{"_id":"68fee975592b443b490fda81","slug":"bhopal-news-doctor-couple-sets-an-example-of-humanity-by-donating-the-body-of-their-newborn-daughter-shriji-2025-10-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bhopal News: नवजात बेटी श्रीजी का देहदान कर डॉक्टर दंपती ने पेश की मानवता की मिसाल, चिकित्सा शोध में योगदान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bhopal News: नवजात बेटी श्रीजी का देहदान कर डॉक्टर दंपती ने पेश की मानवता की मिसाल, चिकित्सा शोध में योगदान
Mon, 27 Oct 2025 09:12 AM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Mon, 27 Oct 2025 09:12 AM IST
सार
डॉक्टर दंपती ने अपनी मृत जन्मी बेटी ‘श्रीजी’ का देहदान एम्स भोपाल को किया। यह कदम न सिर्फ समाज के लिए प्रेरणादायक बना, बल्कि चिकित्सा शिक्षा और शोध में भी एक अमर योगदान के रूप में याद किया जाएगा।
विज्ञापन
श्रीजी का देहदान एम्स भोपाल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दुखद परिस्थितियों में भी मानव कल्याण का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करते हुए ब्यावरा के डॉक्टर दंपती डॉ. अजय पाराशर और डॉ. शाल्वी पाराशर ने अपनी नवजात मृत जन्मी पुत्री श्रीजी का देहदान एम्स भोपाल को किया। इस नेक कदम से नन्ही श्रीजी की पार्थिव देह चिकित्सा शोध में योगदान देगी, जो मानवता की सेवा में एक नया अध्याय जोड़ेगी।
दो साल बाद बच्चे की किलकारी गूंजने की थी उम्मीद
ब्यावरा के अहिंसा नगर, ओल्ड एबी रोड स्थित वल्लभ दास पाराशर हेल्थ केयर एंड क्लिनिक के संचालक डॉ. अजय पाराशर (बीएएमएस) और उनकी पत्नी डॉ. शाल्वी पाराशर (बीएएमएस) के घर दो साल बाद बच्चे की किलकारी गूंजने की उम्मीद थी। गर्भ में पल रही बच्ची के हृदय की गति सामान्य से कम थी, फिर भी दंपती को विश्वास था कि वह स्वस्थ जन्म लेगा। भोपाल के एक निजी अस्पताल में सात माह के गर्भ के बाद डिलीवरी हुई, लेकिन मृत बच्ची पैदा हुई। इस दुख को सहते हुए परिवार ने नन्ही की देह को चिकित्सा शोध के लिए दान करने का फैसला लिया। मां डॉ. शाल्वी ने देहदान के फार्म में उसका नाम श्रीजी लिखवाया। शासन के प्रोटोकॉल के अनुसार, श्रीजी की पार्थिव देह को गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मान किया गया। इस दौरान माता-पिता डॉ. अजय और डॉ. शाल्वी, दादा-दादी पंडित अशोक कुमार पाराशर और रजनी पाराशर, नानी, बुआ, फूफा और डॉ. प्रशांत त्रिपाठी उपस्थित थे।
यह भी पढ़ें-जिंदगी रुकी, पर उम्मीद चलती रही, एम्स भोपाल में ब्रेन डेड युवक बना पांच लोगों का सहारा
विज्ञापन
सात साल पहले पुत्र ही देह की थी दान
सात साल पहले डॉ. प्रशांत त्रिपाठी और डॉ. पूजा त्रिपाठी ने अपने पहले पुत्र की देह एम्स को दान की थी, जिसकी सभी ने सराहना की थी। डॉ. प्रशांत त्रिपाठी डेंटिस्ट हैं। ईश्वर की कृपा से उन्हें बाद में एक स्वस्थ पुत्र की प्राप्ति हुई। डॉ. प्रशांत श्रीजी के पिता अजय की बुआ के बेटे हैं। उन्होंने ही श्रीजी की देहदान के लिए प्रेरित किया। श्रीजी के परदादा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित वल्लभ दास पाराशर की सेवा भाव की विरासत भी इस निर्णय में प्रेरणा बनी।
यह भी पढ़ें-दस में आठ लोग किसी न किसी त्वचा रोग से प्रभावित, देश भर के विशेषज्ञों ने साझा की नई तकनीकें
श्रीजी नॉलेज बन कर हमेशा अमर रहेगी
श्रीजी की बुआ डॉ. साक्षी पाराशर, जो एक मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि आत्मा के चले जाने के बाद देह को मिट्टी में दफनाने के बजाय हमने इसे शोध के लिए दान किया। श्रीजी चिकित्सा शिक्षा में हमेशा जीवित रहेगी। वह एक सुपर डॉक्टर बन चुकी है, जो अपनी देह से छात्रों को पढ़ाएगी। यह देहदान चिकित्सा शिक्षा को सशक्त करेगा और अन्य परिवारों को भी प्रेरित करेगा।
विज्ञापन
दो साल बाद बच्चे की किलकारी गूंजने की थी उम्मीद
ब्यावरा के अहिंसा नगर, ओल्ड एबी रोड स्थित वल्लभ दास पाराशर हेल्थ केयर एंड क्लिनिक के संचालक डॉ. अजय पाराशर (बीएएमएस) और उनकी पत्नी डॉ. शाल्वी पाराशर (बीएएमएस) के घर दो साल बाद बच्चे की किलकारी गूंजने की उम्मीद थी। गर्भ में पल रही बच्ची के हृदय की गति सामान्य से कम थी, फिर भी दंपती को विश्वास था कि वह स्वस्थ जन्म लेगा। भोपाल के एक निजी अस्पताल में सात माह के गर्भ के बाद डिलीवरी हुई, लेकिन मृत बच्ची पैदा हुई। इस दुख को सहते हुए परिवार ने नन्ही की देह को चिकित्सा शोध के लिए दान करने का फैसला लिया। मां डॉ. शाल्वी ने देहदान के फार्म में उसका नाम श्रीजी लिखवाया। शासन के प्रोटोकॉल के अनुसार, श्रीजी की पार्थिव देह को गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मान किया गया। इस दौरान माता-पिता डॉ. अजय और डॉ. शाल्वी, दादा-दादी पंडित अशोक कुमार पाराशर और रजनी पाराशर, नानी, बुआ, फूफा और डॉ. प्रशांत त्रिपाठी उपस्थित थे।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें-जिंदगी रुकी, पर उम्मीद चलती रही, एम्स भोपाल में ब्रेन डेड युवक बना पांच लोगों का सहारा
विज्ञापन
सात साल पहले पुत्र ही देह की थी दान
सात साल पहले डॉ. प्रशांत त्रिपाठी और डॉ. पूजा त्रिपाठी ने अपने पहले पुत्र की देह एम्स को दान की थी, जिसकी सभी ने सराहना की थी। डॉ. प्रशांत त्रिपाठी डेंटिस्ट हैं। ईश्वर की कृपा से उन्हें बाद में एक स्वस्थ पुत्र की प्राप्ति हुई। डॉ. प्रशांत श्रीजी के पिता अजय की बुआ के बेटे हैं। उन्होंने ही श्रीजी की देहदान के लिए प्रेरित किया। श्रीजी के परदादा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित वल्लभ दास पाराशर की सेवा भाव की विरासत भी इस निर्णय में प्रेरणा बनी।
यह भी पढ़ें-दस में आठ लोग किसी न किसी त्वचा रोग से प्रभावित, देश भर के विशेषज्ञों ने साझा की नई तकनीकें
श्रीजी नॉलेज बन कर हमेशा अमर रहेगी
श्रीजी की बुआ डॉ. साक्षी पाराशर, जो एक मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि आत्मा के चले जाने के बाद देह को मिट्टी में दफनाने के बजाय हमने इसे शोध के लिए दान किया। श्रीजी चिकित्सा शिक्षा में हमेशा जीवित रहेगी। वह एक सुपर डॉक्टर बन चुकी है, जो अपनी देह से छात्रों को पढ़ाएगी। यह देहदान चिकित्सा शिक्षा को सशक्त करेगा और अन्य परिवारों को भी प्रेरित करेगा।
