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Bhopal News: आदमपुर कचरा खंती में आग लगने के मामले पर सुनवाई, सख्ती से लागू हों कचरा प्रबंधन के नए नियम

Fri, 20 Feb 2026 09:48 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Fri, 20 Feb 2026 09:48 PM IST
सार

भोपाल की आदमपुर कचरा खंती के मामले में सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि 1 अप्रैल से लागू होने वाले ठोस कचरा प्रबंधन के नए नियम पूरे देश में सख्ती से लागू किए जाएं। इस मामले में पहले हरित अधिकरण ने नगर निगम पर 1 करोड़ 80 लाख रुपये का दंड लगाया था।

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Bhopal News: Hearing on the case of fire in Adampur garbage pit of Bhopal, new rules of waste management shoul
आदमपुर कचरा खंती - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भोपाल की आदमपुर कचरा खंती में बार-बार आग लगने के मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और दूरगामी प्रभाव वाला आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि 1 अप्रैल से लागू होने वाले ठोस कचरा प्रबंधन नियम-2026 केवल भोपाल तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि देश के सभी नगर निकायों पर समान रूप से लागू होंगे।यह मामला पहले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में उठा था। पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी. पांडे ने आदमपुर खंती में आग लगने की घटनाओं को लेकर याचिका दायर की थी। इसके बाद अधिकरण ने नगर निगम पर 1 करोड़ 80 लाख रुपये का दंड लगाया था। इस आदेश के खिलाफ नगर निगम ने उच्चतम न्यायालय में अपील की थी, जिस पर अब सुनवाई चल रही है।
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अदालत की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि देश में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में घरेलू, व्यापारिक और औद्योगिक कचरा निकल रहा है। कुछ शहरों में कचरा एकत्र करने की व्यवस्था बेहतर हुई है, लेकिन उसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। बिना उपचार किए कचरे को खुले स्थानों या पुराने डंप स्थलों पर डालने से भूमि और भूजल प्रदूषित हो रहे हैं। अदालत ने कहा कि अब और इंतजार नहीं किया जा सकता। नई पीढ़ी को स्वच्छ वातावरण देना सरकार और स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी है। इसलिए नए नियमों का तुरंत और पूरी सख्ती से पालन होना चाहिए। न्यायालय ने यह भी कहा कि नगर निकायों के अधिकारी और चुने हुए जनप्रतिनिधि मिलकर जिम्मेदारी निभाएं।
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भोपाल की स्थिति
भोपाल शहर से प्रतिदिन लगभग 850 टन कचरा निकलता है। इसमें से करीब 800 टन कचरा खंती तक पहुंचता है। लगभग 290 टन मिट्टी के रूप में अलग हो जाता है, जबकि 500 टन से अधिक मिश्रित कचरा बचता है। नगर निगम की वर्तमान प्रसंस्करण क्षमता इससे कम है, जिसके कारण पूरा कचरा समय पर निस्तारित नहीं हो पा रहा।
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आदमपुर मामले पर निर्देश
आदमपुर छावनी डंप स्थल के पुराने कचरे के निस्तारण के लिए नगर निगम ने निविदा प्रक्रिया पूरी करने हेतु दो सप्ताह का समय मांगा। अदालत ने यह समय दिया, लेकिन साफ संकेत दिया कि अब किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। इस सुनवाई के बाद यह साफ हो गया है कि आदमपुर का मामला केवल एक शहर का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि देशभर में कचरा प्रबंधन व्यवस्था सुधारने की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण प्रकरण बन गया है।


 
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