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Bhopal: प्रदेश के जनजाति क्षेत्र झाबुआ में 158% बलात्कार के मामले बढ़े, कांग्रेस विधायक बोले- चिंता जनक स्थिति
Sat, 22 Mar 2025 07:51 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Sat, 22 Mar 2025 07:51 PM IST
सार
Rape cases: जौरा से कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने बताया कि विधानसभा में पूछे सवाल में गृह मंत्री ने जवाब दिया है कि प्रदेश में 2024 में प्रतिदिन 20 बलात्कार हुए हैं।। झाबुआ में 158% बलात्कार के मामले बढ़े हैं, जो कि चिंता जनक है।
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कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश के जौरा से कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने बताया कि विधानसभा में पूछे सवाल में गृह मंत्री ने जवाब दिया है कि प्रदेश में प्रदेश में 2024 में प्रतिदिन 20 बलात्कार हुए। वर्ष 2020 में बलात्कार की घटनाएं 6134 से बढ़कर 2024 में 7294 हो गई जिसमें 19% की वृद्धि हुई है। दी गई जानकारी ने बताया गया है कि वर्ष 2023-24 के वार्षिक प्रतिवेदन में दिए गए बलात्कार के कुल प्रकरण 5374 की जानकारी सत्य है, वास्तव में 2023 में बलात्कार के 7202 प्रकरण हुए तथा इस अवधि में अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के प्रकरणों की संख्या 3831 है, जबकि वार्षिक प्रतिवेदन में 883 प्रकरण बताए गए। महिलाओं से बलात्कार की घटनाएं पिछले 5 वर्षों में अनुसूचित जाति में 10% बृद्धि, अनुसूचित जनजाति में 26% की बृद्धि, पिछड़ा वर्ग की 20% तथा सामान्य में 24% में वृद्धि हुई ।
सबसे ज्यादा 158% झाबुआ में हुई वृद्धि
दी गई जानकारी अनुसार पिछले पांच वर्षों में बलात्कार की घटनाओं में सबसे ज्यादा वृद्धि 158% झाबुआ जिले में हुई, इंदौर शहर में 103 प्रतिशत, इंदौर ग्रामीण में 69% भोपाल शहर में 59% रतलाम में 46% वृद्धि हुई जबकि वालाघाट में 33% जबलपुर में 15% की कमी हुई, गुना, अशोकनगर, भिंड, बुरहानपुर, शाजापुर, कटनी, शिवानी, पन्ना , सतना, अनूपपुर ,राजगढ़ में कमी हुई।
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यह भी पढ़ें-MP में बढ़ते महिला अपराधों को लेकर महिला कांग्रेस का प्रदर्शन,अध्यक्ष बोलीं-सुरक्षा देने में सरकार फेल
18 परसेंट को सजा हुई 82% हुए बरी
विधायक पंकज उपाध्याय द्वारा न्यायालय में बलात्कारों के प्रकरण की सक्सेस रेट पूछने पर बताया कि पिछले पांच वर्षों में महिला बलात्कार की अनुसूचित जाति के 2739 प्रकरणों के फैसले हुए जिसमें 23 प्रतिशत को सजा तथा 77% बरी हुए। अनुसूचित जनजाति में 3163 फैसले में 22% को सजा तथा 78% बरी हुए, पिछड़ा वर्ग के 3982 फैसले में 21% को सजा तथा 79% बरी हुए तथा सामान्य के 1222 फैसलो में 18 परसेंट को सजा हुई तथा 82% बरी हुए ।
यह भी पढ़ें-स्वच्छता सर्वेक्षण की टीम भोपाल पहुंची, शाम होने से नहीं देख सके नालों की हकीकत,आज कई इलाकों में जाएगी
साढ़े तीन गुना ज्यादा
जवाब में कहा कि महिला बलात्कार की कुल संख्या 5374 महिला सुरक्षा शाखा द्वारा तथा अनुसूचित जाति तथा जनजाति की संख्या 883 आजाक शाखा पुलिस मुख्यालय की जानकारी पर दी गई थी जिलो से जानकारी एकत्रित करने पर वास्तविक संख्या 7202 तथा 3831 पाई गई। विधायक पंकज उपाध्याय ने आरोप लगाया कि वार्षिक प्रतिवेदन में महिलाओ से कुल बलात्कार के आंकड़े 40% बास्तविक संख्या से 40% ज्यादा तथा अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जनजाति के आंकड़े 340% ज्यादा यानी है साढ़े तीन गुना ज्यादा है।
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सबसे ज्यादा 158% झाबुआ में हुई वृद्धि
दी गई जानकारी अनुसार पिछले पांच वर्षों में बलात्कार की घटनाओं में सबसे ज्यादा वृद्धि 158% झाबुआ जिले में हुई, इंदौर शहर में 103 प्रतिशत, इंदौर ग्रामीण में 69% भोपाल शहर में 59% रतलाम में 46% वृद्धि हुई जबकि वालाघाट में 33% जबलपुर में 15% की कमी हुई, गुना, अशोकनगर, भिंड, बुरहानपुर, शाजापुर, कटनी, शिवानी, पन्ना , सतना, अनूपपुर ,राजगढ़ में कमी हुई।
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18 परसेंट को सजा हुई 82% हुए बरी
विधायक पंकज उपाध्याय द्वारा न्यायालय में बलात्कारों के प्रकरण की सक्सेस रेट पूछने पर बताया कि पिछले पांच वर्षों में महिला बलात्कार की अनुसूचित जाति के 2739 प्रकरणों के फैसले हुए जिसमें 23 प्रतिशत को सजा तथा 77% बरी हुए। अनुसूचित जनजाति में 3163 फैसले में 22% को सजा तथा 78% बरी हुए, पिछड़ा वर्ग के 3982 फैसले में 21% को सजा तथा 79% बरी हुए तथा सामान्य के 1222 फैसलो में 18 परसेंट को सजा हुई तथा 82% बरी हुए ।
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साढ़े तीन गुना ज्यादा
जवाब में कहा कि महिला बलात्कार की कुल संख्या 5374 महिला सुरक्षा शाखा द्वारा तथा अनुसूचित जाति तथा जनजाति की संख्या 883 आजाक शाखा पुलिस मुख्यालय की जानकारी पर दी गई थी जिलो से जानकारी एकत्रित करने पर वास्तविक संख्या 7202 तथा 3831 पाई गई। विधायक पंकज उपाध्याय ने आरोप लगाया कि वार्षिक प्रतिवेदन में महिलाओ से कुल बलात्कार के आंकड़े 40% बास्तविक संख्या से 40% ज्यादा तथा अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जनजाति के आंकड़े 340% ज्यादा यानी है साढ़े तीन गुना ज्यादा है।
