योगी की भ्रष्टाचार पर सख्ती से अफसरों की धड़कनें बढ़ी, गृह विभाग को रोज निपटानी होंगे 10 फाइलें
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अभियोजन स्वीकृति के लंबित पड़े प्रकरणों के निस्तारण को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख के बाद शासन में इसे लेकर प्रक्रिया तेज हो गई है। सरकार के पास फिलहाल 520 मामले लंबित पड़े हैं। इसके लिए मुख्यमंत्री ने दो माह का समय दिया है। ऐसे में गृह विभाग को हर दिन कम से कम 10 फाइलों को निपटाना होगा।
जानकारी के अनुसार अभियोजन स्वीकृति के सबसे अधिक 300 मामले आर्थिक अपराध शाखा से संबंधित हैं, इनमें लगभग 200 मामले खाद्य एवं रसद से जुड़े हैं। वहीं विजिलेंस से जुड़े 160 मामले अभियोजन स्वीकृति के लिए लंबित हैं। इनमें 34 चिकित्सा विभाग के, 20 राजस्व और 20 सिंचाई विभाग के हैं।
कई आईएएस और आईपीएस के अलावा पीसीएस, पीपीएस, आरटीओ और अन्य विभागों के अफसर भी शामिल हैं जिनकी अभियोजन स्वीकृति लंबित है। वहीं सूत्रों का कहना है कि कई अफसरों ने खुद को निर्दोष बताते हुए शासन में प्रार्थना पत्र दे रखा है। अभियोजन स्वीकृति की पत्रावली के निस्तारण के समय इन प्रार्थना पत्रों पर भी विचार किया जाएगा। इसके लिए गृह विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है।
प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने बताया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित स्पेशल टास्क फोर्स की बैठक जल्द ही बुलाई जाएगी। इसमें जांच से संबंधित सभी एजेंसियों को बुलाया जाएगा। शासन स्तर पर लंबित मामलों का निपटारा यहां से किया जाएगा। बाकी जो मामले विभाग स्तर पर लंबित हैं उनकी प्रक्रिया में भी तेजी लाने के निर्देश दिए जाएंगे।
कई अफसरों और नेताओं की बढ़ीं धड़कनें
लंबे समय से धूल खा रही इन फाइलों पर अब जल्द निर्णय होगा। इससे भ्रष्टाचार के मामलों में लिप्त अधिकारियों व नेताओं की धड़कनें बढ़ गई हैं। धड़कनें इसलिए भी बढ़ी हैं क्योंकि मुख्यमंत्री ने कार्रवाई की शुरुआत ऊपर से करने के लिए कहा है। यानी समूह क के अधिकारियों पर पहले कार्रवाई होगी।
तीन जिलों के पुलिस कप्तान, एक जोन के एडीजी और पीएसी के एक कमांडेंट को अलग-अलग मामलों में विभिन्न एजेंसियों ने दोषी माना था। इनके अलावा कुछ आईएएस अधिकारी भी अलग-अलग स्थानों पर तैनात हैं।
हालांकि यह तय नहीं है कि इन मामलों में शासन अभियोजन की स्वीकृति देगा ही। क्योंकि इनमें से कई अधिकारियों ने उन पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया है जबकि कुछ ने जांच एजेंसी पर ही सवाल उठाए हैं। ऐसे में निर्णय शासन को लेना है कि ऐसी फाइलों का निस्तारण वह किस तरह से करता है।
स्पेशल टास्क फोर्स हर दो माह में करेगी बैठक
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित स्पेशल टास्क फोर्स भ्रष्टाचार, कदाचार, दुराचरण, जालसाजी और टैक्स चोरी के मामलों में की जाने वाली जांचों की समीक्षा कर जरूरी दिशा-निर्देश देगी, ताकि समयबद्घ तरीके से मामलों का निपटारा किया जा सके। स्पेशल टास्क फोर्स की बैठक हर दो माह में होगी। टास्क फोर्स अन्य विभागों में तैनात मुख्य सतर्कता अधिकारियों व सतर्कता अधिकारियों के कार्यों की समीक्षा करेगी।