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Bhopal: BMHRC में कैंसर से जूझ रही बुजुर्ग महिला का बनाया नया मूत्राशय,चिकित्सकों ने 6 घंटे में की जटिल सर्जरी
Sat, 14 Dec 2024 06:34 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Sat, 14 Dec 2024 06:34 PM IST
सार
बीएमएचआरसी के डॉक्टरों ने मूत्राशय के कैंसर से जूझ रही 60 वर्षीय गैस पीड़ित महिला की जटिल सर्जरी की है। कैंसर की वजह से खराब हो चुके हो चुके मूत्राशय को निकालकर एक नया मूत्राशय बनाया और बहुत कम समय में यह सर्जरी पूरी की।
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सर्जरी करते बीएएचआरसी के चिकित्सक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (बीएमएचआरसी) के डॉक्टरों ने मूत्राशय के कैंसर से जूझ रही एक 60 वर्षीय गैस पीड़ित महिला की जटिल सर्जरी की है। कैंसर की वजह से खराब हो चुके हो चुके मूत्राशय को निकालकर एक नया मूत्राशय बनाया और बहुत कम समय में यह सर्जरी पूरी की। मरीज की हालत में अब सुधार है और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे गई है।
पूरे मूत्राशय में फैल गया था कैंसर
बीएमएचआरसी के यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ शारिक उल हसन ने बताया कि यह महिला बीते 6 महीनों से मूत्राशय के कैंसर से पीड़ित थी। कैंसर उनके पूरे मूत्राशय में फैल गया था, जिसकी वजह से यूरिन में बार-बार खून आ रहा था। उनका हीमोग्लोबिन काफी कम कितना कम हो गया था। किडनी में भी सूजन आ गई थी। सर्जरी ही एकमात्र उपाय था। कैंसर के फैल जाने के कारण मूत्राशय को निकालने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था, लेकिन ऐसा करने पर नया मूत्राशय बनाना आवश्यक था। कैंसर सर्जरी विभाग में सहायक प्रोफेसर डॉ सोनवीर गौतम ने बताया कि हमने छोटी आंत के एक हिस्से को काटकर उसका मूत्राशय बनाया। किडनी से यूरिन को मूत्राशय तक लाने वाले यूरेटर्स को नए मूत्राशय से जोड़कर सर्जरी पूरी की। अब मरीज को मूत्राशय के द्वार पर स्टोमा बैग लगाना होता है, ताकि शरीर से निकलने वाला यूरिन उसमें इकट्ठा हो सके।
भोपाल के गिनेचुने अस्पतालों में ही होती सर्जरी
डॉ गौतम ने बताया कि इस पूरे सर्जरी को Ileal Conduit कहा जाता है। हमने यह सर्जरी मात्र 6 घंटे में पूरी कर ली। सर्जरी के बाद मरीज अब मरीज कीमोथैरेपी और रेडियोथैरेपी करवा सकेंगी। उन्होंने कहा कि यह एक बहुत जटिल सर्जरी है और भोपाल के गिनेचुने अस्पतालों में ही होती है। एनेस्थीशियोलॉजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ संध्या इवने ने बताया कि सर्जरी में लगने वाला वक्त मरीज की रिकवरी में अहम भूमिका निभाता है। अगर मरीज को आॅपरेशन के लिए अधिक समय तक बेहोश रखा जाता है तो उसे वापस होश में आने भी काफी वक्त लगता है। उसे अधिक समय तक वेंटिलेटर पर रखना पड़ता है, जिससे जटिलताओं की आशंका बढ़ जाती है।
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मरीज के बेहतरीन इलाज पर फोकस
बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक, डॉ मनीषा श्रीवास्तव ने कहा है कि इस सर्जरी ने एक बार फिर यह प्रमाणित किया है कि बीएमएचआरसी अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीकों और समर्पित विशेषज्ञ डॉक्टरों की बदौलत गंभीर से गंभीर बीमारियों का सफल इलाज करने में सक्षम है। हमारी प्राथमिकता मरीजों को न केवल राहत प्रदान करना है, बल्कि उनके जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना भी है। यह उपलब्धि हमारी टीम की कड़ी मेहनत और उनके उत्कृष्ट कौशल का परिणाम है। बीएमएचआरसी यह सुनिश्चित करता रहेगा कि हर मरीज को सर्वश्रेष्ठ और आधुनिक चिकित्सा सेवाएं मिलें।
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पूरे मूत्राशय में फैल गया था कैंसर
बीएमएचआरसी के यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ शारिक उल हसन ने बताया कि यह महिला बीते 6 महीनों से मूत्राशय के कैंसर से पीड़ित थी। कैंसर उनके पूरे मूत्राशय में फैल गया था, जिसकी वजह से यूरिन में बार-बार खून आ रहा था। उनका हीमोग्लोबिन काफी कम कितना कम हो गया था। किडनी में भी सूजन आ गई थी। सर्जरी ही एकमात्र उपाय था। कैंसर के फैल जाने के कारण मूत्राशय को निकालने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था, लेकिन ऐसा करने पर नया मूत्राशय बनाना आवश्यक था। कैंसर सर्जरी विभाग में सहायक प्रोफेसर डॉ सोनवीर गौतम ने बताया कि हमने छोटी आंत के एक हिस्से को काटकर उसका मूत्राशय बनाया। किडनी से यूरिन को मूत्राशय तक लाने वाले यूरेटर्स को नए मूत्राशय से जोड़कर सर्जरी पूरी की। अब मरीज को मूत्राशय के द्वार पर स्टोमा बैग लगाना होता है, ताकि शरीर से निकलने वाला यूरिन उसमें इकट्ठा हो सके।
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भोपाल के गिनेचुने अस्पतालों में ही होती सर्जरी
डॉ गौतम ने बताया कि इस पूरे सर्जरी को Ileal Conduit कहा जाता है। हमने यह सर्जरी मात्र 6 घंटे में पूरी कर ली। सर्जरी के बाद मरीज अब मरीज कीमोथैरेपी और रेडियोथैरेपी करवा सकेंगी। उन्होंने कहा कि यह एक बहुत जटिल सर्जरी है और भोपाल के गिनेचुने अस्पतालों में ही होती है। एनेस्थीशियोलॉजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ संध्या इवने ने बताया कि सर्जरी में लगने वाला वक्त मरीज की रिकवरी में अहम भूमिका निभाता है। अगर मरीज को आॅपरेशन के लिए अधिक समय तक बेहोश रखा जाता है तो उसे वापस होश में आने भी काफी वक्त लगता है। उसे अधिक समय तक वेंटिलेटर पर रखना पड़ता है, जिससे जटिलताओं की आशंका बढ़ जाती है।
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मरीज के बेहतरीन इलाज पर फोकस
बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक, डॉ मनीषा श्रीवास्तव ने कहा है कि इस सर्जरी ने एक बार फिर यह प्रमाणित किया है कि बीएमएचआरसी अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीकों और समर्पित विशेषज्ञ डॉक्टरों की बदौलत गंभीर से गंभीर बीमारियों का सफल इलाज करने में सक्षम है। हमारी प्राथमिकता मरीजों को न केवल राहत प्रदान करना है, बल्कि उनके जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना भी है। यह उपलब्धि हमारी टीम की कड़ी मेहनत और उनके उत्कृष्ट कौशल का परिणाम है। बीएमएचआरसी यह सुनिश्चित करता रहेगा कि हर मरीज को सर्वश्रेष्ठ और आधुनिक चिकित्सा सेवाएं मिलें।
