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Bhopal: दिग्विजय कल कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भोपाल में दिखाएंगे फिल्म फुले,जीतू पटवारी,उमंग सिंघार होंगे शामिल
Mon, 12 May 2025 09:25 AM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Mon, 12 May 2025 09:25 AM IST
सार
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले के जीवन और विचारों पर बनी फिल्म "फुले" की स्पेशल स्क्रीनिंग रखी है। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष सिंघार सहित अन्य कांग्रेस नेता व पार्टी कार्यकर्ता यहां फिल्म देखेंगे।
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पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले के जीवन और विचारों पर बनी फिल्म "फुले" की स्पेशल स्क्रीनिंग रखी है। इसका आयोजन 13 मई का भोपाल के डीबी मॉल स्थित सिनेप्लेक्स में किया जाएगा। दिग्विजय सिंह के अलावा पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित अन्य कांग्रेस नेता व पार्टी कार्यकर्ता यहां फिल्म देखेंगे।
कार्यकर्ताओं को फुले के संघर्ष से रूबरू कराना
इस आयोजन का उद्देश्य पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को फुले के समतावादी विचारों और सामाजिक न्याय के संघर्ष से रूबरू कराना है। दिग्विजय सिंह की इस पहल को सामाजिक परिवर्तन के पुरोधा फुले को वर्तमान राजनीतिक संदर्भ में पुनः स्थापित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। इस आयोजन को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह है।
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फुले जैसे विचारकों को याद करना जरूरी
कार्यक्रम को लेकर दिग्विजय सिंह ने कहा कि महात्मा फुले ने उस दौर में समानता, शिक्षा और जातिविहीन समाज का सपना देखा था जब ऐसी बातें सोच पाना भी कठिन था। आज जब समाज में विभाजनकारी शक्तियां सक्रिय हैं, फुले जैसे विचारकों को याद करना और उनकी प्रेरणा लेना पहले से कहीं ज्यादा ज़रूरी है।
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फुले के जीवन संघर्षों पर बनी है यह फिल्म
जनकारी के लिए बता दें कि कि यह फिल्म महात्मा फुले के जीवन संघर्ष, शिक्षा आंदोलन और जातिवादी व्यवस्था के खिलाफ उनके आंदोलन को प्रभावशाली ढंग से दर्शाती है। फिल्म में दिखाया गया है कि महात्मा ज्योतिबा फुले ने किस तरह समाज के खिलाफ जाकर पहले अपनी पत्नी को पढ़ाया और फिर समाज की लड़कियों को पढ़ाना शुरू किया। ये सब उस दौर में हुआ जब लड़कियों को पढ़ाना पाप माना जाता था। जब हमारे समाज में बाल विवाह, विधवा का मुंडन कर देना और छुआछूत जैसी कुप्रथाएं जिंदा थी। समाज के एक बड़े तबके के विरोध के बावजूद उन्होंने ये कैसे किया। यही इस फिल्म की कहानी है।
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कार्यकर्ताओं को फुले के संघर्ष से रूबरू कराना
इस आयोजन का उद्देश्य पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को फुले के समतावादी विचारों और सामाजिक न्याय के संघर्ष से रूबरू कराना है। दिग्विजय सिंह की इस पहल को सामाजिक परिवर्तन के पुरोधा फुले को वर्तमान राजनीतिक संदर्भ में पुनः स्थापित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। इस आयोजन को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह है।
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फुले जैसे विचारकों को याद करना जरूरी
कार्यक्रम को लेकर दिग्विजय सिंह ने कहा कि महात्मा फुले ने उस दौर में समानता, शिक्षा और जातिविहीन समाज का सपना देखा था जब ऐसी बातें सोच पाना भी कठिन था। आज जब समाज में विभाजनकारी शक्तियां सक्रिय हैं, फुले जैसे विचारकों को याद करना और उनकी प्रेरणा लेना पहले से कहीं ज्यादा ज़रूरी है।
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फुले के जीवन संघर्षों पर बनी है यह फिल्म
जनकारी के लिए बता दें कि कि यह फिल्म महात्मा फुले के जीवन संघर्ष, शिक्षा आंदोलन और जातिवादी व्यवस्था के खिलाफ उनके आंदोलन को प्रभावशाली ढंग से दर्शाती है। फिल्म में दिखाया गया है कि महात्मा ज्योतिबा फुले ने किस तरह समाज के खिलाफ जाकर पहले अपनी पत्नी को पढ़ाया और फिर समाज की लड़कियों को पढ़ाना शुरू किया। ये सब उस दौर में हुआ जब लड़कियों को पढ़ाना पाप माना जाता था। जब हमारे समाज में बाल विवाह, विधवा का मुंडन कर देना और छुआछूत जैसी कुप्रथाएं जिंदा थी। समाज के एक बड़े तबके के विरोध के बावजूद उन्होंने ये कैसे किया। यही इस फिल्म की कहानी है।
