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योगी सरकार ने नाव सुरक्षा एवं नाविक कल्याण नीति-2020 को दी मंजूरी, दुर्घटना में बचाव पर पुरस्कार और मृत्यु पर मदद

Mon, 07 Dec 2020 12:22 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Mon, 07 Dec 2020 12:22 AM IST
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Yogi government approves Boat Safety and Sailor Welfare Policy -2020, award on accident rescue and help on death
नाव - फोटो : अमर उजाला।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी नाव सुरक्षा एवं नाविक कल्याण नीति-2020 को मंजूरी दे दी है। अब मानसून के दौरान सूर्यास्त के बाद नौका संचालन की अनुमति नहीं होगी। केवल बचाव व खोज कार्य में जुड़ी नौकाओं का ही संचालन हो सकेगा। यदि किसी आपात स्थिति में रात में नौका संचालन अनिवार्य होगा तो विशेष प्रकाश व्यवस्था करनी होगी। नाव दुर्घटना में मृत्यु पर मृतक परिजनों को राज्य आपदा मोचक निधि से 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता पहले की तरह मिलती रहेगी। 
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सरकार नाव दुर्घटना होने पर राहत व बचाव कार्यों में विशेष कौशल प्रदर्शित करने वाले व्यक्तियों, नाविकों व गोताखोरों को पुरस्कृत करेगी। खोज व बचाव कार्य में लगे लोगों की मृत्यु हुई तो उनके परिवार को आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके अलावा सुरक्षित नौका संचालन व नाव दुर्घटना के नियंत्रण के लिए मल्लाहों को कई तरह की सुविधा, प्रशिक्षण व प्रोत्साहन देने का फैसला किया गया है। 
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राजस्व विभाग नाव दुर्घटना के बचाव व प्रबंधन के लिए मॉक ड्रिल कराएगा तथा उपकरणों की उपलब्धता, जागरूकता, प्रशिक्षण कार्यक्रम का प्रबंध करेगा। बड़े धार्मिक स्नानों, मेलों के दौरान नौकाओं व नौका घाटों की जांच होगी।  
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प्रदेश में प्रति वर्ष नाव दुर्घटना से काफी संख्या में लोगों की मृत्यु हो जाती है। अप्रैल-2019 से अगस्त-2020 के बीच 41 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। प्रदेश में नाव दुर्घटना रोकने व बचाव को लेकर अब तक कोई नीति नहीं थी। नीति में नाव संचालन को लेकर विस्तृत एसओपी भी तैयार की गई है। 

नीति के क्रियान्वयन के लिए तीन स्तरीय समिति
इस नीति पर अमल के लिए जिला स्तर पर डीएम, तहसील स्तर पर एसडीएम की अध्यक्षता में तथा ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम प्रधान व लेखपाल की संयुक्त समिति बनाने का प्रावधान किया गया है। ये समितियां मल्लाहों को प्रशिक्षण, प्रोत्साहन, व रोजगार दिलाने के संबंध में कार्यवाही करेंगी। वहीं, राज्य आपदा प्रबंध प्राधिकरण इनका मार्गदर्शन करेगा।

नाव यात्रा से इन्हें रोका जा सकेगा

ऐसे विक्षिप्त, संक्रामक रोगग्रस्त, मद्यपान करने वाले, नाविक के कार्य में बाधा डालने वाले, लदान व उतारने में हस्तक्षेप करने वाले या ऐसा व्यवहार करने वाले जिसके व्यवहार से अन्य यात्रियों से झगड़ा होने व नौका में भगदड़ की आशंका हो, नाव की यात्रा से रोका जा सकेगा।

मल्लाहों को ये सुविधाएं देगी सरकार
- नाव की मरम्मत या बड़ी नाव की व्यवस्था के लिए लोन दिलाने में मदद की जाएगी।
- हर साल मानसून से पहले 10 जून तक नाविकों व गोताखोरों को प्रशिक्षण। पहली बार 7 से 10 दिन का प्रशिक्षण। फिर हर साल तीन दिन का रिफ्रेशर प्रशिक्षण।
- प्रशिक्षण के दौरान नाविकों व गोताखोरों को अर्धकुशल श्रमिक को दिया जाने वाला मानदेय मिलेगा।
- प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों को प्रशिक्षण प्रमाणपत्र, नि:शुल्क सेफ्टी किट दी जाएगी। किट में लाइफ जैकेट, एक लाइफबॉय, पतवार, लंबा बांस, रस्सी, टाच, प्राथमिक चिकित्सा किट से जुड़ी सामग्री होगी।
- विकास व कल्याण योजनाओं, एमएसएमई द्वारा संचालित योजनाओं, वित्तीय व ऋण परियोजनाओं, कौशल विकास संबंधी योजनाओं का लाभ नाविकों अ गोताखोरों को प्राथमिकता पर दिलाया जाएगा।
- नाविक कोई तकनीकी सहयोग चाहेगा तो समितियों के माध्यम से प्राप्त कर सकेगा।
- ऐसे गांव जहां नौकाएं संचालित होती हैं वहां की ग्राम पंचायतें हर छह महीने पर नाव सुरक्षा जागरूकता अभियान का आयोजन करेंगी।

केवट, निषाद, मल्लाह, गोड़िया जैसी जातियों पर नजर
नौका संचालन को रोजगार बनाकर जीवन यापन करने वाले जातियों के परिवारों की अब तक किसी सरकार ने योजना बनाकर मदद नहीं की। इस नीति के जरिए सरकार नाव संचालन से जुड़े केवट, निषाद, मल्लाह, गोड़िया जैसी जातियों तक सीधे पहुंच बनाकर उन्हें साधने जा रही है। प्रदेश के कई क्षेत्रों में इन जातियों का अच्छा प्रभाव रहता है। 
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