एमपीः आदिवासी इलाकों के छात्रों ने IIT में गाड़ा झंडा
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आईआईटी की तैयारियों के लिए कोटा और देश के उच्च कोचिंग संस्थानों में जाने वाले छात्र-छात्राओं के सामने मध्यप्रदेश के आदिवासी इलाके के कुछ छात्र-छात्राओं ने नई नजीर पेश की है।
इन गुदड़ी के लालों ने साबित किया है कि अगर प्रतिभा और हौसला हो तो बिना संसाधनों के भी इंजीनियरिंग के लिए देश की सर्वोच्च परीक्षा पास की जा सकती है। मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल जिले झाबुआ और अलीराजपुर के 60 से ज्यादा छात्र-छात्राओं ने अपनी मेहनत के बल पर इस बार आईआईटी जेईई मेंस का एग्जाम पास कर लिया है।
हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार मध्यप्रदेश के झाबुआ और अलीराजपुर जिले के 210 छात्रों ने इस साल आईआईटी मेंस एग्जाम के लिए क्वालीफाई किया था। इनमें से झाबुआ के 150 और अलीराजपुर से 60 छात्र शामिल रहे।
बीते 27 अप्रैल को आए रिजल्ट में दोनों जिलों से 60 से ज्यादा छात्रों ने मुख्य परीक्षा पास कर ली है। इनमें झाबुआ के 38 और अलीराजपुर के 22 छात्र शामिल हैं। मुख्य परीक्षा पास करने वालों में 9 लड़कियां भी हैं। खास बात ये है कि अलीराजपुर जिले के सभी छात्रों ने पहली बार में ही देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों के लिए होने वाली परीक्षा को पास करने में सफलता हासिल की।
पिछले साल मात्र 12 छात्र कर पाए थे परीक्षा पास
मुख्य परीक्षा में 79 के स्कोर के साथ करन कनेश झाबुआ जिले के टॉपर रहे तो 85 स्कोर के साथ अलीराजपुर की प्रिया डामर ने टॉप किया। मयादा गांव के रहने वाले झाबुआ के टॉपर केरम सिंह ने बताया कि विधिवत तैयारी और लगातार रिवीजन करने के कारण उन्हें परीक्षा में सफलता हासिल हुई।
उन्होंने बताया कि अन्य छात्रों के मुकाबले कम्प्यूटर, रोबोटिक्स और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में न जाकर, 'मैं सिविल इंजीनियरिंग में अपनी पढ़ाई करूंगा जिससे मेरे गांव के हालात सुधारने में मदद मिल सके।' केरम के पिता एक किसान हैं।
उसने बताया कि वह आईआईटी बांबे या दिल्ली से अपनी पढ़ाई करना चाहता है, लेकिन अंतिम निर्णय उसके घरवालों का ही होगा जो चाहते हैं कि वो इंदौर से अपनी पढ़ाई पूरी करे।
वहीं अलीराजपुर के ही एक अन्य सफल छात्र लोकेन्द्र बरेला ने बताया कि, 'उसे कभी नहीं लगता था कि वह इतनी बड़ी सफलता हासिल कर सकता है, लेकिन मेरे परिजनों और शिक्षकों की मदद से मैं अपना मकसद पाने में कामयाब रहा।'
खास बात ये है कि बीते वर्ष झाबुआ से मात्र 11 और अलीराजपुर से 1 छात्र आईआईटी की मुख्य परीक्षा पास करने में सफल हो पाया था। लेकिन इस बार के चमत्कारिक परिणामों के पीछे स्थानीय प्रशासन का वह प्रयास भी है जिससे ग्रामीण और आदिवासी इलाकों के छात्र-छात्राएं भी उच्च स्तरीय शिक्षा हासिल करने में सफल हो पा रहे हैं।
शैक्षिक रूप से काफी पिछड़े हैं झाबुआ और अलीराजपुर जिले
झाबुआ जिले के कलेक्टर अनुराग चौधरी कहते हैं कि, अगले साल हमारा लक्ष्य है 500 से ज्यादा स्टूडेंट्स परीक्षा में शामिल हों और कम से कम 40 फीसदी छात्र सफलता हासिल करें।
बता दें कि जिन छात्रों ने परीक्षा में सफलता हासिल की है उनमें से ज्यादातर छात्र भोपाल में विशेषज्ञों की देखरेख में अपनी तैयारी कर रहे हैं। अनुराग बताते हैं कि सरकार उन्हें सुविधाएं और हर तरह की मदद मुहैया करा रही है जिससे उनकी प्रतिभा निखरकर सामने आ सके।
सरकार उन्हें बोर्ड परीक्षा की किताबों से लेकर उच्च स्तरीय प्रक्टिस बुक भी उपलब्ध करा रही है। इसके अलावा उच्च माध्यमिक स्कूलों में लाइब्रेरी को भी विकसित किया जा रहा है।
मध्यप्रदेश के इन दो पिछड़े जिलों के छात्र छात्राओं का इससे सफलता को हासिल करना इसलिए भी खास है क्योंकि साल 2011 की जनगणनना में झबुआ जिले का साक्षरता प्रतिशत 43.30 तो अलीराजपुर का मात्र 36.10 फीसदी था।
वहीं अलीराजपुर के कलेक्टर शेखर वर्मा ने बताया कि प्रशासन आदिवासी और दलित छात्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है ताकि वह आगामी परीक्षाओं में और सफलता हासिल कर सकें। उन्हें तमाम तरह की सुविधाएं देने का प्रयास भी किया जा रहा है।
