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UP Police Recruitment 2022: फर्जीवाड़े में जेल में बंद, मगर बन गया ‘दरोगा’, वायरल हुआ मामला तो नाम हटाया
Tue, 28 Jun 2022 09:28 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 28 Jun 2022 09:28 AM IST
सार
यूपी में दरोगा के पदों पर हुई भर्ती में एक ऐसे अभ्यर्थी का भी चयन कर लिया गया, जिसने न सिर्फ पूरी परीक्षा सॉल्वर के जरिए पास की, बल्कि इसी मामले में वह जेल में बंद है।
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फाइल फोटो
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विस्तार
यह खबर दरोगा भर्ती प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े करती है। प्रदेश में उप निरीक्षक के पदों पर हुई भर्ती में एक ऐसे अभ्यर्थी का भी चयन कर लिया गया, जिसने न सिर्फपूरी परीक्षा सॉल्वर के जरिए पास की, बल्कि इसी मामले में वह जेल में बंद है। मामला जब सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने मामले की जांच के आदेश दे दिए। साथ ही चयनित आरोपी का नाम सूची से हटा दिया है।
भर्ती बोर्ड ने वर्ष 2021 में उप निरीक्षक के 9534 पदों पर भर्ती निकाली थी। इसमें अनुसूचित जाति के बलिया के अर्जुन प्रसाद ने भी आवेदन किया था। अर्जुन ने कानपुर के राहुल से चयन के लिए सात लाख रुपये में सौदा किया। राहुल ने अर्जुन के स्थान पर परीक्षा दिलाने के लिए बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले शिशुपाल नाम के सॉल्वर को लगाया।
शिशुपाल की फोटो लगाकर अर्जुन की डिटेल के साथ फर्जी दस्तावेज तैयार किया गया। परीक्षा 16 नवंबर 2021 को कास्मो फाउंडेशन जानकीपुरम एक्सटेंशन, लखनऊ में थी। यहां सॉल्वर शिशुपाल ने अर्जुन बनकर परीक्षा दी। परीक्षा में वह पास भी हो गया। अभिलेखों के सत्यापन के लिए अर्जुन को पांच मई को पुलिस लाइन प्रयागराज बुलाया गया। यहां भी शिशुपाल ने अर्जुन बनकर दस्तावेज चेक कराए और किसी को शक तक नहीं हुआ।
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अब बारी थी शारीरिक परीक्षा यानी दौड़ की। इसके लिए अर्जुन को 19 मई को 37वीं वाहिनी पीएसी कानपुर में बुलाया गया। यहां भी अर्जुन की जगह शिशुपाल पहुंचा और उसने यह परीक्षा भी पास कर ली। यानी शिशुपाल हर जगह अर्जुन बनकर भर्ती बोर्ड से लेकर परीक्षा कराने वाली एजेंसी और एसटीएफ की तमाम नाकेबंदी को तोड़कर परीक्षाओं में शामिल होता रहा और पास भी होता चला गया।
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भर्ती बोर्ड ने वर्ष 2021 में उप निरीक्षक के 9534 पदों पर भर्ती निकाली थी। इसमें अनुसूचित जाति के बलिया के अर्जुन प्रसाद ने भी आवेदन किया था। अर्जुन ने कानपुर के राहुल से चयन के लिए सात लाख रुपये में सौदा किया। राहुल ने अर्जुन के स्थान पर परीक्षा दिलाने के लिए बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले शिशुपाल नाम के सॉल्वर को लगाया।
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शिशुपाल की फोटो लगाकर अर्जुन की डिटेल के साथ फर्जी दस्तावेज तैयार किया गया। परीक्षा 16 नवंबर 2021 को कास्मो फाउंडेशन जानकीपुरम एक्सटेंशन, लखनऊ में थी। यहां सॉल्वर शिशुपाल ने अर्जुन बनकर परीक्षा दी। परीक्षा में वह पास भी हो गया। अभिलेखों के सत्यापन के लिए अर्जुन को पांच मई को पुलिस लाइन प्रयागराज बुलाया गया। यहां भी शिशुपाल ने अर्जुन बनकर दस्तावेज चेक कराए और किसी को शक तक नहीं हुआ।
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अब बारी थी शारीरिक परीक्षा यानी दौड़ की। इसके लिए अर्जुन को 19 मई को 37वीं वाहिनी पीएसी कानपुर में बुलाया गया। यहां भी अर्जुन की जगह शिशुपाल पहुंचा और उसने यह परीक्षा भी पास कर ली। यानी शिशुपाल हर जगह अर्जुन बनकर भर्ती बोर्ड से लेकर परीक्षा कराने वाली एजेंसी और एसटीएफ की तमाम नाकेबंदी को तोड़कर परीक्षाओं में शामिल होता रहा और पास भी होता चला गया।
मुखबिरी पर आया पकड़ में
एक मुखबिर ने दौड़ के अगले दिन यानी 20 मई को इस फर्जीवाड़े के बारे में बता दिया। एसटीएफ ने जाल बिछाकर उसी दिन अर्जुन व शिशुपाल को कानपुर के बाबूपुरवा थाना क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। 12 जून को जब भर्ती बोर्ड ने अंतिम चयन सूची जारी की तो उसमें पुलिस उप निरीक्षक के पद पर एसटी कोटे से अर्जुन का भी नाम शामिल था। जब प्रशिक्षण के लिए अर्जुन को बुलाया गया तो पता चला कि वह इसी भर्ती के फर्जीवाड़े में कानपुर जेल में बंद है।
‘अभ्यर्थी की गिरफ्तारी की सूचना भर्ती बोर्ड को नहीं दी गई थी। इसकी वजह से उसका नाम चयन सूची में आ गया। अब अर्जुन का नाम हटा दिया गया है। आगे की कार्रवाई की जा रही है।’
- राज कुमार विश्वकर्मा, चेयरमैन, यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड
‘अभ्यर्थी की गिरफ्तारी की सूचना भर्ती बोर्ड को नहीं दी गई थी। इसकी वजह से उसका नाम चयन सूची में आ गया। अब अर्जुन का नाम हटा दिया गया है। आगे की कार्रवाई की जा रही है।’
- राज कुमार विश्वकर्मा, चेयरमैन, यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड