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IIM में यूथ एनवायरमेंट लीडरशिप प्रोग्राम
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 23 Sep 2014 03:01 PM IST
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पानी का अंधाधुंध बर्बादी ही इसकी क्राइसिस की वजह बन रहा है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) लखनऊ अपने गंदे पानी (सीवेज) को ट्रीट कर दुबारा इस्तेमाल कर एक मॉडल बना है।
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अभी तक पौधों की सिंचाई में उपयोग हो रहे इस शोधित पानी का इस्तेमाल अब बाथरूम में करने की योजना है। सोमवार को सेंटर फॉर एनवायरमेंटल एजूकेशन (सीईई) और पर्यावरण निदेशालय के यूथ एनवायरमेंट लीडरशिप प्रोग्राम में बच्चे आईआईएम की विजिट पर पहुंचे।
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यहां आईआईएम के प्रशासनिक अधिकारी पीके रॉय ने अपने सीवेज प्रबंधन की जानकारी दी। उन्होंने यूथ लीडर्स को बताया कि पूरे आईआईएम परिसर का सीवेज एक ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में इकट्ठा किया जाता है।
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यहां बने चैंबर्स में स्लज और पानी को अलग कर लिया जाता है। बैक्टीरिया की मदद से पानी का शोधन होता है। शोधित पानी को पौधों की सिंचाई में उपयोग कर लिया जाता है, वहीं स्लज खाद में बदल जाती है जो पौधों में काम आती है।
रॉय ने बताया कि सिंचाई का प्रयोग सफल हो चुका है। अब जरूरत से ज्यादा शोधित पानी को बाथरूम में उपयोग करने के प्रयास किए जा रहे हैं। जल्दी ही आईआईएम इस काम को कर लेगा।
इसके बाद ज्ञानोदय लाइब्रेरी में बच्चों को संजय दांडोलकर ने अच्छे प्रबंधक बनने के टिप्स बांटे। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे यह बच्चे आईआईएम में पढ़ाई के लिए एंट्री ले सकते हैं।
आईआईएम के बाद बच्चों और शिक्षकों का ग्रुप चंद्रिकादेवी मंदिर भी गया, जहां अक्षय वट वृक्ष के बारे में भी जानकारी हासिल की।
लाइफस्टाइल बढ़ा रही कूड़ा
पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रही पृथ्वी संस्था की अनुराधा गुप्ता ने बच्चों को तकनीकी सेशन में बताया कि लग्जरी लाइफस्टाइल ने कूड़ा बढ़ाने का काम किया है।
लोगों में रिपेयर और रीयूज का सिद्धांत बचा ही नहीं है। इससे तेजी से कूड़ा बढ़ रहा है। लोगों के पास आज नई चीजों को खरीदने का पैसा है। इसकी वजह से वह पुरानी चीजों को जल्दी ही कूड़े में बदल देते हैं। यह एक बड़े खतरे की तरफ इशारा है।