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हिंदी में इंजीनियरिंगः बच्चों को MNC के मौके छूटने का डर, शिक्षकों ने पढ़ाने के तरीकों में किया इनोवेशन

Wed, 26 Apr 2023 01:17 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Wed, 26 Apr 2023 01:17 PM IST
सार

मध्यप्रदेश में हिंदी में इंजीनियिरंग पढ़ाना शुरू हो गया है। पहले साल उम्मीद के अनुरूप एडमिशन नहीं हुए। कहीं न कहीं छात्रों को लग रहा है कि हिंदी माध्यम से पढ़ेंगे तो एमएनसी में नौकरी के मौके कम हो जाएंगे। इन संशयों को दूर करने के लिए शिक्षकों ने भी पढ़ाने के तरीकों में इनोवेशन किया है। 

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Engineering in Hindi: Children fear of missing out on MNC opportunities, teachers innovate in teaching methods
हिंदी में इंजीनियरिंग- ग्राफिक्स - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश में हिंदी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू तो हो गई, लेकिन पहले साल छात्र-छात्राओं का रिस्पॉन्स उम्मीद से कम था। पढ़ने और समझने में भी कुछ हद तक दिक्कतें आई और सरकारी स्तर पर भी गंभीरता कम ही नजर आई। इस पृष्ठभूमि में हिंदी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए प्रयास तेज हो गए हैं। कॉलेजों में शिक्षक भी पढ़ाने के तौर-तरीकों में इनोवेशन कर रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि इससे हिंदी में इंजीनियरिंग के प्रति रुचि बढ़ेगी।  
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राज्य सरकार ने 2022-23 में हिंदी में पढ़ाई पॉलिटेक्निक के अलावा पांच इंजीनियरिंग कॉलेजों को दिए थे। इनमें यूआईटी-आरजीपीवी भोपाल और आरजीपीवी के ही एसआईटी-शिवपुरी भी शामिल थे। इसके बाद भी इन दोनों कॉलेजों में हिंदी माध्यम का एक भी छात्र नहीं मिला। तकनीकी शिक्षा विभाग ने ऑनलाइन काउंसलिंग में छात्रों को हिंदी का ऑप्शन ही नहीं दिया। यहां पांच ब्रांच सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेली-कम्युनिकेशन और कम्प्यूटर साइंस में हिंदी की पढ़ाई शुरू करने को कहा गया था। जबलपुर के इंजीनियरिंग कॉलेज में भी कोई एडमिशन नहीं हुए। इंदौर के तीन कॉलेजों में ही बायोमेडिकल और कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई हिंदी में शुरू की जा सकी। 150 सीटों में से सिर्फ 19 सीटों पर ही छात्र मिले। इनमें भी कुछ छात्रों ने किताबों की कमी और अन्य परेशानियों की वजह से अंग्रेजी में पढ़ाई का आवेदन दिया और हिंदी से दूरी बना ली। 
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एमएनसी में जॉब की चिंता
इंजीनियरिंग के बाद ज्यादातर काम मल्टीनेशनल कंपनियों में ही हैं। ऐसे में हिंदी माध्यम के छात्रों को यह डर है कि हिंदी में पढ़ाई की तो उनके मौके कम हो जाएंगे। फिर समझने की दिक्कत तो है ही। ग्वालियर के माधव इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (एमआईटीएस) के प्रोफेसर एके सक्सेना ने कहा कि हिंदी में डिग्री लेने वालों को लगता है कि इससे उनके एमएनसी में सिलेक्शन का स्कोप कम हो जाएगा। इंटरव्यू भी अंग्रेजी में ही होते हैं।
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इंदौर में पढ़ाई में इनोवेशन
प्रोफेसर सक्सेना का कहना है कि हिंदी में पढ़ाई अच्छी बात है लेकिन तकनीकी शब्द अंग्रेजी में ही होने चाहिए। सरकार को अपनी भर्ती में हिंदी माध्यम से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वालों को प्राथमिकता देनी चाहिए। इससे छात्रों की नौकरी न मिलने की शंका भी दूर होगी। इसी को ध्यान में रखकर इंदौर में इनोवेशन किया गया। एक्रोपोलिस इंस्टिट्यूट के फर्स्ट ईयर के प्रोफेसर डॉ. प्रशांत गीते ने कहा कि हम तकनीकी शब्दों का इस्तेमाल अंग्रेजी में ही कर रहे हैं। टेक्नोलॉजी में हिंदी-अंग्रेजी का ब्रिज बनाकर काम कर रहे हैं। किताबों के साथ फैकल्टी नोट्स दे रही है। जिससे भाषाई दिक्कतों को दूर कर पा रहे हैं। जहां तक मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी का सवाल है तो उसमें हिंदी में पढ़ाई बाधा नहीं बनेगी। जॉब के लिए सिर्फ स्किल चाहिए। भाषा सिर्फ बातचीत के लिए चाहिए। हम सॉफ्ट स्किल्स के तौर पर छात्र-छात्राओं को अंग्रेजी में बात करना भी सीखा रहे हैं। 
 
सरकारी स्तर पर लापरवाही भी हुई
शिवपुरी में आरजीपीवी से संबद्ध एसआईटी के डायरेक्टर डॉ. राकेश सिंघई का कहना है कि हमने कॉलेज में छात्रों से ऑप्शन पूछा था। दस छात्र हिंदी में पढ़ने को तैयार थे। इसके बाद हमें हिंदी में पढ़ाई को लेकर कोई पॉलिसी ही नहीं मिली। इनकी पढ़ाई अलग से करानी है। शिक्षक की नियुक्ति अलग से करनी है। बाद में हिंदी में पढ़ने की इच्छा जताने वाले बच्चों ने भी कहा कि हमें अंग्रेजी में ही पढ़ना है। 
 
यह रहा एडमिशन का हाल
1. इंदौर के श्री गोविंदराम सेकसरिया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (जीएसआईटीएस) में बायोमेडिकल की 30 सीटें थी। सिर्फ एक छात्र हिंदी में पढ़ने आगे आया। कुछ ही दिन बाद उसने भी अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करने का आवेदन दिया। कारण बताया कि तकनीकी भाषा को हिंदी में लिखने से भाषा और कठिन हो गई है।
2. इंदौर के एक्रोपॉलिस इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च में 60 सीटें थी। इनमें भी 16 छात्रों ने ही एडमिशन लिया। यह 16 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं लेकिन इन्हें अंग्रेजी नोट्स भी दिए जा रहे हैं।

3. आईपीएस एकेडमी इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड साइंस में भी 60 सीटें थी। इनमें दो छात्रों ने एडमिशन लिया। यहां भी हिंदी-अंग्रेजी मिश्रित पढ़ाई कराई जा रही है।

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