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योगी सरकार ने दी राहत, कारखानों-निर्माण इकाइयों को तीन साल के लिए श्रम कानूनों से छूट
Thu, 07 May 2020 11:54 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 07 May 2020 11:54 AM IST
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : ANI
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मंत्रिपरिषद ने बुधवार को प्रदेश के सभी कारखानों पर विनिर्माण अधिष्ठानों को श्रम कानूनों से तीन साल के लिए छूट देने संबंधी अध्यादेश के प्रारूप को मंजूरी दे दी। यह निर्णय औद्योगिक गतिविधियों को पटरी पर लाने और नए निवेश के अवसर पैदा करने के लिए लिया है।
यह छूट फिलहाल तीन साल की अवधि के लिए अस्थायी तौर पर लागू होगी। सरकारी प्रवक्ता के अनुसार कोविड-19 वायरस महामारी के प्रकोप ने प्रदेश में औद्योगिक क्रियाकलापों व आर्थिक गतिविधियों को बुरी तरह से प्रभावित किया है। उनकी रफ्तार धीमी पड़ गई है।
इससे श्रमिकों के हितों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। चूंकि, लॉकडाउन की लंबी अवधि में औद्योगिक प्रतिष्ठान, कारखाने व उनसे जुड़े औद्योगिक क्रियाकलाप और उत्पादन लगभग बंद रहे हैं। इन्हें फिर से पटरी पर लाने के साथ ही औद्योगिक निवेश के नए अवसर पैदा करने होंगे।
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पूर्व से स्थापित पुराने औद्योगिक प्रतिष्ठानों व कारखानों में औद्योगिक क्रियाकलापों एवं उत्पादन को गति प्रदान करनी होगी। नए औद्योगिक निवेश, नए औद्योगिक प्रतिष्ठान व कारखाने स्थापित करने तथा पूर्व से स्थापित पुराने प्रतिष्ठानों व कारखानों के लिए प्रदेश में लागू श्रम कानूनों से कुछ अवधि के लिए अस्थायी रूप से छूट प्रदान करनी होगी।
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यह छूट फिलहाल तीन साल की अवधि के लिए अस्थायी तौर पर लागू होगी। सरकारी प्रवक्ता के अनुसार कोविड-19 वायरस महामारी के प्रकोप ने प्रदेश में औद्योगिक क्रियाकलापों व आर्थिक गतिविधियों को बुरी तरह से प्रभावित किया है। उनकी रफ्तार धीमी पड़ गई है।
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इससे श्रमिकों के हितों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। चूंकि, लॉकडाउन की लंबी अवधि में औद्योगिक प्रतिष्ठान, कारखाने व उनसे जुड़े औद्योगिक क्रियाकलाप और उत्पादन लगभग बंद रहे हैं। इन्हें फिर से पटरी पर लाने के साथ ही औद्योगिक निवेश के नए अवसर पैदा करने होंगे।
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पूर्व से स्थापित पुराने औद्योगिक प्रतिष्ठानों व कारखानों में औद्योगिक क्रियाकलापों एवं उत्पादन को गति प्रदान करनी होगी। नए औद्योगिक निवेश, नए औद्योगिक प्रतिष्ठान व कारखाने स्थापित करने तथा पूर्व से स्थापित पुराने प्रतिष्ठानों व कारखानों के लिए प्रदेश में लागू श्रम कानूनों से कुछ अवधि के लिए अस्थायी रूप से छूट प्रदान करनी होगी।
इसलिए आगामी तीन वर्ष की अवधि के लिए वर्तमान में लागू श्रम अधिनियमों में अस्थायी छूट प्रदान किया जाना आवश्यक हो गया है। इसके लिए उत्तर प्रदेश कतिपय श्रम विधियों से अस्थायी छूट अध्यादेश-2020 में राज्य में वर्तमान में लागू श्रम अधिनियमों से तीन साल की छूट प्रदान किए जाने का प्रावधान है। लेकिन, ये छूट कुछ शर्तों के अधीन हैं।
बंधुआ श्रम प्रथा (उत्सादन) अधिनियम 1976, कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम 1923 तथा भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन एवं सेवा शर्ते विनियमन) 1996 के प्रावधान लागू रहेंगे। बच्चों एवं महिलाओं के नियोजन से संबंधित श्रम कानूनों के प्रावधान भी लागू रहेंगे। वेतन संदाय अधिनियम, 1936 की धारा 5 के तहत निर्धारित समय सीमा में वेतन भुगतान का प्रावधान भी लागू रहेगा।
बंधुआ श्रम प्रथा (उत्सादन) अधिनियम 1976, कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम 1923 तथा भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन एवं सेवा शर्ते विनियमन) 1996 के प्रावधान लागू रहेंगे। बच्चों एवं महिलाओं के नियोजन से संबंधित श्रम कानूनों के प्रावधान भी लागू रहेंगे। वेतन संदाय अधिनियम, 1936 की धारा 5 के तहत निर्धारित समय सीमा में वेतन भुगतान का प्रावधान भी लागू रहेगा।