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जबलपुर के रिकॉर्ड रूम में आया बदलाव: अब राजस्व रिकॉर्ड बैंक लॉकर जैसी सुरक्षा में, मिनटों में मिलती है जानकारी

Wed, 08 Oct 2025 05:11 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Wed, 08 Oct 2025 05:11 PM IST
सार

जबलपुर के राजस्व अभिलेखागार में रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की नई तकनीक ने पुरानी व्यवस्था की तस्वीर बदल दी है। अब नागरिक घर बैठे अपने राजस्व रिकॉर्ड की जानकारी पोर्टल और कियोस्क से आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

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Changes in Jabalpur's record room: Revenue records now protected like a bank locker, information available wit
भोपाल में आयोजित कलेक्टर्स कॉन्फेंस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन बुधवार को जबलपुर जिले के राजस्व अभिलेखागार में किए गए नवाचार को राज्यभर के लिए अनुकरणीय बताया गया। आयुक्त जनसंपर्क एवं तत्कालीन कलेक्टर जबलपुर दीपक सक्सेना ने इस पहल की प्रस्तुति देते हुए बताया कि नवीनीकृत रिकॉर्ड रूम अब बैंक के लॉकर रूम जैसी सुविधा प्रदान कर रहा है, जहां रिकॉर्ड की सुरक्षा और उपलब्धता दोनों सुनिश्चित हुई हैं।
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परिवारों की पीढ़ियों के लिए विशेष महत्व रखने वाला यह राजस्व रिकॉर्ड न केवल अब सुरक्षित है, अपितु रिकार्ड कहां रखा है, इसके संबंध में भी पारदर्शिता आयी है और आवश्यक जानकारियां अब सभी के लिए सुलभ हैं। इसके तैयार किये गये पोर्टल पर चंद एंट्रियों से पता चल जाता है कि रिकॉर्ड किस रैक-शेल्फ-बॉक्स में किस नंबर पर रखा हुआ है। आवेदक घर बैठे भी यह जानकारी प्राप्त कर सकता है और रिकॉर्ड रूम के बाहर लगाए गए कियोस्क से भी रिकार्ड में केस की लोकेशन का पता लगा सकता है।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जबलपुर प्रवास के दौरान इस नवाचार की सराहना करते हुए जिला प्रशासन को जनहितकारी पहल के लिए बधाई दी थी। सक्सेना ने बताया कि पहले रिकॉर्ड रूम में गंदगी, अव्यवस्था और फाइलों की दुर्गंध से कर्मचारी व नागरिक दोनों परेशान रहते थे। अब आधुनिक तकनीक और सुसंगठित व्यवस्था से यह स्थिति पूरी तरह बदल गई है।
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बस्तों की जगह प्लास्टिक के बॉक्स का उपयोग 
रिकॉर्ड रूम को पूरी तरह रेनोवेट किया गया है। लोहे के रैक मरम्मत कर रंग-रोगन किए गए हैं। पुराने कपड़े के बस्तों की जगह अब पारदर्शी प्लास्टिक बॉक्स का उपयोग किया गया है। प्रत्येक केस फाइल को प्लास्टिक पन्नी में सुरक्षित रखकर रंगीन कोडिंग प्रणाली से तहसीलवार और वर्षवार वर्गीकृत किया गया है। हर रैक, शेल्फ और बॉक्स को यूनिक नंबर दिया गया है, जिससे रिकॉर्ड की पहचान आसान हो गई है। विशेष रूप से तैयार पोर्टल और कियोस्क के माध्यम से कोई भी व्यक्ति घर बैठे यह जान सकता है कि उसका रिकॉर्ड किस रैक या बॉक्स में रखा है। इस पहल से राजस्व रिकॉर्ड की पारदर्शिता बढ़ी है और वर्षों से चली आ रही फाइल खोजने की जटिलता समाप्त हुई है।
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