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Bhopal: एमपी कांग्रेस का बड़ा आरोप,चित्रकूट में 750 करोड़ के फंड का घोटाला, सामुदायिक भवन में हो रही नशाखोरी
Sat, 24 May 2025 04:15 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Sat, 24 May 2025 04:15 PM IST
सार
प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी और पूर्व मंत्री मुकेश नायक ने बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने शनिवार को पीसीसी में प्रेस वार्ता कर आरोप लगाया कि चित्रकूट में विकास और नमामि गंगे परियोजना के नाम पर दिए गए करोड़ों रुपए गलत तरीके से खर्च किए गए हैं।
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पीसीसी में प्रेसवार्ता
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी और पूर्व मंत्री मुकेश नायक ने बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने शनिवार को पीसीसी में प्रेस वार्ता कर आरोप लगाया कि चित्रकूट में विकास और नमामि गंगे परियोजना के नाम पर दिए गए करोड़ों रुपए गलत तरीके से खर्च किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने चित्रकूट विकास प्राधिकरण को 750 करोड़ रुपए दिए थे, लेकिन इनका सही उपयोग नहीं हुआ।
सामुदायिक भवन अब नशेडिय़ों का अड्डा
मुकेश नायक ने बताया कि 37 करोड़ रुपए खर्च कर एक सामुदायिक भवन बनाया गया, ताकि वहां सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम हो सकें। लेकिन यह भवन ऐसी जगह बनाया गया जो संस्थान की जमीन से दूर है। अब वहां कोई कार्यक्रम नहीं होते, बल्कि वह जगह नशा करने वालों का अड्डा बन गई है।
आरोग्यधाम में चल रहे निजी क्लिनिक और बर्थडे पार्टी
नायक ने बताया कि चित्रकूट में 47 एकड़ में बने आरोग्यधाम को आयुर्वेद रिसर्च सेंटर के तौर पर तैयार किया गया था। लेकिन अब वहां एलोपैथिक डॉक्टर, मेडिकल स्टोर और निजी क्लिनिक चल रहे हैं। इतना ही नहीं, इसे एक रिसॉर्ट की तरह किराए पर दिया जा रहा है, जहां बर्थडे पार्टी जैसे निजी आयोजन हो रहे हैं।
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यह भी पढ़ें-भोपाल में युवक की हत्या, लाश को बॉक्स में भरकर डेम में फेंका, चार दिन बाद मिला शव
नदी सफाई के पैसे निजी संस्थान को दे दिए
मुकेश नायक ने बताया कि मंदाकिनी नदी की सफाई के लिए सरकार ने 37 करोड़ रुपए मंजूर किए थे। लेकिन इनमें से 30 करोड़ रुपए सीधे एक निजी संस्थान को दे दिए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार किसी निजी संस्थान की जमीन और सुविधाओं पर विकास प्राधिकरण का पैसा कैसे खर्च कर सकती है?
यह भी पढ़ें-बीयू में आज शुरू होगी यूटीडी के 10 से अधिक विभागों की काउंसलिंग, मेरिट के आधार पर मिलेगा प्रवेश
गोशाला बंद, फंड का गलत इस्तेमाल
मुकेश नायक ने यह भी कहा कि गोशाला के लिए मिले फंड का भी दुरुपयोग हुआ है। गोशाला बंद पड़ी है और वहां खाना-पीना चल रहा है। वहीं टाटा ट्रस्ट से मिले पैसे का बड़ा हिस्सा एलोपैथिक केंद्र पर खर्च हो चुका है। नायक ने कहा कि कमलनाथ सरकार ने रामपथ गंगा योजना के लिए 2000 करोड़ रुपए दिए थे, लेकिन इन पैसों का कोई हिसाब नहीं है। उन्होंने महाकाल लोक और ओंकारेश्वर लोक परियोजनाओं पर भी सवाल उठाए और कहा कि नमें लगी मूर्तियां मामूली हवा से भी गिर जाती हैं।
कांग्रेस ने सरकार रखी ये मांगे
1. नमामि गंगे योजना की सीबीआई जांच करवाई जाए।
2. सभी निजीकरण की गई संपत्तियों को जनहित में पुनः अधिग्रहित किया जाए।
3. मंदाकिनी के गंदे नालों को तत्काल रोका जाए और शुद्धिकरण प्लांट चालू हो।
4. ग्रामोदय विश्वविद्यालय की जमीन पर हो रहे कब्जे को रोका जाए।
5. रतन टाटा ट्रस्ट, राज्यसभा निधि और केंद्र अनुदान से हुए कार्यों की वित्तीय जांच हो।
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सामुदायिक भवन अब नशेडिय़ों का अड्डा
मुकेश नायक ने बताया कि 37 करोड़ रुपए खर्च कर एक सामुदायिक भवन बनाया गया, ताकि वहां सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम हो सकें। लेकिन यह भवन ऐसी जगह बनाया गया जो संस्थान की जमीन से दूर है। अब वहां कोई कार्यक्रम नहीं होते, बल्कि वह जगह नशा करने वालों का अड्डा बन गई है।
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आरोग्यधाम में चल रहे निजी क्लिनिक और बर्थडे पार्टी
नायक ने बताया कि चित्रकूट में 47 एकड़ में बने आरोग्यधाम को आयुर्वेद रिसर्च सेंटर के तौर पर तैयार किया गया था। लेकिन अब वहां एलोपैथिक डॉक्टर, मेडिकल स्टोर और निजी क्लिनिक चल रहे हैं। इतना ही नहीं, इसे एक रिसॉर्ट की तरह किराए पर दिया जा रहा है, जहां बर्थडे पार्टी जैसे निजी आयोजन हो रहे हैं।
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नदी सफाई के पैसे निजी संस्थान को दे दिए
मुकेश नायक ने बताया कि मंदाकिनी नदी की सफाई के लिए सरकार ने 37 करोड़ रुपए मंजूर किए थे। लेकिन इनमें से 30 करोड़ रुपए सीधे एक निजी संस्थान को दे दिए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार किसी निजी संस्थान की जमीन और सुविधाओं पर विकास प्राधिकरण का पैसा कैसे खर्च कर सकती है?
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गोशाला बंद, फंड का गलत इस्तेमाल
मुकेश नायक ने यह भी कहा कि गोशाला के लिए मिले फंड का भी दुरुपयोग हुआ है। गोशाला बंद पड़ी है और वहां खाना-पीना चल रहा है। वहीं टाटा ट्रस्ट से मिले पैसे का बड़ा हिस्सा एलोपैथिक केंद्र पर खर्च हो चुका है। नायक ने कहा कि कमलनाथ सरकार ने रामपथ गंगा योजना के लिए 2000 करोड़ रुपए दिए थे, लेकिन इन पैसों का कोई हिसाब नहीं है। उन्होंने महाकाल लोक और ओंकारेश्वर लोक परियोजनाओं पर भी सवाल उठाए और कहा कि नमें लगी मूर्तियां मामूली हवा से भी गिर जाती हैं।
कांग्रेस ने सरकार रखी ये मांगे
1. नमामि गंगे योजना की सीबीआई जांच करवाई जाए।
2. सभी निजीकरण की गई संपत्तियों को जनहित में पुनः अधिग्रहित किया जाए।
3. मंदाकिनी के गंदे नालों को तत्काल रोका जाए और शुद्धिकरण प्लांट चालू हो।
4. ग्रामोदय विश्वविद्यालय की जमीन पर हो रहे कब्जे को रोका जाए।
5. रतन टाटा ट्रस्ट, राज्यसभा निधि और केंद्र अनुदान से हुए कार्यों की वित्तीय जांच हो।
