{"_id":"68b8b11c9b23652c490e3218","slug":"worship-of-the-best-penance-religion-in-jain-temples-lucknow-news-c-13-lko1070-1367476-2025-09-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: जैन मंदिरों में उत्तम तप धर्म का पूजन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: जैन मंदिरों में उत्तम तप धर्म का पूजन
विज्ञापन
जैन धर्म के पर्व दशलक्षण के सातवें दिन बुधवार को सभी जैन मंदिरों में उत्तम तप धर्म का पूजन किया
लखनऊ। जैन धर्म के पर्व दशलक्षण के सातवें दिन बुधवार को सभी जैन मंदिरों में उत्तम तप धर्म का पूजन किया गया। इंदिरानगर स्थित जैन मंदिर मे भगवान शांतिनाथ की विशेष पूजा हुई। अरविंद जैन, आयुष जैन और डॉ. आनंद जैन ने भगवान को पंडुकशिला पर विराजमान कर अभिषेक व शांतिधारा किया।
जैन मान्यता के अनुसार, हर श्रावक के छह आवश्यक कार्य बताए गए हैं। इनमें देव वंदना, गुरुपास्ती, स्वाध्याय, संयम, तप और दान शामिल हैं। तप करना श्रावक का मूल धर्म है।
इंदिरानगर के मंदिर में जैन समाज के महामंत्री अभिषेक जैन ने बताया कि पुराणों में आचार्यों ने स्पष्ट कहा है कि धर्म पर सच्ची श्रद्धा के बिना कल्याण होने वाला नहीं है। उत्तम तप के पावन दिन पर धर्मावलंबियों ने मंदिर में चल रहे धर्मार्थ औषधालय की व्यवस्था में दान कर सहयोग दिया। जैन समाज के अध्यक्ष पवन जैन की ओर से अपील की गई कि प्रत्येक जैन धर्मावलंबी दशलक्षण के बाकी दिनों में भगवान का अभिषेक करने के लिए उपस्थित जरूर हो। इस अवसर पर दिव्य, सनत, अनुरोध, संयम और ललित जैन आदि थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
जैन मान्यता के अनुसार, हर श्रावक के छह आवश्यक कार्य बताए गए हैं। इनमें देव वंदना, गुरुपास्ती, स्वाध्याय, संयम, तप और दान शामिल हैं। तप करना श्रावक का मूल धर्म है।
विज्ञापन
इंदिरानगर के मंदिर में जैन समाज के महामंत्री अभिषेक जैन ने बताया कि पुराणों में आचार्यों ने स्पष्ट कहा है कि धर्म पर सच्ची श्रद्धा के बिना कल्याण होने वाला नहीं है। उत्तम तप के पावन दिन पर धर्मावलंबियों ने मंदिर में चल रहे धर्मार्थ औषधालय की व्यवस्था में दान कर सहयोग दिया। जैन समाज के अध्यक्ष पवन जैन की ओर से अपील की गई कि प्रत्येक जैन धर्मावलंबी दशलक्षण के बाकी दिनों में भगवान का अभिषेक करने के लिए उपस्थित जरूर हो। इस अवसर पर दिव्य, सनत, अनुरोध, संयम और ललित जैन आदि थे।
विज्ञापन