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अतिथि विद्वानों ने सरकार को दी मोहलत: फॉलन आउट रोकने की मांग, 3 अक्टूबर के बाद चुनाव लड़ने का कर सकते हैं ऐलान

Mon, 21 Sep 2026 03:54 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Mon, 21 Sep 2026 03:54 PM IST
सार

अतिथि विद्वानों ने नियमितीकरण और नौकरी में स्थायित्व की मांग को लेकर आंदोलन 3 अक्टूबर तक स्थगित किया है। सरकार को फॉलन आउट रोकने और स्थायी नीति पर फैसला लेने का समय दिया गया है। मांगें पूरी नहीं होने पर 4 अक्टूबर से आंदोलन तेज करने और विद्वान जनता पार्टी के जरिए चुनाव लड़ने के विकल्प पर फैसला लेने की चेतावनी दी गई है।

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Guest scholars give government a deadline: Demand to halt 'falling out' (discontinuation of services); may ann
उच्च शिक्षा आयुक्त प्रबल सिपाहा अतिथि विद्वानों से चर्चा करने पहुंचे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नियमितीकरण और नौकरी में स्थायित्व की मांग को लेकर नीलम पार्क में चल रहा अतिथि विद्वानों का आंदोलन फिलहाल थम गया है। आंदोलनकारियों ने इसे खत्म करने के बजाय 3 अक्टूबर तक स्थगित करने का फैसला लिया है। उनका कहना है कि सरकार को मांगों पर ठोस निर्णय लेने का समय दिया गया है। अतिथि विद्वानों ने साफ किया है कि 3 अक्टूबर तक फॉलन आउट रोकने और स्थायित्व की नीति पर फैसला नहीं हुआ तो 4 अक्टूबर से आंदोलन का अगला चरण शुरू होगा। इसके साथ ही उन्होंने राजनीतिक मोर्चे पर भी आगे बढ़ने के संकेत दिए हैं। संगठन का कहना है कि जरूरत पड़ी तो विद्वान जनता पार्टी के गठन और चुनाव लड़ने को लेकर फैसला लिया जाएगा।
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मंत्री के प्रतिनिधि के तौर पर पहुंचे उच्च शिक्षा आयुक्त
आंदोलन के दौरान उच्च शिक्षा आयुक्त प्रबल सिपाहा अतिथि विद्वानों से चर्चा करने नीलम पार्क पहुंचे। डॉ. राकेश कुमार सिंह के मुताबिक, वे उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के प्रतिनिधि के तौर पर पहुंचे थे।प्रतिनिधिमंडल ने मांग रखी कि जब तक अतिथि विद्वानों के लिए स्थायित्व की नीति तैयार नहीं होती, तब तक फॉलन आउट की प्रक्रिया रोकी जाए। आयुक्त ने इसे नीतिगत विषय बताते हुए मंत्री से चर्चा कर समाधान निकालने का भरोसा दिया। इसी आश्वासन के बाद आंदोलन को 3 अक्टूबर तक स्थगित करने का निर्णय लिया गया।
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अब 4 अक्टूबर को अगला फैसला
अतिथि विद्वानों के मुताबिक 15 सितंबर को सांकेतिक तौर पर ‘विद्वान जनता पार्टी’ के गठन की घोषणा की जा चुकी है। डॉ. राकेश कुमार सिंह ने कहा कि यदि 3 अक्टूबर तक फॉलन आउट पर रोक और स्थायित्व की नीति को लेकर निर्णय नहीं हुआ तो 4 अक्टूबर से आंदोलन का अगला चरण शुरू होगा। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही मंत्री इंदर सिंह परमार के सुझाव के आधार पर पार्टी बनाकर चुनाव लड़ने के विकल्प पर भी निर्णय लिया जा सकता है।
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10 साल से सेवा, फिर भी नौकरी का भरोसा नहीं
अतिथि विद्वानों ने बताया कि वह करीब 10 साल से अतिथि विद्वान के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। उनका कहना है कि कॉलेज में नियमित प्राध्यापक की नियुक्ति या तबादला होते ही फॉलन आउट की स्थिति बन जाती है और वर्षों से काम कर रहे अतिथि विद्वानों के सामने नौकरी का संकट खड़ा हो जाता है। उनके मुताबिक कई अतिथि विद्वान 55 से 60 वर्ष की उम्र तक पहुंच चुके हैं। ऐसे में बार-बार परीक्षा और साक्षात्कार की प्रक्रिया के बजाय स्थायित्व के लिए स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए।

पुराने आश्वासनों का भी हवाला
अतिथि विद्वान 16 सितंबर की उस घटना का भी जिक्र कर रहे हैं, जब करीब 200 प्रदर्शनकारियों ने भोपाल में पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का काफिला रोककर अपनी मांगें रखी थीं। प्रदर्शनकारियों ने 11 सितंबर 2023 की महापंचायत में मिले आश्वासनों का हवाला दिया। उनके मुताबिक शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि एक मुख्यमंत्री की घोषणा को दूसरे मुख्यमंत्री को पूरा करना चाहिए और उन्होंने मांगों को सरकार के सामने रखने का भरोसा दिया था।

जुलाई के सम्मेलन की घोषणा भी बनी आधार
अतिथि विद्वान 10 जुलाई को भोपाल के रवींद्र भवन में हुए सम्मेलन का भी हवाला दे रहे हैं। इसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल हुए थे। आंदोलनकारियों के मुताबिक सम्मेलन में दूसरे राज्यों की व्यवस्था का अध्ययन कर मध्यप्रदेश के लिए स्थायी नीति तैयार करने की बात कही गई थी। फिलहाल अतिथि विद्वानों की सबसे बड़ी आपत्ति फॉलन आउट व्यवस्था को लेकर है। उनका कहना है कि नियमित प्राध्यापक की नियुक्ति या तबादले के बाद पहले से काम कर रहे अतिथि विद्वान को बाहर होना पड़ता है।


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सरकार के सामने अब 3 अक्टूबर की डेडलाइन
आंदोलन स्थगित होने के बाद अब सरकार के सामने अतिथि विद्वानों ने 3 अक्टूबर तक की समय-सीमा रखी है। इस दौरान फॉलन आउट रोकने और स्थायित्व की नीति पर ठोस फैसला नहीं हुआ तो 4 अक्टूबर से आंदोलन फिर शुरू करने की चेतावनी दी गई है। यानी फिलहाल आंदोलन रुका है, मुद्दा नहीं। अब अगली तस्वीर 3 अक्टूबर के बाद साफ होगी कि सरकार के फैसले से आंदोलन आगे बढ़ेगा या अतिथि विद्वान अपने आंदोलन को राजनीतिक विकल्प की ओर ले जाएंगे।


 
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