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छात्रवृत्ति घोटाले में योगी का कड़ा एक्शन : अपर निदेशक होम्योपैथी सहित दो निलंबित, जांच ईओडब्ल्यू को, दो की संविदा समाप्त
Fri, 15 Jul 2022 12:03 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 15 Jul 2022 12:03 AM IST
सार
छात्रवृत्ति घोटाले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ी कार्रवाई करते हुए अपर निदेशक होम्योपैथी और बोर्ड के तत्कालीन कार्यवाहक रजिस्ट्रार प्रोफेसर मनोज यादव, वरिष्ठ लिपिक विनोद कुमार यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
उत्तर प्रदेश होम्योपैथी मेडिसिन बोर्ड के निजी शिक्षण संस्थानों में हुए छात्रवृत्ति घोटाले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ी कार्रवाई करते हुए अपर निदेशक होम्योपैथी और बोर्ड के तत्कालीन कार्यवाहक रजिस्ट्रार प्रोफेसर मनोज यादव, वरिष्ठ लिपिक विनोद कुमार यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। दोनों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश दिया है। साथ ही पूरे मामले की जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) से कराई जाएगी।
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यही नहीं, डीएससी (डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट) का दुरुपयोग करने वाले संविदा लिपिक दिनेश चंद्र दुबे एवं सुषमा मिश्रा की संविदा समाप्त कर दी गई है। दोनों पर केस दर्ज कराया जाएगा। इसी तरह, मेडिसिन बोर्ड की कर्मचारी नहीं होने के बावजूद सुनीता मलिक के नाम से फर्जी डीएससी बनाने और उसका दुरुपयोग कर वित्तीय अनियमितता को लेेकर सुनीता पर भी एफआईआर दर्ज की जाएगी। छात्रवृत्ति में हुई वित्तीय अनियमितता की रिकवरी समाज कल्याण विभाग द्वारा की जाएगी। मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग और समाज कल्याण विभाग के संबंधित मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया है।
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नए कॉलेजों की मान्यता पर रोक, पुराने की जांच
छात्रवृत्ति घोटाले में उत्तर प्रदेश होम्योपैथी मेडिसिन बोर्ड के साथ ही आयुर्वेदिक, यूनानी तिब्बती चिकित्सा पद्धति बोर्ड के कॉलेजों की भी जांच होगी। दोनों बोर्ड को निर्देश दिया गया है कि जब तक कॉलेजों की संबद्धता के लिए सिलेबस एवं अवस्थापना सुविधाओं आदि के संबंध में नियम सक्षम स्तर से अनुमोदित होकर जारी न हो जाए, तब तक नए कॉलेजों को मान्यता न दी जाए। इसी तरह जिन कॉलेजों की मान्यता दोनों बोर्ड द्वारा पहले से जारी की जा चुकी है, उनका संबंधित जिले के जिलाधिकारी द्वारा भौतिक सत्यापन कराया जाए। ब्यूरो
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