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MP में मनमाने तबादलों पर बड़ा फैसला: डिंडौरी कलेक्टर मारव्या के आदेश निरस्त, शिक्षकों और कर्मचारियों को राहत

Thu, 21 Aug 2025 06:01 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Thu, 21 Aug 2025 06:01 PM IST
सार

मध्यप्रदेश शासन ने डिंडौरी जिले में जनजाति कार्य विभाग के स्कूलों और छात्रावासों में किए गए मनमाने तबादलों को रद्द कर दिया है। शासन का यह कदम कलेक्टर के आदेशों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। इस फैसले से सैकड़ों शिक्षकों और अधीक्षकों को राहत मिली है। 

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Big decision on arbitrary transfers in MP: Dindori Collector Marvya's orders cancelled, relief to teachers and
IAS नेहा मारव्या सिंह फोटो

विस्तार

मध्यप्रदेश शासन ने डिंडौरी जिले में जनजाति कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित स्कूलों और छात्रावासों में किए गए मनमानी तबादलों को निरस्त कर दिया है। शासन का यह कदम कलेक्टर नेहा मारव्या के आदेशों पर सीधी चोट माना जा रहा है। पिछले एक माह से जिले में तबादला विरोध की आवाजें उठ रही थीं। जनजाति कार्य विभाग मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले स्कूलों और छात्रावासों के करीब 200 शिक्षकों को हाईकोर्ट से स्थगन आदेश भी मिल चुका था। अब शासन स्तर से जारी निर्देश के अनुसार 438 शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण रद्द कर दिया गया है। कलेक्टर द्वारा किए गए तीन प्राचार्यों के स्थानांतरण को भी शासन ने नियम विरुद्ध मानते हुए खत्म कर दिया है। यह तबादले स्थानांतरण नीति 2025 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं पाए गए। इसी तरह 12 उच्च माध्यमिक शिक्षकों के तबादले भी अवैध मानकर रद्द कर दिए गए हैं। 11 जुलाई 2025 को जारी आदेश में 139 छात्रावास अधीक्षकों की पदस्थापना की गई थी। इसमें भी अनियमितताएं सामने आने पर शासन ने इसे निरस्त कर दिया है। अधीक्षकों की जिम्मेदारी अब 16 मार्च 2015 के निर्देशों के अनुसार तय की जाएगी। 

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विरोध के बावजूद प्रशासन फैसले पर अड़ा रहा 
लगातार विरोध के बावजूद जिला प्रशासन अपने फैसले पर अड़ा रहा। अंततः शासन द्वारा सभी आदेश रद्द कर दिए जाने से जिले के प्रशासन की प्रदेश स्तर पर बड़ी किरकिरी हुई है। इस पूरे मामले में तत्कालीन प्रभारी सहायक आयुक्त और डिप्टी कलेक्टर बैद्यनाथ बासनिक की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों ने उनके विरुद्ध अलग से कार्रवाई की मांग की है। शासन ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश उच्च न्यायालय में लंबित याचिकाओं पर अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा।  
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सियासत भी तेज, विधायक धुर्वे ने कलेक्टर पर उठाए सवाल
डिंडौरी जिले में तबादला विवाद पर अब सियासत भी गर्माने लगी है। शहपुरा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने प्रेसवार्ता कर कलेक्टर द्वारा किए गए आदेशों को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने इन तबादलों को शिक्षकों के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि जनजाति कार्य विभाग का निर्णय समयानुकूल और न्यायसंगत है। विधायक धुर्वे ने कहा कि जिला स्तर पर मनमाने तबादलों से शिक्षक ही नहीं, बल्कि स्कूलों की पढ़ाई पर भी प्रतिकूल असर पड़ा। लगातार किए गए तबादलों से शिक्षा व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो रही थी। खासकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों से अनुभवी शिक्षकों को हटाकर दूसरी जगह भेजा जा रहा था, जिससे बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही थी। उन्होंने जनजाति कार्य विभाग से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न बने। 

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