{"_id":"5ff3494624c1cf20110fcf7e","slug":"cm-shivraj-singh-chouhan-allocated-ministries-to-tulsiram-silawat-and-govind-singh-rajput","type":"story","status":"publish","title_hn":"मध्यप्रदेश: तुलसीराम सिलावट बने जल संसाधन मंत्री, गोविंद सिंह राजपूत को राजस्व का जिम्मा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मध्यप्रदेश: तुलसीराम सिलावट बने जल संसाधन मंत्री, गोविंद सिंह राजपूत को राजस्व का जिम्मा
Mon, 04 Jan 2021 10:32 PM IST
गौरव पाण्डेय
पीटीआई, भोपाल
पीटीआई, भोपाल
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Mon, 04 Jan 2021 10:32 PM IST
विज्ञापन
तुलसीराम सिलावट
- फोटो : सोशल मीडिया (फाइल)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करने के एक दिन बाद कैबिनेट मंत्री बनाए गए दोनों मंत्रियों को सोमवार को उनके विभागों का आवंटन किया। सूत्रों के अनुसार, चौहान ने तुलसीराम सिलावट को जल संसाधन विभाग के साथ-साथ मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग की जिम्मेदारी दी है। गोविंद सिंह राजपूत को राजस्व एवं परिवहन विभाग का जिम्मेदारी सौंपी है।
विज्ञापन
ये दोनों मंत्री भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रबल समर्थक हैं और मंत्रिमंडल के रविवार को हुए तीसरे विस्तार में इनको फिर से कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। ये दोनों चौहान के मंत्रिमंडल में पहले भी कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं और दोनों को वही विभाग दिए गए हैं, जिनकी जिम्मेदारी उन्हें पहले सौंपी गई थी।
विज्ञापन
इन दोनों को पिछले साल 21 अप्रैल को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था, लेकिन तब वे विधायक नहीं थे। कोरोना वायरस महामारी के कारण तीन नवंबर से पहले विधानसभा सीटों के उपचुनाव नहीं हो पाए थे, इसके चलते उन्हें पिछले साल तीन नवंबर में हुए 28 विधानसभा सीटों के उपचुनाव से ठीक पहले संवैधानिक बाध्यता के कारण मंत्री के तौर पर छह माह पूरे होने से एक दिन पहले अक्तूबर में इस्तीफा देना पड़ा था।
विज्ञापन
पिछले साल तीन नवंबर को हुए उपचुनाव में अपनी-अपनी सीट जीतकर अब ये दोनों विधायक बन गए हैं और इसलिए इन्हें फिर से मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। इसी के साथ पिछले साल मार्च में कमलनाथ की पूर्व सरकार गिराने वाले 22 बागियों में 11 बागियों को मंत्रिमंडल में जगह मिल गई है। इनमें से अधिकांश सिंधिया का समर्थन करने वाले नेता हैं।
उल्लेखनीय है कि कुल 230 सदस्यीय मध्यप्रदेश विधानसभा में मंत्रिपरिषद में कुल 35 सदस्य हो सकते हैं। इन दो मंत्रियों का मंत्रिमंडल में शामिल करने के बाद मध्यप्रदेश मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री चौहान सहित कुल 31 सदस्य हो गए हैं।
