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मुख्यमंत्री योगी बोले, महायोगी गोरखनाथ के बिना भारत की आध्यात्मिक परंपरा अधूरी
Fri, 27 Sep 2019 12:41 AM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Fri, 27 Sep 2019 12:41 AM IST
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
- फोटो : amar ujala
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महायोगी गोरखनाथ के बिना भारत की आध्यात्मिक परंपरा अधूरी है। गुरु गोरखनाथ की मान्यता भारत के साथ पाकिस्तान, अफगानिस्तान, भूटान, नेपाल, बांग्लादेश तथा म्यांमार में भी है।
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देश में कोई भी प्रांत ऐसा नहीं है, जहां गोरखनाथ की परंपरा विद्यमान नहीं है। योगी बृहस्पतिवार को हिंदी संस्थान के यशपाल सभागार में युग प्रवर्तक महायोगी गोरखनाथ पर आधारित तीन दिवसीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंदी के कवि सुमित्रानंदन पंत ने ओशो से जब अध्यात्म के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि गोरखनाथ के बगैर भारत की आध्यात्मिक परंपरा शून्य है। गुरु गोरखनाथ ही नाथ संप्रदाय के प्रवर्तक थे, उन्हें शिव स्वरूप माना गया है। उत्तराखंड की जागर परंपरा भी गोरखनाथ से संबंधित है। त्रिपुरा में 35 प्रतिशत और असम की 15 प्रतिशत आबादी गोरखनाथ की अनुयायी है।
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महर्षि पतंजलि ने योग का दर्शन दिया था, लेकिन गुरु गोरखनाथ को उसको शुद्धि के रूप में सभी के लिए जरूरी बताया था। इसके सात आयाम हैं। योग के उच्च सोपान तक पहुंचने के लिए उन्होंने आयाम बनाया था।
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पेशावर में होती है यात्रा
मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंगापुर से गोरखपुर आए एक सिख परिवार ने बताया कि वह पाकिस्तान में ननकाना साहिब में माथा टेकने गया था। वहां उसने देखा कि पेशावर के पास पहाड़ी पर महायोगी गोरखनाथ को लेकर यात्रा होती है।