पत्नी के खिलाफ तलाक का मुकदमा जीतने वाला कैसे बना हीरो?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मध्यप्रदेश के इंदौर में पत्नी के खिलाफ तलाक का मुकदमा दायर कने वाला एक व्यक्ति आजकल कुछ लोगों का हीरो बन गया है। उसकी लोकप्रियता के चलते ही लैंगिक भेदभाव के खिलाफ काम करने वाली संस्था सेव इंडियन फैमिली (SIF) ने सेमिनार आयोजित कर उसके विचार जाने।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार सेमिनार का विषय ''कैसे पुरुषों के साथ भेदभाव किया जा रहा है और न्यायपूर्ण सेक्स के मामले में भी उन्हें घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ रहा है''।
सेमिनार में विचार रखते हुए 44 वर्षीय प्रतीक त्रिपाठी (बदला हुआ नाम) ने बताया कि कैसे उन्होंने अपनी पत्नी के खिलाफ तीन साल पहले तलाक का मुकदमा दायर करते हुए उससे गुजारा भत्ता पाने की लड़ाई जीती।
पुरुषों के अधिकारों के लिए कानून बनाने की मांग
त्रिपाठी ने बताया कि उसकी पत्नी एक सरकारी कर्मचारी और उससे पांच गुणा ज्यादा कमाती थी। हालांकि अब उनकी पत्नी ने निचली अदालत द्वारा दिए गए आदेश के खिलाफ हाइकोर्ट में याचिका दायर कर दी है।
सामाजिक कार्यकर्ता और फिल्म निर्माता दीपिका भारद्वाज ने घरेलू हिंसा के मामलों में पीड़ित पतियों को संबोधित करते हुए बताया कि हम महिलाओं से भी चाहते हैं कि वो पुरुषों के खिलाफ होने वाली हिंसा के खिलाफ आवाज उठाएं और उन्हें समर्थन दें।
एसआईएफ सदस्य दीप्तांशु शुक्ला ने बताया कि, 'हम चाहते हैं कि यहां पुरुषों के लिए एक ऐसा सामान कानून बने जिसमें महिलाओं को सुरक्षा देने की व्यवस्था की गई है। सरकार को इस संबंध में सीआरपीसी के सेक्शन 125 में भी बदलाव करने की जरूरत है जो महिला और पुरुष दोनों को बराबरी का मौका नहीं देता।
