{"_id":"68e4df7b215c51010e074fee","slug":"cough-syrup-congress-reached-delhi-in-the-cough-syrup-case-the-leader-of-the-opposition-demanded-a-judicial-2025-10-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Cough Syrup: कफ सिरप मामले में कांग्रेस पहुंची दिल्ली, सिंघार ने की न्यायिक जांच और मुआवजा बढ़ाने की मांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Cough Syrup: कफ सिरप मामले में कांग्रेस पहुंची दिल्ली, सिंघार ने की न्यायिक जांच और मुआवजा बढ़ाने की मांग
Tue, 07 Oct 2025 03:12 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Tue, 07 Oct 2025 03:12 PM IST
सार
कफ सिरप से बच्चों की मौत के मामले में कांग्रेस ने सोमवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सवाल किया कि, जब छोटे मामलों में सरकार बुलडोजर चला देती है, तो क्या इस मामले में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के घर भी बुलडोजर चलेगा?
विज्ञापन
दिल्ली में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की प्रेसवार्ता
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छिंदवाड़ा जहरीले कफ सिरप से बच्चों की मौत के मामले में कांग्रेस ने सोमवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। कांग्रेस ने इसे करप्शन और कमीशन का मामला बताते हुए न्यायिक जांच, विस्तृत मेडिकल स्कैनिंग, मृतक परिवारों को सरकारी नौकरी और इलाज में हुआ पूरा खर्च लौटाने की मांग की। दिल्ली में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता में मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, राजस्थान के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और परासिया विधायक सोहन बाल्मीकि मौजूद रहे। सिंघार ने सवाल किया कि, जब छोटे मामलों में सरकार बुलडोजर चला देती है, तो क्या इस मामले में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के घर भी बुलडोजर चलेगा?
सरकार पर लापरवाही और देरी के आरोप
उमंग सिंघार ने कहा कि 24 अगस्त से 6 अक्टूबर के बीच परासिया और बैतूल में 15 से अधिक बच्चों की मौत हुई, लेकिन सरकार की ओर से समय पर न तो मेडिकल जांच कराई गई, न ही पीड़ित परिवारों को कोई सुरक्षा या सहायता मिली। उन्होंने कहा, "यह सरकार की लापरवाही नहीं, बल्कि आपराधिक उदासीनता है।"
विज्ञापन
यह भी पढ़ें-सिरप से बच्चों की मौत मामले में सीबीआई जांच की मांग, सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर
विधायक ने पहले ही लिखा था सीएम को पत्र
सिंघार अनुसार, विधायक सोहन बाल्मीकि ने पहले ही बच्चे की मौत के बाद मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और जिला प्रशासन को पत्र लिखे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उमंग सिंघार ने कहा कि जब बच्चों की मौत हो रही थी, तब मुख्यमंत्री काजीरंगा नेशनल पार्क में थे। उन्होंने कहा, 72 घंटे के भीतर टेस्ट कराना अनिवार्य होता है, लेकिन सरकार ने एक महीने तक इंतजार किया। सिंघार ने डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "जब तक मामला राष्ट्रीय सुर्खियों में नहीं आया, तब तक वे कहते रहे कि कफ सिरप से कोई मौत नहीं हुई। क्या कारण था कि वे तमिलनाडु की कंपनी को क्लीन चिट दे रहे थे?
यह भी पढ़ें-कफ सिरप कांड पर कांग्रेस का हमला तेज, 9 अक्टूबर को प्रदेशभर में कैंडल मार्च और करेगी प्रदर्शन
फॉरेंसिक और लैब रिपोर्ट्स पर विरोधाभास
प्रेस वार्ता में यह भी बताया गया कि तमिलनाडु की सरकारी लैब ने कफ सिरप में 48.6% Diethylene Glycol (एक जहरीला औद्योगिक रसायन) की पुष्टि की थी। वहीं दूसरी ओर ICMR और राज्य सरकार द्वारा कराई गई जांच में 9 सैंपलों को सुरक्षित बताया गया है और बाकी की रिपोर्ट अब तक लंबित है। कांग्रेस नेताओं ने राज्य सरकार द्वारा घोषित 4 लाख मुआवज़े को नाकाफी बताया। सिंघार ने कहा, "क्या एक मां की गोद उजड़ने की कीमत सिर्फ चार लाख रुपये है? कई परिवारों ने बच्चों का इलाज कराने के लिए जमीन, जेवर और मकान तक गिरवी रख दिए। राजस्थान के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने प्रेस वार्ता में कहा कि बच्चों की मौत का मामला केवल मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चिंता का विषय है। उन्होंने राज्य सरकार से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की।
विज्ञापन
सरकार पर लापरवाही और देरी के आरोप
उमंग सिंघार ने कहा कि 24 अगस्त से 6 अक्टूबर के बीच परासिया और बैतूल में 15 से अधिक बच्चों की मौत हुई, लेकिन सरकार की ओर से समय पर न तो मेडिकल जांच कराई गई, न ही पीड़ित परिवारों को कोई सुरक्षा या सहायता मिली। उन्होंने कहा, "यह सरकार की लापरवाही नहीं, बल्कि आपराधिक उदासीनता है।"
विज्ञापन
विज्ञापन
यह भी पढ़ें-सिरप से बच्चों की मौत मामले में सीबीआई जांच की मांग, सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर
विधायक ने पहले ही लिखा था सीएम को पत्र
सिंघार अनुसार, विधायक सोहन बाल्मीकि ने पहले ही बच्चे की मौत के बाद मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और जिला प्रशासन को पत्र लिखे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उमंग सिंघार ने कहा कि जब बच्चों की मौत हो रही थी, तब मुख्यमंत्री काजीरंगा नेशनल पार्क में थे। उन्होंने कहा, 72 घंटे के भीतर टेस्ट कराना अनिवार्य होता है, लेकिन सरकार ने एक महीने तक इंतजार किया। सिंघार ने डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "जब तक मामला राष्ट्रीय सुर्खियों में नहीं आया, तब तक वे कहते रहे कि कफ सिरप से कोई मौत नहीं हुई। क्या कारण था कि वे तमिलनाडु की कंपनी को क्लीन चिट दे रहे थे?
यह भी पढ़ें-कफ सिरप कांड पर कांग्रेस का हमला तेज, 9 अक्टूबर को प्रदेशभर में कैंडल मार्च और करेगी प्रदर्शन
फॉरेंसिक और लैब रिपोर्ट्स पर विरोधाभास
प्रेस वार्ता में यह भी बताया गया कि तमिलनाडु की सरकारी लैब ने कफ सिरप में 48.6% Diethylene Glycol (एक जहरीला औद्योगिक रसायन) की पुष्टि की थी। वहीं दूसरी ओर ICMR और राज्य सरकार द्वारा कराई गई जांच में 9 सैंपलों को सुरक्षित बताया गया है और बाकी की रिपोर्ट अब तक लंबित है। कांग्रेस नेताओं ने राज्य सरकार द्वारा घोषित 4 लाख मुआवज़े को नाकाफी बताया। सिंघार ने कहा, "क्या एक मां की गोद उजड़ने की कीमत सिर्फ चार लाख रुपये है? कई परिवारों ने बच्चों का इलाज कराने के लिए जमीन, जेवर और मकान तक गिरवी रख दिए। राजस्थान के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने प्रेस वार्ता में कहा कि बच्चों की मौत का मामला केवल मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चिंता का विषय है। उन्होंने राज्य सरकार से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की।
