाज के लिए भटकते रहे और डॉक्टरों के आंदोलन के कारण नियमित स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ गया। लगातार तीन दिन चले आंदोलन के बाद आखिरकार सरकार को इंटर्न डॉक्टरों की प्रमुख मांग माननी पड़ी। उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बुधवार को घोषणा की कि इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड 50 प्रतिशत बढ़ाकर 21,500 प्रतिमाह किया जाएगा। इसके साथ ही आंदोलन समाप्त हो गया।
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हमीदिया में ऑपरेशन पर पड़ा सबसे बड़ा असर
हड़ताल के दौरान हमीदिया अस्पताल की नियमित चिकित्सा व्यवस्था सबसे ज्यादा प्रभावित हुई। सामान्य दिनों में बड़ी संख्या में होने वाले नियमित ऑपरेशन टालने पड़े। बुधवार को भी करीब 40 नियमित ऑपरेशन नहीं हो सके, जबकि पिछले दिनों के मिलाकर टाले गए ऑपरेशन की संख्या 50 से ज्यादा बताई गई। हालांकि आपातकालीन ऑपरेशन और जरूरी सेवाएं जारी रहीं। अस्पताल प्रबंधन ने गंभीर मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर उपचार उपलब्ध कराया।
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सामान्य दिनों के 3 हजार मरीजों की जगह पहुंचे करीब 500
हमीदिया की ओपीडी भी आंदोलन की चपेट में रही। बुधवार को ओपीडी सीमित समय के लिए खोली गई। करीब दो घंटे में लगभग 500 मरीज पहुंचे, जबकि सामान्य दिनों में यहां करीब 3 हजार मरीज इलाज के लिए आते हैं। कई मरीजों को डॉक्टर नहीं मिले और उन्हें बिना इलाज लौटना पड़ा। दूर-दराज के जिलों से आए मरीजों की परेशानी और बढ़ गई। कुछ मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ा।
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तीन दिन तक सड़क पर डटे रहे डॉक्टर
स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर इंटर्न डॉक्टर तीन दिन से कमला पार्क क्षेत्र में धरने पर बैठे थे। सड़क पर प्रदर्शन के कारण यातायात भी प्रभावित हुआ। डॉक्टरों के आंदोलन को जूनियर डॉक्टरों और वरिष्ठ रेजिडेंट्स का भी समर्थन मिला।

पुलिस कार्रवाई के बाद आंदोलन हुआ था और तेज
सोमवार को मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ रहे डॉक्टरों को रोकने के दौरान पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया था। डॉक्टरों ने लाठीचार्ज का भी आरोप लगाया। इसके बाद आंदोलन और उग्र हो गया। सरकार ने अब इस मामले में भी कार्रवाई की है। स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि प्रारंभिक तौर पर दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किया गया है। पूरे मामले की जांच के लिए टीम गठित की गई है। घायल डॉक्टरों के उपचार की व्यवस्था के निर्देश भी दिए गए हैं।



यह भी पढ़ें-भोपाल: मांगों को लेकर गुस्से में इंटर्न डॉक्टर क्या बोले, ओपीडी हो गई ठप; टले ऑपरेशन; देखें वीडियो


करीब दो महीने से उठ रही थी स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग
इंटर्न डॉक्टर लंबे समय से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे थे। डॉक्टरों का कहना था कि मौजूदा स्टाइपेंड उनकी जिम्मेदारियों और दूसरे राज्यों में मिल रही राशि की तुलना में कम है। इसी मांग को लेकर आंदोलन शुरू हुआ, जो सोमवार को पुलिस कार्रवाई के बाद और तेज हो गया था।


 
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