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सिर्फ दवा खाने से ठीक नहीं होती बीमारी,सही तरीका और पूरा कोर्स जरूरी, आंगनवाड़ी केंद्र पहुंची एम्स टीम
Sun, 18 May 2025 07:26 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Sun, 18 May 2025 07:26 PM IST
सार
एम्स भोपाल के आसपास ग्रामीण इलाकों में भी टीम को भेज कर लोगों को बीमारियों के प्रति जागरूक कर रहा है। रविवार को विशेषज्ञों ने शहर के बकानिया स्थित आंगनवाड़ी केंद्र में फार्माकोविजिलेंस (दवाओं के दुष्प्रभावों की निगरानी) अभियान के तहत पहुंची।
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आंगनवाड़ी केंद्र में एम्स की टीम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजधानी भोपाल स्थित एम्स में मरीजों के बेहतर इलाज के लिए कई प्रयोग किया जा रहे हैं। वहीं एम्स भोपाल के आसपास ग्रामीण इलाकों में भी टीम को भेज कर लोगों को बीमारियों के प्रति जागरूक कर रहा है। रविवार को विशेषज्ञों ने शहर के बकानिया स्थित आंगनवाड़ी केंद्र में फार्माकोविजिलेंस (दवाओं के दुष्प्रभावों की निगरानी) अभियान के तहत पहुंची। इस दौरान विशेषज्ञ डॉक्टरों ने कहा कि सिर्फ दवा खाने से बीमारी ठीक नहीं होती, उसे सही तरीके से, समय पर लेने और कोर्स पूरा करना बेहद जरूरी है।
टीबी के इलाज और उसके महत्व की दी जानकारी
इस दौरान मौजूद लोगों को टीबी के इलाज और उसके महत्व के बारे में भी जागरूक किया गया। एम्स के निदेशक डॉ. अजय सिंह के मुताबिक यह कार्यक्रम खासकर स्थानीय महिलाओं के लिए आयोजित किया गया था, जिसे फार्माकोलॉजी विभाग और सामुदायिक चिकित्सा विभाग ने मिलकर संचालित किया।
यह भी पढ़ें-रेलवे टिकट पर ऑपरेशन सिंदूर का प्रचार, PM के फोटो पर आपत्ति, कांग्रेस बोली सेना के शौर्य से सौदेबाजी
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डीओटी थेरेपी के असर का रिकॉर्ड रखना जरूरी
विशेषज्ञों ने बताया कि दवाओं के दुष्प्रभावों को समय पर रिपोर्ट करना और टीबी मरीजों पर डीओटी (डायरेक्टली ऑब्जर्व्ड ट्रीटमेंट) थेरेपी के असर का रिकॉर्ड रखना जरूरी है। डॉ. रोमा रस्तोगी ने कहा कि टीबी की तरह ही सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर की भी समय पर जांच और इलाज आवश्यक है। वहीं, डॉ. मोनालिसा दत्ता ने बताया कि दवाओं के साइड इफेक्ट्स को नजरअंदाज करने से बड़ी जटिलताएं हो सकती हैं।
यह भी पढ़ें-सीएम डॉ. यादव बोले-कर्मचारियों की कर्तव्यनिष्ठा से ही प्रदेश बना अग्रणी राज्य
बीच में दावा छोड़ने पर इलाज हो जाता है कठिन
कार्यक्रम में बताया गया कि अगर टीबी मरीज बीच में दवा लेना छोड़ देता है, तो उसका इलाज अधूरा रह जाता है और दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता (ड्रग रेजिस्टेंस) विकसित हो सकती है। इससे इलाज कठिन हो जाता है और संक्रमण दूसरों तक भी फैल सकता है।
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टीबी के इलाज और उसके महत्व की दी जानकारी
इस दौरान मौजूद लोगों को टीबी के इलाज और उसके महत्व के बारे में भी जागरूक किया गया। एम्स के निदेशक डॉ. अजय सिंह के मुताबिक यह कार्यक्रम खासकर स्थानीय महिलाओं के लिए आयोजित किया गया था, जिसे फार्माकोलॉजी विभाग और सामुदायिक चिकित्सा विभाग ने मिलकर संचालित किया।
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डीओटी थेरेपी के असर का रिकॉर्ड रखना जरूरी
विशेषज्ञों ने बताया कि दवाओं के दुष्प्रभावों को समय पर रिपोर्ट करना और टीबी मरीजों पर डीओटी (डायरेक्टली ऑब्जर्व्ड ट्रीटमेंट) थेरेपी के असर का रिकॉर्ड रखना जरूरी है। डॉ. रोमा रस्तोगी ने कहा कि टीबी की तरह ही सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर की भी समय पर जांच और इलाज आवश्यक है। वहीं, डॉ. मोनालिसा दत्ता ने बताया कि दवाओं के साइड इफेक्ट्स को नजरअंदाज करने से बड़ी जटिलताएं हो सकती हैं।
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बीच में दावा छोड़ने पर इलाज हो जाता है कठिन
कार्यक्रम में बताया गया कि अगर टीबी मरीज बीच में दवा लेना छोड़ देता है, तो उसका इलाज अधूरा रह जाता है और दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता (ड्रग रेजिस्टेंस) विकसित हो सकती है। इससे इलाज कठिन हो जाता है और संक्रमण दूसरों तक भी फैल सकता है।
