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Lucknow News: यजदान बिल्डर्स को ब्याज समेत 50 लाख रुपये लौटाने का आदेश
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लखनऊ। 50 लाख रुपये लेने के बावजूद फ्लैट न देने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने यजदान बिल्डर्स को नौ प्रतिशत ब्याज समेत 50 लाख रुपये परिवादी को लौटाने का आदेश दिया है। न्यायालय ने 60 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने को भी कहा है।
महानगर स्थित सचिवालय कॉलोनी निवासी संध्या शर्मा और उनके पति अनिल कुमार ने सात मार्च 2024 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग- प्रथम के यहां परिवाद दाखिल किया था। कहा था कि उन्होंने डालीबाग स्थित यजदान कंस्ट्रक्शन से महानगर के विवेकानंदपुरी वार्ड में अलायाह एफटेक रेजीडेंसी में 18 सितंबर 2021 को 2,250 वर्ग फीट के फ्लैट का एग्रीमेंट किया था। फ्लैट की कीमत 90 लाख रुपये थी, जिसके बदले उन्होंने अलग-अलग किस्तों में 50 लाख रुपये दिए। शेष 40 लाख की रकम रजिस्ट्री व कब्जे के समय तीन माह बाद देनी थी।
संध्या शर्मा और अनिल कुमार ने बताया कि दिसंबर 2021 तक बिल्डिंग का काम पूरा न होने पर उन्होंने कई बार आरोपी फयाद यजदानी को फोन किया, लेकिन फोन नहीं उठा। बाद में इस प्रोजेक्ट में कई अनियमितताएं होने का पता चला। बिल्डिंग छह तल तक ही वैध थी, जबकि विपक्षी ने सातवीं व आठवीं मंजिल तक फ्लैट बेचे थे। इसके बाद जब परिवादी ने अपनी 50 लाख की रकम वापस मांगी तो जल्द फ्लैट देने का वादा किया गया।
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वहीं, यजदान कंस्ट्रक्शन ने उन्हें 50 लाख के तीन चेक दिए और कहा कि यदि तय समय में फ्लैट नहीं मिलता है तो वे चेक के माध्यम से अपनी धनराशि ले सकते हैं। परिवादी ने जब समय बीतने के बाद चेक बैंक में लगाए तो वे बाउंस हो गए। पांच जुलाई को आयोग ने परिवादिनी के पक्ष में फैसला सुनाया।
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महानगर स्थित सचिवालय कॉलोनी निवासी संध्या शर्मा और उनके पति अनिल कुमार ने सात मार्च 2024 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग- प्रथम के यहां परिवाद दाखिल किया था। कहा था कि उन्होंने डालीबाग स्थित यजदान कंस्ट्रक्शन से महानगर के विवेकानंदपुरी वार्ड में अलायाह एफटेक रेजीडेंसी में 18 सितंबर 2021 को 2,250 वर्ग फीट के फ्लैट का एग्रीमेंट किया था। फ्लैट की कीमत 90 लाख रुपये थी, जिसके बदले उन्होंने अलग-अलग किस्तों में 50 लाख रुपये दिए। शेष 40 लाख की रकम रजिस्ट्री व कब्जे के समय तीन माह बाद देनी थी।
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संध्या शर्मा और अनिल कुमार ने बताया कि दिसंबर 2021 तक बिल्डिंग का काम पूरा न होने पर उन्होंने कई बार आरोपी फयाद यजदानी को फोन किया, लेकिन फोन नहीं उठा। बाद में इस प्रोजेक्ट में कई अनियमितताएं होने का पता चला। बिल्डिंग छह तल तक ही वैध थी, जबकि विपक्षी ने सातवीं व आठवीं मंजिल तक फ्लैट बेचे थे। इसके बाद जब परिवादी ने अपनी 50 लाख की रकम वापस मांगी तो जल्द फ्लैट देने का वादा किया गया।
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वहीं, यजदान कंस्ट्रक्शन ने उन्हें 50 लाख के तीन चेक दिए और कहा कि यदि तय समय में फ्लैट नहीं मिलता है तो वे चेक के माध्यम से अपनी धनराशि ले सकते हैं। परिवादी ने जब समय बीतने के बाद चेक बैंक में लगाए तो वे बाउंस हो गए। पांच जुलाई को आयोग ने परिवादिनी के पक्ष में फैसला सुनाया।