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Bhopal: डेढ़ माह बाद एम्स में शुरू हुआ यलो फीवर का टीकाकरण, 42 देशों की यात्रा करने वाले यात्रियों को राहत
Thu, 21 Aug 2025 06:43 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Thu, 21 Aug 2025 06:43 PM IST
सार
एम्स में डेढ़ माह बाद एक बार फिर से यलो फीवर का वैक्सीनेशन शुरू किया गया है। यह टीका 42 देश की यात्रा करने वाले यात्रियों को लगाया जाता है। वैक्सीनेशन शुरू होने से लोगों को एजुकेशन, बिजनेस और टूरिज्म वीजा मिलने में परेशानी नहीं होगी।
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एम्स भोपाल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजधानी भोपाल स्थित एम्स में डेढ़ माह बाद एक बार फिर से यलो फीवर का टीकाकरण शुरू किया गया है। टीका 42 देश की यात्रा करने वाले यात्रियों को लगाया जाता है। वैक्सीनेशन शुरू होने से लोगों को एजुकेशन, बिजनेस और टूरिज्म वीजा मिलने में परेशानी नहीं होगी। दरअसल, 42 देशों की यात्रा से पहले जरूरी वैक्सीनेशन प्रदेश में केवल एम्स भोपाल होता है। वीजा के लिए इसका सटिर्फिकेट जरूरी होता है।
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गौरतलब है कि अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कई हिस्सों में यलो फीवर बीमारी पाई जाती है। ऐसे में यहां यात्रा के लिए इसका टीकाकरण जरूरी होता है। एम्स भोपाल प्रदेश का एकमात्र यलो फीवर वैक्सीनेशन सेंटर है, जहां हर महीने करीब 200 से 250 लोग वैक्सीन लगवाने आते हैं। एम्स भोपाल में यलो फीवर वैक्सीन का स्टॉक करीब डेढ़ महीने बाद आया है।
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ब्राजील, फ्रांस और रूस में बनते हैं टीके
एम्स के चिकित्सकों के अनुसार यह टीके ब्राजील, फ्रांस और रूस में बनते हैं और वहां से विश्व स्वास्थ्य संगठन के जरिए भारत सरकार को दिए जाते हैं। इसके बाद वैक्सीन की खेप हिमाचल प्रदेश के कसौली में केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (सीआरआई) भेजी जाती है, जहां गुणवत्ता जांच के बाद देशभर के सेंटरों में आपूर्ति की जाती है। कोविड-19 महामारी ने यलो फीवर वैक्सीन के उत्पादन और आपूर्ति को भी प्रभावित किया है। बता दें, भारत में यलो फीवर टीकाकरण के लिए कुल 63 अधिकृत केंद्र हैं, लेकिन मध्य प्रदेश में केवल एम्स भोपाल ही यह सुविधा देता है।
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