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योगी सरकार ने वित्त आयोग से मांगा 5.37 लाख करोड़ का पैकेज, इन मदों में मांगा फंड

Tue, 22 Oct 2019 11:57 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Tue, 22 Oct 2019 11:57 PM IST
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yogi cabinet and officials will meet with financial commision for developments
वित्त आयोग के साथ बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala

उत्तर प्रदेश सरकार ने 15 वें वित्त आयोग से 5,37,228 करोड़ रुपये के पैकेज की मांग की है। इसमें 4,35,090 करोड़ रुपये ग्रामीण पंचायतों व नगरीय निकायों के लिए और 1,02,138 करोड़ रुपये सड़क, बिजली, पानी, इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास सहित अन्य कार्यों के लिए मांगा है।

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आयोग के चेयरमैन एनके सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगियों के साथ बैठक के बाद चिकित्सा व स्वास्थ्य सेक्टर के लिए 18,000 करोड़ व प्री-एजुकेशन के बेहतर प्रयासों में अतिरिक्त सहायता का संकेत दिया।
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आयोग के चेयरमैन ने सीएम के साथ मंगलवार को लोकभवन में लंबी बैठक की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने जिला अस्तपालों को मेडिकल कॉलेजों में उच्चीकृत करने का रोडमैप रखा है। आयोग में सहमति बनी तो मेडिकल कॉलेजों की स्थापना व पैरामेडिकल स्टाफ के लिए 16,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता पर विचार किया जाएगा। इसी तरह नर्सिंग व एलाइड सेक्टर के प्रशिक्षण के लिए 2,000 करोड़ रुपये पर विचार किया जाएगा।
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सिंह ने प्री-प्राइमरी एजुकेशन पर काम करने पर भी मदद का संकेत दिया। सीएम ने विचार-विमर्श के बाद बताया कि सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-प्राइमरी स्कूल में बदलने पर काम कर रही है। आयोग इस काम में राज्य सरकार की सहायता पर विचार करेगा।

ग्रामीण पंचायतों व नगरीय निकायों के लिए इन मदों में की मांग

मद--मांग
ऊजा--30,000
पेयजल (बुंदेलखंड व विंध्याचल क्षेत्र)--10,000
ग्रामीण स्वच्छता--3,000
पर्यटन के प्रमोशन--3900
सड़क व पुल निर्माण--10,400

सर्वशिक्षा अभियान के शिक्षकों के वेतन--6103
स्कूलों के बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकास--7736
फॉरेंसिक साइंस लैब--357
नए जिलों में पुलिस लाइन की स्थापना--1750
नए जिलों में जेल की स्थापना--1050

शहरी विकास के लिए--2500
पर्यावरण व वन संरक्षण--1422
चिकित्सा शिक्षा--5720
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य--13,846
प्री व पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति--4262
पुरातात्विक महत्व के स्थलों के संरक्षण--92
(नोट: मांग करोड़ में)

यूपी को कम करनी होगी कर्ज पर निर्भरता, विकास की गति भी बढ़ानी होगी

15 वें वित्त आयोग के चेयरमैन एनके सिंह ने कहा है कि यूपी को 10 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए प्रदेश की मौजूदा विकास दर (जीएसडीपी) को दोगुना करना होगा। इसके लिए ग्रोथ के मोमेंटम को बढ़ाना होगा और कर्ज पर निर्भरता कम करनी होगी। प्रदेश का जीएसडीपी व ऋण का अनुपात 34 फीसदी तक पहुंच गया है। इसे घटाकर 25 प्रतिशत तक लाना होगा। ऋण भार कम होगा तो जीएसडीपी और कार्यकुशलता बढ़ेगी।

उन्होंने कहा कि यूपी में देश की 17 प्रतिशत आबादी रहती है। लेकिन जनसंख्या घनत्व राष्ट्रीय औसत 382 से बहुत ज्यादा 829 है। गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों की संख्या भी राष्ट्रीय औसत 21.92 फीसदी से ज्यादा 29.43 प्रतिशत है। यह यूपी के लिए बड़ी चुनौती है। हालांकि यूपी की जीएसडीपी राष्ट्रीय औसत से अधिक है। पर जीएसडीपी की वृद्धि दर को दोगुना करके ही यूपी 10 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य प्राप्त कर सकता है।

कृषि क्षेत्र में सुधार का रोडमैप देगा आयोग
आयोग के चेयरमैन ने बताया कि कृषि क्षेत्र में सुधार पर आयोग का फोकस है। इस सेक्टर में सुधार के लिए पीएम मोदी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई है। सीएम योगी आदिनाथ भी इसके सदस्य हैं। कमेटी ने सुधारों का मसौदा बनाकर राय के लिए राज्यों को भेजा है। 25 अक्तूबर तक राज्य अपने सुझाव दे देंगे। इसके अगले 15 दिनों में इसे अंतिम रूप देकर कार्यवाही के लिए भेजा जाएगा। साथ ही कृषि से आय व उत्पादन बढ़ाने के लिए सभी जरूरी बातों का ध्यान रखा जाएगा।इसके तहत एपीएमसी एक्ट में सुधार, दीर्घकालीन कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग और प्रगति में अड़चन वाले प्रावधानों को दूर करने व कृषि क्षेत्र के ढांचे को तर्कसंगत बनाने का विचार है।

जनसंख्या को धन आवंटन का मानक बनाना तर्कसंगत नहीं

यूपी में सर्वाधिक जनंसख्या व भौगोलिक स्थिति के मद्देनजर धन आवंटन का मानक बनाने से जुड़े सवाल पर सिंह ने कहा की जनसंख्या व भौगोलिक स्थिति यूपी के लिए निश्चित रूप से चुनौती है। पर इसे धन आवंटन के फ ॉर्मूले में शामिल किया जाए इस पर विवाद है। कई राज्यों का कहना है कि जनसंख्या नियंत्रण में सफलता हासिल की है व कई क्षेत्रों में बेहतर प्रबंधन किया है। ऐसे में जनसंख्या को आधार बनाने की मांग को वे नाइंसाफी बता रहे हैं। आयोग को दोनों ही स्थितियों में संतुलन बनाना है। उन्होंने इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर विचार की जरूरत बताई।

ऊर्जा, शिक्षा व स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रगति से बेहतर की उम्मीद
चेयरमैन ने कहा कि ऊर्जा तथा शिक्षा व स्वास्थ्य के सेक्टर में बड़े सुधार की जरूरत है। लेकिन इस क्षेत्र में पिछले एक  वर्ष में जिस तरह प्रयास हुए हैं, उससे उम्मीद है कि अगले दो वर्षों में राष्ट्रीय व राज्य का गैप पूरा हो जाएगा। उन्होंने बताया कि यूपी ने ऊर्जा क्षेत्र में सुधार के लिए उदय योजना में शहरी व ग्रामीण फीडर पर मीटर लगाने, ग्रामीण फीडर के ऑडिट का लक्ष्य पूरा कर लिया है। लेकिन शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में वितरण ट्रांसफार्मर पर मीटर लगाने, स्मार्ट मीटर लगाने के अलावा लाइन हानियां कम करने व बिजली से वंचित शत-प्रतिशत घरों तक कनेक्शन पहुंचाने का लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सका है। लाइन हानियां 11 हजार करोड़ से बढ़कर 18 हजार करोड़ हो गई है। स्वास्थ्य व शिक्षा क्षेत्र के कई मापदंड भी राष्ट्रीय औसत से नीचे हैं।

पर्यटन विकास को तवज्जो दे सरकार
सिंह ने कहा कि यूपी में पर्यटन को लेकर अपार संभावनाएं हैं। वाराणसी में शानदार काम हुआ है। बिना लोगों के किसी विरोध के काशी विश्वनाथ से गंगा घाट के बीच विश्वनाथ कॉरिडोर बनाया जा रहा है। सफाई पर अच्छा काम हुआ है। इसी तरह प्रदेश के टूरिस्ट स्पॉट को आकर्षक बनाने का काम किया जा सकता है। इस क्षेत्र में कम खर्च और अधिक रोजगार सृजन के अवसर हैं।

बैठक में अपर मुख्य सचिव वित्त संजीव मित्तल ने प्रदेश की सामाजिक, आर्थिक व राजकोषीय पृष्ठभूमि के संबंध में प्रजेंटेशन दिया। जीएसटी, स्वास्थ्य, वन व बाल विकास केक्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों पर विभागीय अपर मुख्य सचिवों व सचिवों ने प्रजेंटेशन दिए। इस दौर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व डा. दिनेश शर्मा, अन्य मंत्रीगण तथा मुख्य सचिव आरके तिवारी उपस्थित थे।

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