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Bhopal: भयभीत अवस्था में ट्रेन में बैठे थे झारखंड के लापता दो मूकबधिर नाबालिक, भोपाल में RPF ने किया रेस्क्यू
Sat, 24 May 2025 05:47 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Sat, 24 May 2025 05:47 PM IST
सार
भोपाल स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर ड्यूटी पर तैनात आरपीएफ के सहायक उपनिरीक्षक राघवेंद्र सिंह को नियमित गश्त के दौरान शक होने पर झारखंड के दो नाबालिक मूकबधिर बच्चों बच्चों का रेस्क्यू किया।
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आरपीएफ के साथ मूकबधिर बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भोपाल रेल मंडल लगातार स्टेशनों पर ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते चला कर बच्चों का रेस्क्यू कर रही है। इसी कड़ी में भोपाल स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर ड्यूटी पर तैनात आरपीएएफ के सहायक उपनिरीक्षक राघवेंद्र सिंह को नियमित गश्त के दौरान शक होने पर झारखंड के दो नाबालिक मूकबधिर बच्चों का रेस्क्यू किया है। दरसअल प्लेटफॉर्म पर खड़ी ट्रेन संख्या 07076 गोरखपुर-हैदराबाद एक्सप्रेस के जनरल कोच की जांच के दौरान दो मूकबधिर नाबालिग बालक भयभीत एवं असहाय अवस्था में दरवाजे के पास बैठे पाए गए। स्थानीय यात्रियों से पूछताछ करने पर कोई जानकारी प्राप्त नहीं हुई। इसके बाद दोनों बच्चों को सुरक्षा एवं सांत्वना प्रदान करते हुए आरपीएफ पोस्ट, भोपाल लाया गया।
इशारों के माध्यम से जताई फोन करने की इच्छा
आरपीएफ पोस्ट में दोनों बच्चों ने इशारों के माध्यम से फोन करने की इच्छा जताई, जिस पर तत्परता दिखाते हुए उनके परिजनों से संपर्क स्थापित किया गया। बातचीत के दौरान यह जानकारी प्राप्त हुई कि दोनों बालक प्रवीण कुमार, उम्र 14 वर्ष तथा सावन कुमार, उम्र 17 वर्ष झारखंड राज्य के देवघर जिले के निवासी हैं और 16 मई 2025 से लापता थे। इस संदर्भ में स्थानीय थाना कुंडा एवं थाना जसडीह में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
यह भी पढ़ें-बीयू में आज शुरू होगी यूटीडी के 10 से अधिक विभागों की काउंसलिंग, मेरिट के आधार पर मिलेगा प्रवेश
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अधिकारियों ने परिजनों को किया सूचित
भोपाल रेल मंडल के अधिकारियों ने परिजनों को सूचित किया गया कि उनके बच्चे भोपाल स्टेशन पर सुरक्षित पाए गए हैं और उन्हें समुचित देखभाल प्रदान की जा रही है। बालकों को चिकित्सकीय परीक्षण के लिए जयप्रकाश नारायण (जेपी) अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक जांच के उपरांत उन्हें बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। समिति के अध्यक्ष धनीराम सिंह पवार एवं अन्य सदस्यों द्वारा विचारोपरांत किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 27 के अंतर्गत दोनों बालकों को अस्थाई संरक्षा हेतु एसओएस बालग्राम (स्पेशल) संस्था को सौंपा गया।
यह भी पढ़ें-केरल पहुंचा मानसून, 15 जून तक मध्य प्रदेश में पहुंचने का अनुमान,राज्य के दक्षिणी हिस्से से होगी एंट्री
रेलवे सुरक्षा बल की सतर्कता एवं तत्परता का प्रतीक
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया ने बताया कि यह कार्य न केवल रेलवे सुरक्षा बल की सतर्कता एवं तत्परता का प्रतीक है, बल्कि भारतीय रेलवे द्वारा यात्रियों तथा समाज के विशेष रूप से सक्षम वर्ग के प्रति निभाई जा रही सामाजिक जिम्मेदारी का भी उदाहरण है। भोपाल मंडल द्वारा भविष्य में भी "ऑपरेशन नन्हें फरिश्ते" जैसे मानवीय प्रयासों को निरंतर जारी रखा जाएगा।
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इशारों के माध्यम से जताई फोन करने की इच्छा
आरपीएफ पोस्ट में दोनों बच्चों ने इशारों के माध्यम से फोन करने की इच्छा जताई, जिस पर तत्परता दिखाते हुए उनके परिजनों से संपर्क स्थापित किया गया। बातचीत के दौरान यह जानकारी प्राप्त हुई कि दोनों बालक प्रवीण कुमार, उम्र 14 वर्ष तथा सावन कुमार, उम्र 17 वर्ष झारखंड राज्य के देवघर जिले के निवासी हैं और 16 मई 2025 से लापता थे। इस संदर्भ में स्थानीय थाना कुंडा एवं थाना जसडीह में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
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अधिकारियों ने परिजनों को किया सूचित
भोपाल रेल मंडल के अधिकारियों ने परिजनों को सूचित किया गया कि उनके बच्चे भोपाल स्टेशन पर सुरक्षित पाए गए हैं और उन्हें समुचित देखभाल प्रदान की जा रही है। बालकों को चिकित्सकीय परीक्षण के लिए जयप्रकाश नारायण (जेपी) अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक जांच के उपरांत उन्हें बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। समिति के अध्यक्ष धनीराम सिंह पवार एवं अन्य सदस्यों द्वारा विचारोपरांत किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 27 के अंतर्गत दोनों बालकों को अस्थाई संरक्षा हेतु एसओएस बालग्राम (स्पेशल) संस्था को सौंपा गया।
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रेलवे सुरक्षा बल की सतर्कता एवं तत्परता का प्रतीक
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया ने बताया कि यह कार्य न केवल रेलवे सुरक्षा बल की सतर्कता एवं तत्परता का प्रतीक है, बल्कि भारतीय रेलवे द्वारा यात्रियों तथा समाज के विशेष रूप से सक्षम वर्ग के प्रति निभाई जा रही सामाजिक जिम्मेदारी का भी उदाहरण है। भोपाल मंडल द्वारा भविष्य में भी "ऑपरेशन नन्हें फरिश्ते" जैसे मानवीय प्रयासों को निरंतर जारी रखा जाएगा।
