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Ashoknagar: सामाजिक कार्यक्रम में शामिल हुए सिंधिया, कहा- 21वीं सदी में आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया जा सकता

Sat, 01 Jul 2023 08:20 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अशोकनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अशोकनगर Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Sat, 01 Jul 2023 08:20 AM IST
सार

मंत्री सिंधिया ने कहा गया कि केवट समाज का वर्णन रामायण से लेकर आज तक किया गया है। साथ ही सिंधिया परिवार का साथ देने के लिए उनका काफी योगदान होना बताया है। इस मौके पर केवट समाज के लोगों द्वारा सिंधिया का जगह-जगह फूल मालाओं से स्वागत किया गया।

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Ashoknagar: Scindia participated in the social program, said- self-respect cannot be compromised
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्रीय उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया शुक्रवार को अलग-अलग समाज के सम्मेलन में शामिल हुए। सिंधिया शुक्रवार को सबसे पहले ईसागढ़ के केवट समाज के सम्मेलन में शामिल हुए। इसके बाद अशोकनगर में कुशवाह समाज सम्मेलन में शामिल और कारबवही रघुवंशी समाज के सम्मेलन में भी शामिल हुए। मुंगावली तहसील के मोला डेम के पास नायक समाज सम्मेलन में भी उन्होंने शिरकत की। 
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केवट समाज के सम्मेलन में सम्मिलित होने पर मंत्री सिंधिया ने कहा गया कि, केवट समाज का वर्णन रामायण से लेकर आज तक किया गया है। साथ ही सिंधिया परिवार का साथ देने के लिए उनका काफी योगदान होना बताया है। इस मौके पर केवट समाज के लोगों द्वारा सिंधिया का जगह-जगह फूल मालाओं से स्वागत किया गया।
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कुशवाहा समाज का रामायण काल से वर्णन है, महाभारत काल से वर्णन है। कुशवाहा समाज के पूर्वज ज्योतिबा फुले हैं मेरा और कुशवाहा समाज का संबंध बरसों पुराना है, क्योंकि ज्योतिबा फुले भी महाराष्ट्र से हैं सिंधिया परिवार भी महाराष्ट्र से है। उन्होंने अपने नामकरण किए जाने में ज्योतिबा फुले के नाम के आगे ज्योति शब्द जोड़कर मेरा नाम ज्योतिरादित्य रखा गया है, मेरा नाम आदित्य रखा जा रहा था ,तो वहीं, ज्योतिबा फुले का ज्योति और आदित्य मिलकर मेरा नाम ज्योतिरादित्य रखा गया है, सिंधिया ने कहा कि जब मेरा नामकरण किया जा रहा था तब राजमाता एवं बड़े महाराज  ने नाम रखा था।
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वहीं, कुशवाह समाज सम्मेलन में सिंधिया ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि इस कार्यक्रम में महापुरुषों की तस्वीर नहीं लगाई गई है, जबकि सभी समाजों ने कई बातें समाज पर की है, महात्मा ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले कुशवाहा समाज के पूर्वज हैं। आने वाली पीढ़ी को उनके पद चिन्हों पर चलने की प्रेरणा मिलेगी

वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया रघुवंशी समाज के सम्मेलन में शामिल हुए। रघुवंशी समाज के युवा अध्यक्ष को सिंधिया ने आने वाले विधानसभा चुनाव में चंदेरी से टिकट दिए जाने की बात कही।  उन्होंने कहा कि रघुवंशी समाज को अभी तक उपेक्षित किया जाता रहा है, तो वहीं, कहा कि रघुवंशी समाज को ओबीसी समाज में शामिल होने के लिए दर्जा मिलना चाहिए, जिसका पुरजोर समर्थन जिला जनपद अध्यक्ष जगन्नाथ सिंह रघुवंशी के द्वारा भी किया गया और भरोसा दिलाया गया कि रघुवंशी समाज गुना अशोकनगर में भाजपा पार्टी को जीत दिलाने में भरपूर सहयोग करेगा।

रघुवंशी समाज के बारे में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने वर्णन करते हुए बताया कि 20 साल की जन सेवा के इतिहास में, मैंने सदैव यही कोशिश की है कि मेरे ग्वालियर चंबल संभाग में यह एक तरह का फूल नहीं होना चाहिए, फूलों की माला में कई प्रकार की खुशबू और रंग होना चाहिए। चाहे किसी भी वर्ग या समाज से व्यक्ति से हो तभी हमारा देश उत्कृष्ट होगा, जब सभी समाज के लोगों को आगे रखेंगे। जगन्नाथ सिंह रघुवंशी जिला पंचायत अध्यक्ष बने हैं वह खरे व्यक्ति हैं। वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया के द्वारा रघुवंशी समाज सम्मेलन में कहा गया कि राजनीति में छुरी वाले बहुत लोग हैं, मैं उस व्यक्ति का नाम नहीं लूंगा। उस चुनाव में हम चप्पे चप्पे में घूमे थे, उन्होंने कहा कि मुझे गर्व है, राजनीति में छुरी वाले लोग बहुत होते हैं आगे से मीठा और पीछे से छुरी चलाते है इस दौरान उन्होंने इशारा करते हुए कहा कि सबसे ज्यादा छुरी वाले लोग कहां है, मुझे कहने की जरूरत नहीं है, चुनाव आने वाला है यहां पर कई प्रकार के प्रवासी आएंगे। जिन लोगों के चेहरे अपने पांच साल में देखे नहीं हैं। वह आयेंगे और प्रचार करेंगे जैसे आपके साथ 50 साल पुराना संबंध है, मैंने अशोकनगर को विकास का लक्ष्य माना है मेरे पिता ने ओवर ब्रिज बना कर दिया था, तो पुत्र ने अंडर ब्रिज बना कर दिया है, जो कई लोगों के द्वारा कहा गया था कि असंभव है। सिंधिया ने आगे कहा कि समाज के व्यक्ति की लड़ाई टिकट की नहीं होनी चाहिए, सबसे उत्कृष्ट व्यक्ति की होनी चाहिए। सिंधिया परिवार अगर किसी व्यक्ति को रणभूमि में उतारता है तो सिंधिया परिवार का मुखिया उसके साथ ढाल बनकर, तलवार बनकर खड़ा रहता है। रघुवंशी समाज के एक व्यक्ति को रणभूमि उतरा था।

सिंधिया ने कहा कि 2003 में सड़कों की क्या हालत थी ,यह सब लोग अच्छी तरह से जानते हैं। गुना से अशोकनगर तक आने में 3 घंटे का समय लगता था, सिंधिया के द्वारा 2003 को कोड वर्ड बनाए जाने की बात कही कि, यह अब हमारी जीत के लिए 2003 कोड वर्ड होगा। यहां छोटे भाई या बड़े भाई एक ही बात याद रखना 2003 उस वक्त क्या हाल थे। 2003 हमारा आज से कोड वर्ड है, उस समय हमारे मध्यप्रदेश की सड़क नहीं थी। मिट्टी के तेल से रोशनी जलाकर बच्चें पढ़ा करते थे, क्या अब ऐसा मध्यप्रदेश स्थापित करना चाहते हैं, आप लोग हमारे और प्रधानमंत्री के साथ जुड़े प्रधानमंत्री देश के झंडे को विश्व में ऊंचा करने का प्रयत्न कर रहे हैं, दूसरी तरफ भगवान राम के सपने को साकार कर रहे हैं। आप लोगों को विश्वास दिलाना चाहता हूं की रघुवंशी समाज की प्रगति और विकास की जिम्मेदारी हर तरह से सिंधिया की होगी।

मुंगावली तहसील के नायक समाज के सम्मेलन में भी वे शामिल हुए, जिसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा समाज का महत्व बताते हुए कहा कि मैं अपने आप को गर्वशाली महसूस करता हूं। नायक समाज के महत्वपूर्ण योगदान के बारे में बताया, जिसमें नायक समाज के नेताओं द्वारा कहा गया कि, पारिवारिक संबंध रहा है, बंजारा परिवार का सिंधिया परिवार के साथ आप सब लोग इसे सर्वोचित क्षेत्र में पिछले 300 से 400 वर्षों से अपना पूर्ण रूप से जीवन व्यतीत कर रहे हो और सिंधिया परिवार की कई पीढ़ियों ने कंधे से कंधे मिलाकर केवल कार्य नहीं किया, लेकिन जब जब बंजारा समाज के ऊपर अन्याय हुआ है तब सिंधिया परिवार खड़ा रहा है।

सिंधिया ने कहा कि बाबूलाल जी कह रहे थे  कि हमने अंग्रेज हुकूमत के समय में हमारे समाज को एक गुनहगार श्रेणी में डालने की कोशिश की। उस समय में महात्री महाराज जिन्होंने जंग अंग्रेज़ों के खिलाफ़ छेड़ी थी, बंजारा समाज का झंडा लेकर उनके लिए न्याय करने के लिए पूर्ण रूप से महात्रि महाराज ने लड़ाई लड़ी थी, यह बंजारा समाज का बहुत गौरांवित इतिहास है, जो व्यापार करने के लिए भी अगर भारत में नींव किसी ने रखी।


सिंधिया ने कहा कि यह अतिशयोक्ति नहीं होगी और अगर मैं कहूं तो यह हमारे बंजारा समाज ने ही रखी है, एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में व्यापार कैसे करना है और उसी के साथ जब समय आए तो निर्भीक होकर निडरता के साथ दुश्मन का सामना करना और इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण समाज का मैं देना चाहता हूं। बाबा लखबीर शाह बंजारा जिन्होंने मुगल सम्राटों का सामना किया गुरु तेज बहादुर सिंह के बलिदान वीरता बंजारा समाज की देखने को मिली, जब लखबीर शाह जी ने अपने  पुत्रों का बलिदान कर दिया, लेकिन गुरू तेज बहादुर सिंह जी का अंतिम संस्कार अपनी झोपड़ी में किया था, इस बलिदान को समझने की सोच यह पहचान है बंजारा समाज की।
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