{"_id":"69a17c15392a268c72092745","slug":"bhopal-news-controversy-over-bhopal-municipal-corporation-headquarters-construction-cost-rises-from-22-crore-2026-02-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bhopal News: भोपाल निगम मुख्यालय निर्माण पर घमासान, 22 करोड़ से 72 करोड़ पहुंची लागत, भ्रष्टाचार के आरोप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bhopal News: भोपाल निगम मुख्यालय निर्माण पर घमासान, 22 करोड़ से 72 करोड़ पहुंची लागत, भ्रष्टाचार के आरोप
Fri, 27 Feb 2026 04:42 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Fri, 27 Feb 2026 04:42 PM IST
सार
भोपाल नगर निगम के नए मुख्यालय भवन की लागत 22.57 करोड़ से बढ़कर करीब 72 करोड़ रुपए पहुंचने पर कांग्रेस विधायक जयवर्द्धन सिंह ने विधानसभा में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगाए। उन्होंने टेंडर प्रक्रिया, निर्माण गुणवत्ता और फायर सेफ्टी पर सवाल उठाते हुए उच्च स्तरीय जांच और थर्ड पार्टी ऑडिट की मांग की।
विज्ञापन
भोपाल नगर निगम का नया भवन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजधानी भोपाल में बन रहे नगर निगम के नवीन मुख्यालय भवन को लेकर विधानसभा में सियासी संग्राम छिड़ गया है। पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस विधायक जयवर्द्धन सिंह ने सदन में करोड़ों रुपए के संभावित भ्रष्टाचार, निर्माण गुणवत्ता में लापरवाही और टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए।नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सदन में बताया कि नगर पालिका निगम भोपाल का नया मुख्यालय लिंक रोड नंबर-2, सेंट मैरी स्कूल के सामने, तुलसी नगर स्थित 4.21 एकड़ भूमि पर बनाया जा रहा है। इस परियोजना पर लगभग 72 करोड़ रुपए खर्च होने की संभावना है।
22 करोड़ से 72 करोड़ तक कैसे पहुंची लागत?
जयवर्द्धन सिंह ने आरोप लगाया कि परियोजना का प्रारंभिक टेंडर 22 करोड़ 57 लाख रुपए का था, लेकिन बाद में लागत में बार-बार बढ़ोतरी की गई। नियमानुसार टेंडर राशि अधिकतम 20% तक ही बढ़ाई जा सकती है, अन्यथा दोबारा निविदा प्रक्रिया अनिवार्य होती है। कांग्रेस विधायक का आरोप है कि इस नियम की अनदेखी कर निर्माण एजेंसी को लाभ पहुंचाया गया।
यह भी पढ़ें-मध्य विधानसभा के बाहर कांग्रेस विधायक का ‘शीर्षासन सत्याग्रह’, 15 FIR हटाने की मांग पर अनोखा विरोध
विज्ञापन
गुणवत्ता और सुरक्षा पर सवाल
कांग्रेस विधायक ने दावा किया कि निर्माण कार्य में निम्न स्तर की सामग्री उपयोग किए जाने की शिकायतें हैं। फायर सेफ्टी जैसे अहम सुरक्षा मानकों की भी अनदेखी की गई है। इतना ही नहीं, इतने बड़े प्रशासनिक मुख्यालय में पर्याप्त मीटिंग हॉल का प्रावधान नहीं होना योजना की गंभीर खामी को दर्शाता है।
यह भी पढ़ें-800 स्क्वायर फीट के मकान में 36 वोटर,शुद्धिकरण के बाद भी नरेला में फर्जी वोटर
टैक्स के पैसे का हिसाब दो
जयवर्द्धन सिंह ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय स्वतंत्र तकनीकी और वित्तीय जांच, थर्ड पार्टी ऑडिट और टेंडर से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भ्रष्टाचार हुआ है तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। कांग्रेस ने साफ किया है कि यह मुद्दा सदन से लेकर सड़क तक उठाया जाएगा।
विज्ञापन
22 करोड़ से 72 करोड़ तक कैसे पहुंची लागत?
जयवर्द्धन सिंह ने आरोप लगाया कि परियोजना का प्रारंभिक टेंडर 22 करोड़ 57 लाख रुपए का था, लेकिन बाद में लागत में बार-बार बढ़ोतरी की गई। नियमानुसार टेंडर राशि अधिकतम 20% तक ही बढ़ाई जा सकती है, अन्यथा दोबारा निविदा प्रक्रिया अनिवार्य होती है। कांग्रेस विधायक का आरोप है कि इस नियम की अनदेखी कर निर्माण एजेंसी को लाभ पहुंचाया गया।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें-मध्य विधानसभा के बाहर कांग्रेस विधायक का ‘शीर्षासन सत्याग्रह’, 15 FIR हटाने की मांग पर अनोखा विरोध
विज्ञापन
गुणवत्ता और सुरक्षा पर सवाल
कांग्रेस विधायक ने दावा किया कि निर्माण कार्य में निम्न स्तर की सामग्री उपयोग किए जाने की शिकायतें हैं। फायर सेफ्टी जैसे अहम सुरक्षा मानकों की भी अनदेखी की गई है। इतना ही नहीं, इतने बड़े प्रशासनिक मुख्यालय में पर्याप्त मीटिंग हॉल का प्रावधान नहीं होना योजना की गंभीर खामी को दर्शाता है।
यह भी पढ़ें-800 स्क्वायर फीट के मकान में 36 वोटर,शुद्धिकरण के बाद भी नरेला में फर्जी वोटर
टैक्स के पैसे का हिसाब दो
जयवर्द्धन सिंह ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय स्वतंत्र तकनीकी और वित्तीय जांच, थर्ड पार्टी ऑडिट और टेंडर से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भ्रष्टाचार हुआ है तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। कांग्रेस ने साफ किया है कि यह मुद्दा सदन से लेकर सड़क तक उठाया जाएगा।
