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महाविद्यालयों में प्राचार्य बनना होगा आसान, योगी सरकार ने खत्म की 15 साल अनुभव की बाध्यता

Tue, 31 Jul 2018 08:42 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 31 Jul 2018 08:42 PM IST
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yogi government decision on appointing principal in colleges.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala

अशासकीय स्ववित्त पोषित महाविद्यालयों में अब प्राचार्य बनना आसान होगा। उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने इस पद के लिए आचार्य या सह आचार्य के पद पर 15 साल के अनुभव की बाध्यता खत्म करने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। हालांकि, उच्च शिक्षण संस्थानों में कुल 15 वर्षों का अध्यापन, शोध या प्रशासन का अनुभव जरूरी होगा। स्नातकोत्तर में 55 फीसदी अंक के साथ पीएचडी उपाधि धारक आवेदन कर सकेंगे।

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मंगलवार को कैबिनेट की बैठक के बाद राज्य सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि प्रदेश में गैर अनुदानित और स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों की संख्या 6500 से ज्यादा है। इनमें प्राचार्य के 3500 पद खाली हैं।
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वर्ष 2005 में प्राचार्य पद के लिए मानदंड निर्धारित किए गए थे। इसमें उच्च शिक्षा से जुड़े विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और अन्य संस्थानों के वे सह आचार्य (उपाचार्य) या आचार्य ही प्राचार्य पद के लिए आवेदन कर सकते थे, जिन्हें कुल 15 वर्षों के अध्यापन, शोध या प्रशासन का अनुभव हो।
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गैर अनुदानित और स्ववित्त पोषित महाविद्यालयों की संख्या ज्यादा होने के कारण उन्हें वर्ष 2005 में निर्धारित अर्हता के अनुरूप प्राचार्य नहीं मिल पा रहे थे। प्राचार्य की तैनाती न होने के कारण राज्य विश्वविद्यालय इन महाविद्यालयों की संबद्धता को बनाए रखने पर आपत्ति लगा रहे थे। इसलिए गैर अनुदानित और स्ववित्त पोषित अशासकीय महाविद्यालय के प्राचार्य की अर्हता शर्तों में बदलाव किया गया है।

स्नातकोत्तर में न्यूनतम 55 फीसदी और पीएचडी की अर्हता रहेगी बरकरार

प्रदेश सरकार ने ऐसा उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-1973 की धारा 50 की उपधारा 6 के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए किया है। स्नातकोत्तर में न्यूनतम 55 फीसदी अंक और पीएचडी की अर्हता पहले की तरह ही बरकरार रहेगी। लेकिन, आचार्य या सह आचार्य (उप आचार्य) के पद पर 15 वर्ष का अनुभव की शर्त हटा दी गई है।

इसके बजाय 15 वर्षों के अध्यापन, शोध और प्रशासन का अनुभव ही पर्याप्त होगा। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि शासकीय महाविद्यालयों और अनुदानित अशासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्य के लिए अर्हता एवं चयन प्रक्रिया यथावत रहेगी।

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