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बाबा रामदेव को झटका, नहीं मिली आयुर्वेदिक दवाओं के क्लिनिकल ट्रायल की अनुमति

Sun, 24 May 2020 10:25 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Sneha Baluni Updated Sun, 24 May 2020 10:25 AM IST
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Baba ramdev company patanjali did not permission of clinical trial of his ayurvedic medicine
बाबा रामदेव (फाइल फोटो)

योग गुरू बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि को इंदौर में बड़ा झटका लगा है। उनकी कंपनी ने कोरोना मरीजों पर आयुर्वेदिक दवाओं के क्लिनिकल ट्रायल (नैदानिक परीक्षण) की इजाजत मांगी थी। कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि बाबा को क्लिनिकल ट्रायल के लिए जिलाधिकारी ने अनुमति दे दी है और इंदौर में भर्ती मरीजों को ये आयुर्वेदिक दवाई दी जाएगी।

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जैसे ही रामदेव को अनुमति देने की खबर आई, ड्रग ट्रायल पर विवाद शुरू हो गया। कई संगठनों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। इसके बाद इंदौर के जिलाधिकारी मनीष सिंह ने इसपर सफाई दी है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज से प्राप्त आवेदन में मरीजों को काढ़े की तरह दवा देने की बात कही गई थी।
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डीन का दावा है अलग
स्थानीय अखबार से बात करते हुए मेडिकल कॉलेज की डीन डॉक्टर ज्योति बिंदल ने कहा है कि आवेदन में ड्रग कोरोना मरीज को देने और परिणाम परीक्षण करने की बात लिखी थी इसलिए आवेदन प्रमुख सचिव को भेजा गया था। वहीं बाबा की कंपनी का दावा है कि दवा को जयपुर में कुछ मरीजों पर परखा गया है। 
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क्या है पूरा मामला
पतंजलि ने पिछले दिनों आयुर्वेदिक काढ़े को लेकर दिशा-निर्देश जारी होने के बाद दवा बनाने का दावा किया था। कंपनी ने इंदौर में आवेदन देकर कहा था कि हम यहां मरीजों को दवा देकर परिणाम देखना चाहते हैं। कंपनी ने यह दवा अश्वगंधा से बनाई है। कहा जा रहा है कि कंपनी की मांग पर जिलाधिकारी ने इसकी इजाजत दी थी। हालांकि विवाद होने पर इसे रद्द कर दिया गया।


जिलाधिकारी ने दी सफाई
मामले पर विवाद बढ़ने पर जिलाधिकारी ने एक स्थानीय अखबार से बात करते हुए कहा कि प्रशासन ने दवा के क्लिनिकल ट्रायल की इजाजत नहीं दी है। आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक दवाइयों के क्लीनिकल ट्रायल नहीं होते हैं। उसके लिए प्रोटोकॉल और प्रक्रिया अलग है।

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