अखिलेश के ड्रीम प्रोजेक्ट पर सीएम योगी ने किया बदलाव, पहले जैसा नहीं बनेगा एक्सप्रेस-वे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिछली सपा सरकार ने आगरा एक्सप्रेस- वे को बलिया तक ले जाने के लिए लखनऊ से बलिया तक पूर्वांचल एक्सप्रेस- वे बनाने का एलान किया था। इसके लिए 2017-18 में लेखानुदान से भी 1160 करोड़ रुपये दे दिए थे।
जानकार बताते हैं कि बलिया में यह एक्सप्रेस- वे भरौली तक जाना था। यह क्षेत्र गंगा नदी के 10 किमी. के दायरे में आता है। इसके लिए केंद्र सरकार से पर्यावरणीय एनओसी लेनी पड़ती।
यह बात सामने आने के बाद अखिलेश सरकार ने केंद्र से एनओसी मिलने में देरी की आशंका के मद्देनजर प्रोजेक्ट को गाजीपुर तक ही सीमित करने की हरी झंडी दे दी थी। हालांकि चुनाव की वजह से इस पर आधिकारिक फैसला नहीं हो सका और यह बात प्रचारित नहीं की गई।
इसके आगे की योजना पर होगा काम
उधर, योगी सरकार के सत्ता में आने के बाद इस प्रोजेक्ट की समीक्षा हुई तो नई रणनीति के तहत प्रोजेक्ट को गाजीपुर में ही खत्म करने पर सहमति बनी। तय हुआ कि यह एक्सप्रेस- वे गाजीपुर के हैदरिया गांव के पास खत्म किया जाए। इसका आगे क्या स्वरूप हो, इस पर अलग से कार्ययोजना बनाकर काम किया जाएगा।
यूपीडा नहीं बनाएगा लिंक मार्ग
प्रदेश सरकार पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से आजमगढ़, बलिया व अयोध्या को लिंक मार्ग से जोड़ने पर भी विचार कर रही है। यह भी तय हो गया है कि लिंक मार्ग का निर्माण यूपीडा नहीं कराएगा। फोर लेन के लिंक मार्ग के निर्माण की जिम्मेदारी प्रदेश या केंद्र सरकार की किसी एजेंसी को दी जाएगी।
कर्ज मिलने पर ही एक्सप्रेस-वे को मिलेगी रफ्तार
जानकार बताते हैं कि कर्जमाफी के बोझ तले दबी सरकार पूर्वांचल एक्सप्रेस- वे के लिए अपने बजट से ज्यादा रकम दे पाने की स्थिति में नहीं है।
सरकार ने यूपीडा के अधिकारियों को इसके लिए हुडको से ऋण लेने का निर्देश दिया है। यूपीडा ने हुडको से बातचीत शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि कर्ज मिलने के बाद ही काम को रफ्तार मिल पाएगी। पिछली सरकार ने भी आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस- वे को पूरा करने के लिए हुडको से कर्ज लिया था।
निर्माण के लिए चाहिए 19,000 करोड़
लखनऊ-गाजीपुर पूर्वांचल एक्सप्रेस- वे के लिए करीब 19 हजार करोड़ रुपये की जरूरत बताई जा रही है। सिर्फ जमीन खरीदने के लिए ही 7000 करोड़ रुपये चाहिए। इस काम के लिए 3700 करोड़ मिले हैं और 58 प्रतिशत जमीन खरीदी जा चुकी है। जमीन अधिग्रहण का काम तेजी से चल रहा है।
छह महीने बाद ही शुरू हो पाएगा काम
प्रदेश सरकार ने इसे बनाने के लिए निर्माण एजेंसी के चयन के लिए नए सिरे से टेंडर निकालने का फैसला किया है। नए सिरे से टेंडर से कंपनी चयन में करीब छह महीने लगेंगे। इसके बाद ही निर्माण कार्य शुरू हो पाएगा।