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भोपाल: बच्चे में ये बदलाव न करें नजरअंदाज,कैंसर का हो सकता है संकेत,एम्स ने बताया-80-90% बच्चे हो सकते हैं ठीक
Sat, 12 Sep 2026 06:30 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Sat, 12 Sep 2026 06:30 PM IST
सार
बच्चों में कैंसर का समय पर पता चल जाए और उचित इलाज मिले तो 80-90 प्रतिशत तक बच्चों के पूरी तरह ठीक होने की संभावना रहती है। एम्स ने अभिभावकों से शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज न करने और इलाज बीच में न छोड़ने की अपील की।
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एम्स भोपाल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बच्चे के शरीर में होने वाले हर बदलाव को सामान्य मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। लंबे समय तक रहने वाली असामान्य समस्या, बिना वजह कमजोरी या बीमारी के दूसरे संकेत दिखें तो समय पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। एम्स भोपाल के चिकित्सकों ने बाल कैंसर जागरूकता सत्र में अभिभावकों को यही संदेश दिया। विशेषज्ञों के मुताबिक, समय पर कैंसर की पहचान और उचित उपचार मिले तो करीब 80 से 90 प्रतिशत बच्चों को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
अभिभावक इन संकेतों को हल्के में न लें
डॉक्टरों ने बच्चों में कैंसर की शुरुआती पहचान और समय पर विशेषज्ञ से संपर्क करने की जरूरत समझाई। खासतौर पर ऐसी स्वास्थ्य समस्या जो लगातार बनी रहे या सामान्य इलाज के बाद भी ठीक न हो, उसकी जांच कराना जरूरी है। चिकित्सकों ने कहा कि कैंसर की आशंका होने पर घबराने के बजाय बच्चे की जांच और विशेषज्ञ की सलाह पर ध्यान देना चाहिए। जल्दी बीमारी पकड़ में आने से इलाज के बेहतर परिणाम की संभावना बढ़ती है।
इलाज शुरू किया है तो बीच में न छोड़ें
एक अभिभावक ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि बच्चे के हड्डी के कैंसर का इलाज चार चक्र तक कराने के बाद उन्होंने उपचार बीच में रोक दिया और धार्मिक उपचार का सहारा लिया। इसके बाद बीमारी बढ़ गई। उन्होंने दूसरे अभिभावकों से अपील की कि कैंसर का इलाज किसी भी परिस्थिति में बीच में न छोड़ें। डॉक्टरों ने भी बताया कि उपचार में अनावश्यक देरी या रुकावट से बीमारी के नियंत्रण पर असर पड़ सकता है। निर्धारित उपचार पूरा करना और नियमित फॉलो-अप कराना बेहद जरूरी है।
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कैंसर का मतलब उम्मीद खत्म होना नहीं
एम्स के चिकित्सकों ने अभिभावकों को यह भी समझाया कि बच्चों में कैंसर का इलाज संभव है। समय पर बीमारी की पहचान, सही उपचार और नियमित निगरानी से बड़ी संख्या में बच्चे ठीक हो सकते हैं। बाल रक्त एवं कैंसर रोग में डीएम कर रहे डॉ. पक्किरेश रेड्डी, डॉ. अनुराग मोहंती और डॉ. मेघा धवन ने मरीजों और अभिभावकों से संवाद किया। उन्होंने बच्चों में होने वाले सामान्य कैंसर, शीघ्र पहचान और उपचार पूरा करने के महत्व की जानकारी दी।
बच्चे के इलाज में कई विशेषज्ञ मिलकर करते हैं काम
बाल रोग विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. शिखा मलिक ने कहा कि बाल कैंसर का उपचार टीम के प्रयास से होता है। इसमें बाल रोग विशेषज्ञ, बाल रक्त एवं कैंसर रोग विशेषज्ञ, शल्य चिकित्सक, रेडियोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, नर्सिंग अधिकारी और अन्य सहायक सेवाएं शामिल होती हैं।
यह भी पढ़ें-नायब तहसीलदार बनने का मौका: 73 पदों के लिए होगी विभागीय परीक्षा, पटवारी-आरआई और लिपिक कर सकेंगे आवेदन
अभिभावकों के लिए काम की 4 बातें
- बच्चे की लगातार बनी रहने वाली असामान्य समस्या को नजरअंदाज न करें।
- जरूरत पड़ने पर समय पर विशेषज्ञ से जांच कराएं।
- कैंसर का इलाज शुरू होने के बाद डॉक्टर की सलाह के बिना बीच में न रोकें।
- नियमित फॉलो-अप और निर्धारित उपचार पूरा करें।
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अभिभावक इन संकेतों को हल्के में न लें
डॉक्टरों ने बच्चों में कैंसर की शुरुआती पहचान और समय पर विशेषज्ञ से संपर्क करने की जरूरत समझाई। खासतौर पर ऐसी स्वास्थ्य समस्या जो लगातार बनी रहे या सामान्य इलाज के बाद भी ठीक न हो, उसकी जांच कराना जरूरी है। चिकित्सकों ने कहा कि कैंसर की आशंका होने पर घबराने के बजाय बच्चे की जांच और विशेषज्ञ की सलाह पर ध्यान देना चाहिए। जल्दी बीमारी पकड़ में आने से इलाज के बेहतर परिणाम की संभावना बढ़ती है।
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इलाज शुरू किया है तो बीच में न छोड़ें
एक अभिभावक ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि बच्चे के हड्डी के कैंसर का इलाज चार चक्र तक कराने के बाद उन्होंने उपचार बीच में रोक दिया और धार्मिक उपचार का सहारा लिया। इसके बाद बीमारी बढ़ गई। उन्होंने दूसरे अभिभावकों से अपील की कि कैंसर का इलाज किसी भी परिस्थिति में बीच में न छोड़ें। डॉक्टरों ने भी बताया कि उपचार में अनावश्यक देरी या रुकावट से बीमारी के नियंत्रण पर असर पड़ सकता है। निर्धारित उपचार पूरा करना और नियमित फॉलो-अप कराना बेहद जरूरी है।
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कैंसर का मतलब उम्मीद खत्म होना नहीं
एम्स के चिकित्सकों ने अभिभावकों को यह भी समझाया कि बच्चों में कैंसर का इलाज संभव है। समय पर बीमारी की पहचान, सही उपचार और नियमित निगरानी से बड़ी संख्या में बच्चे ठीक हो सकते हैं। बाल रक्त एवं कैंसर रोग में डीएम कर रहे डॉ. पक्किरेश रेड्डी, डॉ. अनुराग मोहंती और डॉ. मेघा धवन ने मरीजों और अभिभावकों से संवाद किया। उन्होंने बच्चों में होने वाले सामान्य कैंसर, शीघ्र पहचान और उपचार पूरा करने के महत्व की जानकारी दी।
बच्चे के इलाज में कई विशेषज्ञ मिलकर करते हैं काम
बाल रोग विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. शिखा मलिक ने कहा कि बाल कैंसर का उपचार टीम के प्रयास से होता है। इसमें बाल रोग विशेषज्ञ, बाल रक्त एवं कैंसर रोग विशेषज्ञ, शल्य चिकित्सक, रेडियोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, नर्सिंग अधिकारी और अन्य सहायक सेवाएं शामिल होती हैं।
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अभिभावकों के लिए काम की 4 बातें
- बच्चे की लगातार बनी रहने वाली असामान्य समस्या को नजरअंदाज न करें।
- जरूरत पड़ने पर समय पर विशेषज्ञ से जांच कराएं।
- कैंसर का इलाज शुरू होने के बाद डॉक्टर की सलाह के बिना बीच में न रोकें।
- नियमित फॉलो-अप और निर्धारित उपचार पूरा करें।
