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Bhopal: भारत में बड़ी संख्या में अवैध और असुरक्षित हो रहे गर्भपात, सीएमई ने कही ये बात
Sat, 04 May 2024 10:14 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: अरविंद कुमार
Updated Sat, 04 May 2024 10:14 PM IST
सार
भारत में बड़ी संख्या में अवैध और असुरक्षित गर्भपात हो रहे हैं। एमटीपी से संबंधित मेडिकोलीगल और नैतिक विचार के बारे में जागरुकता पैदा करना है।
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सीएमई ने की बैठक
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
एआईआईएमएस भोपाल के डायरेक्टर डॉ. अजय सिंह ने कहा है कि असुरक्षित गर्भपात आज गर्भावस्था संबंधी मृत्यु का सबसे बड़ा कारण बन गया है। एमटीपी अधिनियम 1971 और एमटीपी संशोधन विधेयक 2020 के अधिनियमन के बावजूद, भारत में बड़ी संख्या में अवैध और असुरक्षित गर्भपात हो रहे हैं।
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दरअसल, एम्स भोपाल में शनिवार को चिकित्सकीय गर्भपात और उसके मेडिकोलीगल निहितार्थ विषय पर सीएमई का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डॉ. जय सिंह ने कहा कि यह आवश्यक हो जाता है कि न केवल स्त्री रोग विशेषज्ञ और प्रसूति रोग विशेषज्ञ, बल्कि पंजीकृत चिकित्सकों, छात्रों सहित चिकित्सा क्षेत्र के सभी लोगों को इस क्षेत्र में पर्याप्त ज्ञान होना चाहिए। प्रोफेसर सिंह ने कहा कि अधिकांश मेडिकोलीगल मामले सहमति के मुद्दों, आपातकालीन सेवाओं, चिकित्सा रिकॉर्ड, कदाचार और लापरवाही से संबंधित हैं। लिखित सहमति, रोगी और उसके परिवार के साथ प्रभावी बातचीत, उचित डेटा रिकॉर्डिंग, उचित जोखिम प्रबंधन से इनसे आसानी से बचा जा सकता है।
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मेडिकोलीगल और नैतिक विचार के बारे में जागरुकता
स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की प्रमुख डॉ. के पुष्पलता ने सीएमई के आयोजन के उद्देश्यों की चर्चा करते हुए कहा कि इस सीएमई का उद्देश्य क्षेत्र में काम करने वाले पंजीकृत चिकित्सा चिकित्सकों, छात्रों, नर्सों, मेडिकोसोशल कार्यकर्ताओं के बीच एमटीपी से संबंधित मेडिकोलीगल और नैतिक विचार के बारे में जागरुकता पैदा करना है। सीएमई में भोपाल जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रभाकर तिवारी ने इस प्रकार की कार्यशाला के महत्व को बताते हुए ऐसी और कार्यशालाएं आयोजित करने पर जोर दिया।
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डॉ. रजनीश जोशी, डीन (एकेडेमिक्स) ने आशा व्यक्त की कि इस कार्यशाला से प्रतिभागियों को बहुत कुछ सीखने का मौका मिलेगा। अहमदाबाद से आये अतिथि वक्ता, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ एवं मेडिकोलीगल एक्सपर्ट डॉ. एमसी पटेल ने एमटीपी एक्ट में हुए संशोधनों पर जबकि "चिकित्सा पद्धति में आपराधिक लापरवाही" विषय पर डॉ. गीतेंद्र शर्मा ने प्रतिभागियों के साथ विस्तार से चर्चा की और उनके सवालों के उत्तर भी दिए।
