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भोपाल: वैक्सीन ट्रायल के दौरान हुई थी शख्स की मौत, विसरा रिपोर्ट में भी नहीं साफ हुई वजह
Thu, 04 Feb 2021 01:12 AM IST
देव कश्यप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: देव कश्यप
Updated Thu, 04 Feb 2021 01:12 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : PTI
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में भारत बायोटेक की कोरोना वैक्सीन 'कोवाक्सीन' के ट्रायल के दौरान टीका लगवाने वाले 45 वर्षीय वालंटियर दीपक मरावी की मौत हो गई थी। मौत के करीब डेढ़ महीने बीत जाने के बाद बुधवार को उनकी विसरा रिपोर्ट आई है। रिपोर्ट में एथिल अल्कोहल और ओमेप्रोजोल का उल्लेख किया गया है, कोई अन्य जहरीला केमिकल नहीं पाया गया है। हालांकि, इससे पहले भी जहर के कारण मौत को खारिज कर दिया गया था।
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दीपक मरावी की मृत्यु के बाद भारत बायोटेक ने एक बयान में दावा किया था कि 'गंभीर प्रतिकूल प्रतिक्रिया' की पूरी तरह से जांच की गई थी और पाया गया कि उनकी मौत 'टीका या प्लेसिबो से संबंधित नहीं है।'
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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दीपक मरावी की मौत के मामले में विसरा रिपोर्ट में दो बातें सामने आई हैं, एथिल एल्कोहल और ओमेप्राजोल। फॉर्मोकोलॉजी विभाग के प्रमुख अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि ओमेप्राजोल एसिडिटी की दवा है। ये मौत का कारण नहीं बन सकती। मालूम हो कि अरुण श्रीवास्तव सरकारी फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के भी प्रमुख थे, जिसने दीपक मरावी की मौत के मामले में प्रोटोकॉल के पालन की जांच की थी।
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डॉक्टर श्रीवास्तव ने कहा, 'शराब के अत्यधिक सेवन के कारण होने वाली मौतों से इनकार नहीं किया जा सकता है, लेकिन इसकी पुष्टि विसरा रिपोर्ट के निष्कर्षों की जांच के बाद ही की जा सकती है।' उन्होंने इस संभावना से भी इनकार नहीं किया कि मारवी ने ओमेप्राजोल का सेवन खुद किया हो, क्योंकि गैस्ट्रिक से संबंधित समस्याओं के लिए ये दवा आसानी से मिल जाती है।
हालांकि, मरावी के परिवार के सदस्यों ने कहा कि दीपक ने 21 नवंबर को मरने से पहले या उससे पहले शराब का सेवन नहीं किया था। उन्होंने कहा कि 'उसके शराब का सेवन करने का कोई सवाल ही नहीं है, वह तीन दिनों से बीमार था और घर से बाहर भी नहीं निकला था।
उधर, पुलिस ने अभी तक कोई मामला दर्ज नहीं किया है, लेकिन जांच जारी है। भोपाल के पुलिस उप महानिरीक्षक इरशाद वली के मुताबिक, 'हम पुख्ता तौर पर नहीं कह सकते लेकिन रिपोर्ट में एथिल अल्कोहल और ओमेप्राजोल का नाम आया है। एक्सपर्ट से पूछ रहे हैं कि इन दोनों का मिश्रण जहरीला कैसे हो सकता है, जिससे किसी की मौत हो जाए। हमें एफएसएल रिपोर्ट मिल गई है हम जांच कर रहे हैं।'
गौरतलब है कि 45 वर्षीय दीपक मरावी को भारत बायोटेक और मेडिकल काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) द्वारा संयुक्त रूप से किए जा रहे तीसरे चरण के ह्यूमन ट्रायल के तहत 'कोवाक्सीन' की पहली खुराक 12 दिसंबर को दी गई थी, लेकिन उसके नौ दिन बाद 21 दिसंबर को रहस्यमय परिस्थितियों में दीपक मौत हो गई थी। 21 दिसंबर को जहर के कारण मौत की वजह को खारिज कर दिया गया था क्योंकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसका कारण संदिग्ध था। लेकिन अब विसरा रिपोर्ट से भी तस्वीर साफ नहीं हो पाई है।
दीपक मरावी मजदूरी करते थे और टीला जमालपुरा की सूबेदार कॉलोनी में किराये के इसी एक कमरे में तीन बच्चों के साथ रहते थे। दीपक ने कोरोना वैक्सीन ट्रायल में हिस्सा लिया था। पहले डोज के बाद ही तबीयत खराब हो गई और अस्पताल पहुंचने से पहले दीपक की मौत हो गई। दीपक अपने घर में मृत मिले थे। 22 दिसंबर को उनके शव का पोस्टमार्टम कराया गया, जिसकी प्रारंभिक रिपोर्ट में शव में जहर मिलने की पुष्टि हुई थी।
